मुआवजे की आस में मर गये कई लोग
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Apr 2015 1:49 AM (IST)
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हाल झंझारपुर प्रखंड के अरड़ियासंग्राम गांव का मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आठ बार लगायी जा चुकी है गुहार अड़रियासंग्राम : एनएच-57 फोरलेन निर्माण को लेकर अधिग्रहित जमीन के मुआवजा का मामला अब जानलेवा बनने लगा है. झंझारपुर अंचल के अरड़ियासंग्राम गांव में मुआवजे की आस में अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत […]
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हाल झंझारपुर प्रखंड के अरड़ियासंग्राम गांव का
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से आठ बार लगायी जा चुकी है गुहार
अड़रियासंग्राम : एनएच-57 फोरलेन निर्माण को लेकर अधिग्रहित जमीन के मुआवजा का मामला अब जानलेवा बनने लगा है. झंझारपुर अंचल के अरड़ियासंग्राम गांव में मुआवजे की आस में अब तक आधा दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गयी है. वहीं दर्जनों लोग मुआवजे राशि के लिये विभाग का चक्कर लगा रहे हैं.
इससे लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है. वहीं अब इस मामले को लेकर पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव व्यापक जनांदोलन छेड़ने की घोषणा कर चुके हैं. जबकि मुआवजे से वंचित भू-धारियों ने कई बार सीएम से गुहार लगा चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समुचित अंजाम नहीं निकल सका है.
नौ साल से लंबित है भुगतान
मधुबनी जिले के पंडौल अंचल के नरपतिनगर से लेकर भारत नेपाल सीमा पर अवस्थित लौकही अंचल के नरहिया भुतहा चौक तक कुल 42 मौजे में सरकार द्वारा किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया था. वर्ष 2006 में एनएच-57 निर्माण के लिए अधिग्रहित जमीन का वाजिव मुआवजा का भुगतान नौ साल बाद भी लंवित है. मुआवजा मिलने की आस में किसानों की आंखें पथरा चुकी है.
आस में मरे दर्जन भर लोग
हैरत की बात तो यह है कि मुआवजा मिलने की आस में कई किसान बेमौत मारे जा चुके हैं. न्याय के साथ विकास करने का बिहार सरकार का दावा झंझारपुर अंचल के अड़रियासंग्राम में इस मामले महज छलावा हीं साबित हो रहा है. उल्लेखनीय है कि अड़रिया निवासी लखन ठाकुर, बैद्यनाथ साह, घुरन साह, सुरेंद्र झा सहित दर्जन भर लोगों ने मुआवजा भुगतान की आस में दम तोड़ दिया है. इससे अड़रियासंग्राम सहित अन्य गांवों में भारी जनाक्रोश है. आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान इस मुद्दे को लेकर लोगों ने राजनेताओं को सबक सिखाने का निर्णय लिया है.
भुगतान में अपनायी दो नीति
भू-धारियों का कहना है कि यहां एक हीं खेसरा में एक भाई को व्यवसायिक दर पर दो लाख रुपए प्रति डिसमिल का भुगतान जिला प्रशासन द्वारा कर दिया गया है. जबकि दूसरे भाई को उसी खेसरा में तीन हजार तीन सौ रुपए डिसमिल के हिसाब लगाकर भुगतान लेने के लिए भू-अर्जन विभाग नोटिस थमा रहा है. मधुबनी के अपर समाहर्ता सह मध्यस्थ पदाधिकारी द्वारा भी व्यावसायिक दर पर भुगतान देने का फैसला दिया जा चुका है. बावजूद इसके प्रशासनिक लापरवाही एवं उदासीनता के कारण यहां सरकार की मिट्टी पलीद हो रही है.
आंदोलन की हुई घोषणा
आखिरकार सोशल मल्टी मीडिया नेटवर्क ने अड़रिया के किसानों को इस मुद्दे पर भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय मंत्री देवेंद्र प्रसाद यादव से जोड़ा. श्री यादव ने जिला प्रशासन मधुबनी को एक माह के अंदर अंदर बाकी बचे भू-धारियों को अविलंव मुआवजा भुगतान करने को कहा है. पूर्व मंत्री देवेंद्र यादव ने घोषणा की है कि एक माह के अंदर मुआवजा भुगतान नहीं होने पर वे मजदूर दिवस के अवसर पर आगामी एक मई को अड़रियासंग्राम में किसानों के साथ सड़क पर उतर जायेंगें. बता दे कि श्री यादव अभी सत्ताधारी जदयू से जुड़े हुए हैं.
क्या कहते हैं अधिकारी
डीएम गिरिवर दयाल सिंह ने बताया है कि फिलहाल मुआवजे भुगतान का मामला निगरानी विभाग में जांच की जा रही है. इसके निष्पादन होते ही जायज लोगों के बीच मुआवजे की अवशेष राशि को वितरित की जायेगी.
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