महागठबंधन कार्यालय में पसरा सन्नाटा
Author :Prabhat Khabar Digital Desk
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Updated at :27 Jul 2017 3:58 AM
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मधुबनी : शाम के पौने सात बज रहे हैं. बादल घिरी हुई थी. हल्की बूंदा बांदी भी हो रही थी. हर ओर वातावरण में ठंडापन था. पर इससे इतर देर शाम सूबे के सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफा दिये जाने से माहौल पूरी तरह गरम हो गया था. खासकर राजनीतिक गलियारे में इसकी गरमाहट चरम […]
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मधुबनी : शाम के पौने सात बज रहे हैं. बादल घिरी हुई थी. हल्की बूंदा बांदी भी हो रही थी. हर ओर वातावरण में ठंडापन था. पर इससे इतर देर शाम सूबे के सीएम नीतीश कुमार के इस्तीफा दिये जाने से माहौल पूरी तरह गरम हो गया था. खासकर राजनीतिक गलियारे में इसकी गरमाहट चरम पर पहुंच गयी थी. हम भी इस गरमाहट की टोह लेने निकले. सबसे पहले भाजपा कार्यालय ही जाना बेहतर लगा. सो हम भाजपा कार्यालय की ओर रूख किये.
उम्मीद के मुताबिक इस कार्यालय में दूर से ही सुगबुगाहट होने की बात दिखी. हल्के रौशनी का बल्व कार्यालय में चल रहा था. बाहर परिसर में पांच सात मोटरसाईकिल लगी थी जो यह जताने के लिये काफी थी कि कार्यालय में अभी कार्यकर्ता मौजूद हैं. अंदर जिलाध्यक्ष घनश्याम ठाकुर सहित पांच सात अन्य कार्यकर्ता भी थे.
इन लोगों को भी नीतीश के इस्तीफे की बात पता चल चुकी थी. हमें कुछ आश्चर्य नहीं हुआ. हमारे पहुंचते ही सभी ने हंसकर बिन कहे ही नीतीश कुमार के इस्तीफे प्रकरण की बात शुरू कर दी. हालांकि इनकी यह बात चीत पूर्व से ही जारी थी. जिला अध्यक्ष कह रहे थे कि नीतीश जी ने समय के अनुसार काम किया है. बीते करीब एक माह से बिहार की राजनीति में जो घटना क्रम हो रही थी वह नीतीश के दामन को भी छू रहा था. इस मामले में तो पहले ही राजद के सुप्रीमो को मुख्य तौर पर पहल करनी चाहिये थी. उनके उपमुख्यमंत्री पुत्र को सीबीआई के छापेमारी के बाद ही तत्काल इस्तीफा देना चाहिये. पर उन्होंने नहीं दिया. नीतीश कुमार ने बीते कई दिनों तक घटनाक्रम को पूरी तरह परखा है. जब तेजस्वी ने इस्तीफा देने से खुले तौर पर इंकार कर दिया तो नीतीश की चुप्पी को लोगों ने गलत समझा था. हर दिन इनकी गलत छवि बनती जा रही थी. सो ऐसे में नीतीश का यह पहल सराहनीय है.
हालांकि इस बात चीत के दौरान सीएम का दिल्ली में नीतीश कुमार का पीएम के साथ मुलाकात को भी लोग जोड़ रहे थे. हम भी कुछ देर इन लोगों से बातें कर बाहर निकले. हम पांच मिनट बाद ही जदयू कार्यालय पहुंचे. पर यहां पर वीरानी छायी हुई थी. हल्के रौशनी का बल्व जल रहा था. पर कार्यालय में ताला लटका था. कहीं कोई नजर नहीं आया. यही हाल राजद कार्यालय का भी था. नीतीश के इस्तीफे के बाद इस इस कार्यालय में भी सन्नाटा ही पसरा था.
भाजपा कार्यालय में देर रात तक चलता रहा मंथन
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