16 माह से बेटे के इंतजार में पथरा गयीं संतोलिया की आंखें

Published at :18 Jan 2018 4:21 AM (IST)
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16 माह से बेटे के इंतजार में पथरा गयीं संतोलिया की आंखें

मधुबनी : जगतपुर के फुलवारी टोला की संतोलिया देवी सुबह में अपने घर का काम कर रही थी. इसी दौरान उसके आंगन में पड़ोस के दो तीन बच्चे खेलते-खेलते आ गये. बच्चों को देखते ही वह फूट-फूट कर रोने लगी. उसके रोने की आवाज सुन घर के बाहर काम कर रहा उसका पति लाल बाबू […]

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मधुबनी : जगतपुर के फुलवारी टोला की संतोलिया देवी सुबह में अपने घर का काम कर रही थी. इसी दौरान उसके आंगन में पड़ोस के दो तीन बच्चे खेलते-खेलते आ गये. बच्चों को देखते ही वह फूट-फूट कर रोने लगी. उसके रोने की आवाज सुन घर के बाहर काम कर रहा उसका पति लाल बाबू व आस पास की दो चार महिलाएं भी आंगन में आ गयी. करीब घंटे भर बाद वह सहज हो सकी. फिर अपने काम में लग गयी. दरअसल करीब 16 माह पहले संतोलिया के 11 माह के बेटे का दो लोगों ने अपहरण कर लिया था.

संतोलिया बताती है कि भगवान ने उसे पहले तीन बेटी दी थी. काफी मन्नत मांगने पर एक बेटा हुआ. पर न जाने किसकी नजर उसे लग गयी, उसके बेटे को गायब कर दिया गया. बीते 16 माह से हर दिन वह अपने मुन्ने को याद कर रो पड़ती है. संतोलिया के पति लाल बाबू बताते हैं कि जब जब गांव के ढाई तीन साल के बच्चे को देखती है बिना किसी से कुछ बोले वह रोने लगती है.

