61% महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त

Updated at : 21 Feb 2020 1:34 AM (IST)
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61% महिलाएं एनीमिया से ग्रस्त

मधुबनी : केंद्र सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को लेकर स्कोर कार्ड जारी किया गया है. जिसमें राज्य वर्ष 2018-19 में पूरे देश में एनीमिया की रोकथाम में 21 वें पायदान पर था. कार्यक्रम शुरू होने के मात्र 5 महीने बाद ही दिसंबर 2019 में 15 वें पायदान पर पहुंच गया है. स्वास्थ्य के […]

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मधुबनी : केंद्र सरकार द्वारा एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम को लेकर स्कोर कार्ड जारी किया गया है. जिसमें राज्य वर्ष 2018-19 में पूरे देश में एनीमिया की रोकथाम में 21 वें पायदान पर था. कार्यक्रम शुरू होने के मात्र 5 महीने बाद ही दिसंबर 2019 में 15 वें पायदान पर पहुंच गया है. स्वास्थ्य के कई मानकों में बेहतर प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शुमार केरल एवं तेलंगाना जैसे अन्य राज्य बिहार से निचले पायदान पर हैं. जो राज्य की एक अहम उपलब्धि है. लेकिन अभी भी जिले की 61 फीसदी महिलाएं एनीमिया से पीड़ित हैं.

बेहतर प्रदर्शन की संभावना. एनीमिया मुक्त भारत के राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी डॉ. वीके मिश्रा ने कहा है कि एनीमिया का खतरा प्रत्येक आयु वर्ग के लोगों को रहता है. इसे ध्यान में रखते हुए राष्ट्रीय पोषण अभियान के तहत बच्चों से लेकर धात्री माताओं तक के विभिन्न आयु वर्ग के 6 समूहों के लिए एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम की शुरुआत केंद्र सरकार द्वारा की गयी है.

सूबे में पिछले 31 जुलाई से इस कार्यक्रम की शुरुआत की गयी है. वर्ष 2018-19 में जहां एनीमिया की रोकथाम के लिए राज्य पूरे देश में 21 वें पायदान पर था. वहीं तीसरे क्वार्टर दिसंबर 2019 में 15 वें पायदान पर पहुंच गया है.

राज्य ने प्रत्येक तिमाही में प्रगति की है. वर्ष 2019 के पहले क्वार्टर(अप्रैल से जून ) में 21 वें पायदान से 19 वें, दूसरे क्वार्टर(जुलाई से सितंबर) में 16 वें पायदान एवं अंतिम क्वार्टर(अक्टूबर से दिसम्बर) में 15 वें पायदान पर पहुंचने में सफलता मिली है. कार्यक्रम के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्य द्वारा निरंतर फोलोअप किया जा रहा है. आने वाले समय में और बेहतर परिणाम सामने आयेंगे.
जन-जागरुकता से बदलेगी तस्वीर . एनीमिया एक लोक स्वास्थ्य समस्या है. इसमें एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम अहम भूमिका अदा कर रहा है. इस कार्यक्रम के प्रति लोगों में जागरूकता लाना अहम है. कार्यक्रम के तहत विभिन्न आयु वर्ग के 6 समूहों को चिह्नित की गयी है.
जिसमें 6 माह से 59 माह तक के बालक एवं बालिकाओं के लिए हफ्ते में दो बार ऑटोडिस्पेंसर की मदद से एक मिलीलीटर दवा दी जाती है. वहीं 5 वर्ष से 59 माह तक के बच्चों को हफ्ते में एक गुलाबी गोली एवं 10 से 19 वर्ष के किशोर एवं किशोरों को एक गुलाबी गोली प्रत्येक बुधवार को स्कूलों एवं आंगनबाड़ी केन्द्रों में दी जा रही है.
साथ ही 20 से 24 वर्ष के प्रजनन आयु वर्ग की महिलाएं(जो गर्भवती अथवा धात्री न हो) को हफ्ते में एक लाल गोली, गर्भवती माताओं को गर्भावस्था के चौथे महीने से 180 दिनों तक की खुराक एवं धात्री माताओं को प्रसव के बाद प्रसव के बाद 180 दिनों तक वीएचएसएनडी स्थल पर आयरन की गोली दी जाती है. सिविल सर्जन डॉ. किशोर चंद चौधरी ने कहा है कि एनीमिया एक लोक स्वास्थ्य समस्या है. जिसके निदान में एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम अहम भूमिका अदा कर रहा है.लोगों को इस कार्यक्रम के प्रति जागरुक करना होगा. तभी एनीमिया पर काबू पाया जा सकता है.
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