कंप्यूटर शिक्षा के लिए तरस रहे छात्र-छात्राएं

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मधुबनी : विभागीय उदासीनता व लापरवाही के कारण जिले के सरकारी हाइस्कूलों में कंप्यूटर की शिक्षा से हजारों छात्र-छात्राएं वंचित हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की तो बात दूर, जिला मुख्यालय के वाटसन हाइस्कूल सूड़ी हाइस्कूल व शिवगंगा बालिका हाइस्कूल में भी कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं होने से छात्र-छात्राओं में हाहाकार मचा है. डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कार्यालय […]

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मधुबनी : विभागीय उदासीनता व लापरवाही के कारण जिले के सरकारी हाइस्कूलों में कंप्यूटर की शिक्षा से हजारों छात्र-छात्राएं वंचित हैं. ग्रामीण क्षेत्रों की तो बात दूर, जिला मुख्यालय के वाटसन हाइस्कूल सूड़ी हाइस्कूल व शिवगंगा बालिका हाइस्कूल में भी कंप्यूटर की पढ़ाई नहीं होने से छात्र-छात्राओं में हाहाकार मचा है. डीपीओ माध्यमिक शिक्षा कार्यालय की लाख कोशिशों के बाद भी इन हाइस्कूलों में कंप्यूटर की पढ़ाई शुरू नहीं हो सकी है.
77 हाइस्कूलों को मिला था कंप्यूटर
राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के जिला संभाग प्रभारी पंकज कुमार चौधरी का कहना है कि जिले में 77 हाइस्कूलों को कंप्यूटर दिये गये थे. उन्होंने बताया कि 44 हाइस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है. शेष में विभिन्न कारणों से कंप्यूटर की पढ़ाई ठप है. गैर सरकारी सूत्रों का कहना है कि 77 में मुश्किल से 15 स्कूलों में ही कंप्यूटर की शिक्षा दी जा रही है.
जिले में 121 हाइस्कूल हैं. इन सभी हाइस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा नहीं मिलने से छात्र-छात्राओं में रोष गहराता जा रहा है. इनका कहना है कि अगर सत्र 2015-16 से सभी हाइस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा नहीं शुरू की गयी तो वे आंदोलन करने को विवश हो जायेंगे.
फाइलों में चल रहे कई कंप्यूटर
जिले के कई हाइस्कूलों में सिर्फ फाइलों पर ही कंप्यूटर चल रहे हैं. अधिकांश स्कूलों में कंप्यूटर बंद पड़े हैं. माध्यमिक शिक्षा अभियान कार्यालय मूकदर्शक बना हुआ है. कुछ स्कूलों में तो कंप्यूटर की चोरी भी हो गयी है. किस स्कूल में कितने कंप्यूटर हैं. इसकी जानकारी सार्वजनिक करने की छात्रों ने मांग की है. लंबे समय से कंप्यूटर बंद रहने के कारण कई कंप्यूटर खराब हो गये हैं. कंप्यूटर के साथ यूपीएस व अन्य एसेसरीज भी दिये गये थे.
क्या कहते हैं छात्र
हाइस्कूल के छात्र अमित कुमार कहते हैं कि कंप्यूटर शिक्षा नहीं मिलने के कारण प्रतियोगिता के दौर में जिले के हाइस्कूल के छात्र-छात्र पिछड़ते जा रहे हैं. वहीं, छात्र सोनम कुमारी कहती हैं कि जब सरकार हाइस्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा चला नहीं सकती तो लाखों रुपये की लागत से कंप्यूटर खरीद कर हाइस्कूल में देने का क्या औचित्य है. वहीं, आक्रोशित छात्र नीलम कुमारी ने बिहार सरकार के शिक्षा विभाग के प्रधान सचिव से जिले में कंप्यूटर शिक्षा की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है.
क्या कहते हैं अधिकारी
जिला शिक्षा पदाधिकारी श्यामानंद चौधरी ने कहा कि डीपीओ माध्यमिक शिक्षा से प्रतिवेदन मांगा जायेगा कि कितने स्कूलों में वास्तव में कंप्यूटर शिक्षा दी जा रही है और कितने में नहीं. रिपोर्ट मिलने के बाद बंद पड़े स्कूलों में कंप्यूटर शिक्षा शुरू कराने की पहल की जायेगी. उन्होंने कहा कि हाइस्कूल वाइज कंप्यूटर का भौतिक सत्यापन कराया जायेगा कि कितने कंप्यूटर दिये गये व कितने अभी हैं. लापरवाह के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जायेगी.
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