एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक समृद्धि को बढ़ावा देता है कार्यक्रम - डॉ विशाल

पूजा के साथ-साथ डांडिया कार्यक्रम भी आयोजित किया,
मधेपुरा. नगर के खेदन बाबा चौक स्थित चैती दुर्गा मंदिर परिसर में शनिवार की देर शाम चैत्र नवरात्र के अवसर पर भव्य समारोह का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व मुख्य पार्षद डॉ विशाल कुमार बबलु ने की. लोगों के द्वारा भक्तिभाव एवं श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना की गयी. कार्यक्रम के दौरान सिवानी एवं सिवांगी की टीम के सदस्यों ने डांडिया कार्यक्रम आयोजित किया. इस समारोह की अध्यक्षता पूर्व मुख्य पार्षद डॉ विशाल कुमार बबलु ने की. जिन्होंने कार्यक्रम के माध्यम से न केवल धार्मिक आस्था के महत्व को उजागर किया, बल्कि एकता, भाईचारे और सांस्कृतिक समृद्धि को भी बढ़ावा देने की बात की. इस अवसर पर स्थानीय लोग उत्साह और श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते नजर आये. पूजा के दौरान भक्तों ने दुर्गा माता की आराधना करते हुये विशेष रूप से माता की आरती की और भक्ति गीतों का गायन किया. आयोजकों ने इस बार की पूजा को और भी भव्य बनाने के लिए कई नई व्यवस्थाएं की थी. पूजा के साथ-साथ डांडिया कार्यक्रम भी आयोजित किया, इसमें सिवानी एवं सिवांगी की टीम के सदस्यों ने अपनी परफॉर्मेंस पेश की. यह कार्यक्रम न केवल धार्मिक महत्व रखता था, बल्कि सभी के लिए एक मनोरंजक अनुभव भी बना. सभा में उपस्थित सभी सदस्यों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि हर जिम्मेदारी का निर्वहन सही तरीके से हो. पूर्व मुख्य पार्षद डॉ विशाल ने कहा, “चैत्र नवरात्र केवल धार्मिक आस्था का पर्व नहीं है, बल्कि यह समाज में एकता और भाईचारे का संदेश भी देता है. इस प्रकार, पूजा के साथ-साथ सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते हुये उन्होंने यह स्पष्ट किया कि यह पर्व धर्म के साथ-साथ सामाजिक संगठना का भी प्रतीक है. समारोह में अन्य उपस्थित लोगों में प्रशांत कुमार भारत, मनोज यादव, प्रमोद यादव, मंटू यादव, संजय यादव, दिलीप स्वर्णकार, राजेश स्वर्णकर, मगन पासवान, हीरा यादव, जयकुमार यादव, लाल यादव, गौरी यादव, मनीष कुमार मिंटू, रमन कुमार, रघुवंश कुमार, अशोक स्वर्णकार, प्रमोद यादव, सौरभ यादव, अमित यादव, गलो यादव, सुधांशु यादव, दयानंद यादव, सुधीर यादव, नेपाल यादव आदि शामिल थे. यह कार्यक्रम न केवल पूजा के प्रति लोगों की भक्ति को दर्शाता था, बल्कि समाज के विभिन्न तबकों को एकजुट करने में भी महत्वपूर्ण साबित हुआ. मिल-जुलकर काम करने से न केवल कार्यक्रम की सफलता सुनिश्चित हुई, बल्कि सभी ने एक नई भावना के साथ अपने-अपने क्षेत्रों में जिम्मेदारी निभाने का प्रण लिया. इस तरह, यह पर्व मात्र एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता का प्रतीक भी बन गया.
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