बूढ़े पिता के कंधे पर बेटे की मौत का गम

मधुबनी/ पंडौल : सकरी थाना क्षेत्र के सिबोतर टोला निवासी मो छीतन की आंखों में अब उतना पानी भी नहीं कि हमेशा ही बहती रहे. चेहरे पर जमाने भर का गम, आखें मानों बेटे की गम में रोते-रोते सूख गयी है. हो भी क्यों नहीं. जवान बेटा सोहैल अब इस दुनिया में नहीं रहा. एक […]
मधुबनी/ पंडौल : सकरी थाना क्षेत्र के सिबोतर टोला निवासी मो छीतन की आंखों में अब उतना पानी भी नहीं कि हमेशा ही बहती रहे. चेहरे पर जमाने भर का गम, आखें मानों बेटे की गम में रोते-रोते सूख गयी है. हो भी क्यों नहीं. जवान बेटा सोहैल अब इस दुनिया में नहीं रहा. एक तो बेटे की मौत का गम इस उम्र में अल्लाह ने दे दी है. दूसरा गम यह सताये जा रही है कि अपने कलेजे के टुकड़े को अपने गांव के सरजमीं पर सुपुर्दे खाक भी नहीं कर सके हैं.
उतनी पैरवी या जानकारी भी इस बूढ़े लाचार बाप में नहीं है कि बेटे के शव को वहां से मांग सके. दरवाजे पर आनेजाने वाले हर लोगों से बस यही बात कर रहे हैं कि कोई तो मेरे बेटे का शव दूर देश से ला दे. पर, इनकी इस बात का जवाब किसी के पास नहीं. कोई आश्वासन भी नहीं दे पा रहा. शोक व्यक्त करने जाने वाले खुद इस मामले में लाचार दिख रहे हैं. मो. छीतन बताते हैं कि यदि यह जानता कि हमारा बेटा हमारे लिये रोटी का इंतजाम करने जायेगा. वह कभी भी वापस नहीं आयेगा, तो उसे कभी भी परदेस नहीं जाने देता. यहीं पर पूरा परिवार सूखी रोटी खाकर भी अपना जीवन बिता लेते.
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