मधुबनी : सदर अस्पताल व अनुमंडलीय अस्पताल में प्रसव को आने वाली महिलाओं को सिजेरियन के लिए रेफर नहीं किया जायेगा. अब सरकारी अस्पताल में निजी चिकित्सक के सहारे मरीजों का इलाज होगा. निजी स्त्री रोग विशेषज्ञ को अस्पताल द्वारा हायर कर प्रसव को आने वाली महिलाओं को सिजेरियन की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी.
इसके लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा पहल शुरू कर दी गयी है. प्रत्येक सिजेरियन पर निजी चिकित्सकों को 10 हजार रुपये दिया जायेगा. जिसमें सिजेरियन करने वाली महिला चिकित्सक को पांच हजार रुपये, मुर्च्छक को 2 हजार रुपये, शिशु रोग विशेषज्ञ को 15 सौ रुपये तथा प्रसव में कार्यरत अन्य कर्मी को 15 सौ रुपये दिया जायेगा.
सरकारी अस्पताल में नहीं हो रहा प्रसव सिजेरियन : कुल प्रसव में जटिल प्रसव का अनुपात 15 प्रतिशत है. जिसमें 8 से 10 प्रतिशत प्रसव में सिजेरियन ऑपरेशन करना जरूरी होता है. जिससे की जच्चा बच्चा दोनों की जान बचाया जा सके.
आंकड़ों पर गौर करते तो सरकारी अस्पतालों में हो रहे प्रसव में सी सेक्सन (सिजेरियन) का अनुपात महज एक प्रतिशत से भी कम है. मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी
लाने के लिए जिले के सरकारी अस्पतालों में सी सेक्सन प्रसव की सुविधा देना वांछनीय है. सरकार द्वारा इसके तहत विशेष पहल शुरू कर दी गयी है. इस योजना के तहत प्रथम रेफरल इकाई पर विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध नहीं है, वहां सिजेरियन सेक्सन प्रसव की सुविधा उपलब्ध करने के लिए निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों को ऑन-कॉल की इजाजत दिया गया है.
सीएस ने जारी किया दिशा निर्देश : सिविल सर्जन डाॅ. अमरनाथ झा ने उपाधीक्षक सदर अस्पताल झंझारपुर, फुलपरास एवं जयनगर को सिजेरियन सेक्सन प्रसव की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए निजी विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवा लेने का निर्देश दिया है. इसके तहत प्रति सिजेरियन दस हजार रुपये दिये जाएंगे. यह पैसा सरकारी स्तर पर चिकित्सकों को मुहैया करायी जायेगी.
क्या कहते हैं अधिकारी : सिविल सर्जन डाॅ. अमरनाथ झा ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की यह पहल सकारात्मक है. साथ ही इस योजना से मातृ एवं शिशु मृत्यु दर पर रोक लग सकेगी. साथ ही सरकार द्वारा आम लोगों को मिलने वाली स्वास्थ्य सुविधा का भी विस्तार हो सकेगा. डाॅ. झा ने यह भी कहा कि सभी उपाधीक्षक को अपने-अपने क्षेत्रांतर्गत निजी विशेषज्ञ चिकित्सकों से संपर्क कर उक्त कार्य करने का अनुरोध करने का भी निर्देश दिया गया है. साथ ही इससे संबंधित प्रचार-प्रसार करवाने का भी निर्देश जारी किया गया है. जिससे कि अधिक से अधिक निजी विशेषज्ञ चिकित्सक की सेवा लिया जा सके.
विभाग की नयी पहल
प्रति सिजेरियन चिकित्सकों को मिलेगी दस हजार की राशि
सदर अस्पताल सहित पीएचसी में नहीं है एक भी महिला सिजेरियन चिकित्सक
नहीं है महिला विशेषज्ञ चिकित्सक
जिला के सदर अस्पताल सहित अनुमंडलीय अस्पताल में एक भी महिला सिजेरियन विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं है. लिहाजा प्रसव को आने वाली सिजेरियन प्रसव को अस्पताल से तत्काल रेफर कर दिया जाता है. जिसके कारण मरीजों को आर्थिक क्षति उठानी पड़ती है. बताते चलें कि विगत दो माह पूर्व तक सदर अस्पताल में दो महिला विशेषज्ञ चिकित्सकों की पदस्थापना हुई. दोनों महिला चिकित्सक के कार्यकाल में दर्जनों प्रसव सिजेरियन किया गया. जिसके बाद दोनों महिला विशेषज्ञ चिकित्सकों का स्थानांतरण दरभंगा हो गया. जिसके बाद जिले के विशेषज्ञ महिला चिकित्सक विहीन हो गया है जिला.