गरीब कहां जाएं तलाश करने. लालबाबू सहनी बताता है कि गरीब परिवार से है. मेहनत मजदूरी करता है तो परिवार चलता है. जिस दिन काम नहीं करता भूखे पेट पूरा परिवार सो जाता है. जिस दिन उसके बेटे को गायब किया गया , उस दिन भी वह काम पर ही गया था. पर गरीब परिवार आखिर कब तक और कहां कहां खोजे. शुरू शुरू में तो कुछ दिन तक पुलिस के अधिकारी आते भी थे. पर अब न तो कोई आता है और न ही कोइ जानकारी देता है. वहीं पड़ोसी हुक्मदेव सहनी बताता है कि बेटे की खोज में लाल बाबू कर्ज के बोझ तले दब गया है. इस प्रकार की घटना तो गांव में कभी भी नहीं हुई, पैसा वाला तो है नहीं, फिर पता नहीं किसी ने मासूम मुन्ना का अपहरण क्यों किया.
दो संदिग्धों का स्केच हुआ था जारी
रहिका थाना के जगतपुर गांव से 26 सितंबर 2016 को अपहृत 11 माह के बच्चे का एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी सुराग हाथ नहीं लग सका. पुलिस के लिए यह मामला अनसुलझे केस के लिस्ट में आ गया है. अपहरणकर्ताअों की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी है.
का. बीते 26 सितंबर को दिन दहाड़े बाइक सवार दो अपराधियों द्वारा ग्यारह माह के बच्चे का अपहरण का मामला रहस्यमय बनता जा रहा है. जिस प्रकार की माली हालत अपहृत मुन्ना के पिता लाल बाबू सहनी की है कि फिरौती के लिए अपहरण की बात लोगों के गले नहीं उतर रही.
मालूम हो कि मुन्ना का अपहरण बाइक पर सवार दो अपराधियों ने उस वक्त कर लिया था, जब मुन्ना को गोद में लेकर उसकी बहन घर के समीप ही खेल रही थी. इधर, रहिका थाना क्षेत्र से गायब हुए बच्चे का मामला अभी सुलझ भी नहीं सका है कि एक बार फिर एक सहनी परिवार के बच्चे का अपहरण हो चुका है.
चार दिन पहले हुआ था सत्यम का अपहरण
बेनीपट्टी थाना के लदौत गांव से सात वर्षीय बच्चे का कथित तौर पर अपहरण उस वक्त कर लिया गया, जब वह शौच के लिए निकला था. लदौत गांव निवासी राजेश मुखिया का पुत्र सत्यम मुखिया सात वर्ष शनिवार की सुबह अपने घर के समीप तकरीबन सात बजे शौच करने गया था. पर वह जब दिन के ग्यारह बजे तक लौट कर वापस नहीं आया था. तो परिजनों ने सत्यम की खोज शुरू की. ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी. जहां पुलिस बच्चे की खोज में जुट गयी है.
बच्चों के गायब होने का बढ़ा मामला, पुलिस बरामदगी में लाचार
बीते एक-डेढ़ साल में छोटे छोटे बच्चों के गायब होने के मामले सामने आया है, और इन मामलों में पुलिस के हाथ खाली रह गये उसको देखकर लोगों में अब बच्चों की सुरक्षा को लेकर भय व्याप्त होने लगा है. जगतपुर के लाल बाबू मुखिया के 11 माह के बेटे मुन्ना की बात हो, लखनौर के कटमा खोइर गांव के चार साल के बालकृष्ण की या फिर बेनीपट्टी के लदौत गांव के सत्यम की, किसी भी मामले में परिजनों की हालत ऐसी नहीं है कि बच्चों को किसी ने फिरौती के लिए गायब किया हो.
इस प्रकार का फोन कॉल भी कहीं से नहीं आया. इसी ने अब पुलिस व आम लोगों को परेशान कर दिया है कि आखिर इन छोटे छोटे बच्चों को गायब कौन कर रहा, और पुलिस को किसी भी प्रकार का सुराग क्यों नहीं मिल पा रहा. एसपी दीपक बरनवाल ने बताया है कि फिरौती के लिये फोन आता या कुछ मैसेज छोड़ा जाता तो पुलिस के पास जांच का कुछ सुराग मिलता. पर यहां तो कुछ सुराग ही नहीं मिल रहा. ऐसे में पुलिस के पास भी ढूंढ पाने का कोई जरिया नहीं बच रहा. बताते हैं कि इन मामलों में खोज तो लगातार की गयी. पर दुर्भाग्य ही है कि बच्चे का कोई सुराग नहीं मिल सका. कहते हैं कि ऐसे मामलों में तो लोगों को खुद ही अपने बच्चे का खयाल रखना चाहिए.
बच्चों के गायब होने के तीनों मामले में से किसी भी मामले में पुलिस किसी को गिरफ्तार नहीं कर सकी. इसमें लखनौर के कटमा खोइर गांव के गायब हुए बालकृष्ण की तो अपहरणकर्ताओं ने हत्या भी कर दी. जिसमें लोगों ने लखनौर पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर बवाल काटा था. कटमा खोइर गांव से चार साल के बालकृष्ण का अपहरण 14 फरवरी 2017 को हो गया था. जिसके दो दिन बाद 16 फरवरी को उसका शव समीप के एक खेत से मिला. इसके बाद आक्रोशित लोगों ने थाना में जमकर तोड़फोड़ व उपद्रव किया था.
इस मामले में भी न तो अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की मांग की और न ही किसी की गिरफ्तारी ही हो सकी. पुलिस के लिए यह मामला भी अनसुलझा ही रह गया.
नहीं मिल रहा बच्चे का सुराग
जगतपुर गांव से अपहृत 11 माह के बच्चे के मामले में पुलिस ने परिजन से पूछताछ के आधार पर दो संदिग्ध का स्केच भी जारी किया था. रहिका थाना प्रभारी पंकज आनंद ने बताया है कि पुलिस ने इस मामले में फाइल बंद तो नहीं किया है. पर अपहृत बच्चे का अब तक ट्रेस नहीं मिल सका.
कई जगहों पर छापेमारी भी की गयी थी.
पर अब तक उसका पता नहीं चल सका है.
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