ईश्वर की भक्ति करने से मन के अंदर छीपे पापों का होता है नाश : सुकरमानंद

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ईश्वर की भक्ति करने से मन के अंदर छीपे पापों का होता है नाश : सुकरमानंद

ईश्वर की भक्ति करने से मन के अंदर छीपे पापों का होता है नाश : सुकरमानंद

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उदाकिशुनगंज. दिव्य ज्योति जागृति संस्थान के तत्वावधान में परम् पूज्य आशुतोष जी महाराज के सानिध्य में एक दिवसीय सत्संग में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी. अनुमंडल मुख्यालय स्थित मुख्य बाजार में सत्संग के दौरान प्रवचन करते स्वामी सुकरमानंद जी महाराज ने कहा कि संतों की अमृतवाणी श्रवण मात्र करने से ही मानव जीवन का कल्याण हो जाता है, लेकिन आज के परिवेश में आधुनिकता के इस दौर में लोग ईश्वर की भक्ति करना भूल गये हैं. जो लोग अपने जीवन के व्यस्ततम समय में से कुछ समय ईश्वर की भक्ति में लगाते हैं. उनका जीवन चरितार्थ हो जाता है. मनुष्य को हमेशा अच्छे कर्मों पर चलना चाहिए. संतों की संगति से मन के अंदर की विकृतियों का नाश होता है और संसारिक जीवन उनका सुखमय व्यतीत होता है. सत्संग में साध्वी शितला भारती, महामाया भारती,साध्वी पुष्पा भारती, साध्वी निगम भारती ने अपने भवन व प्रवचन से श्रद्धालुओं को भाव विभोर कर सारा वातावरण भक्तिमय हो गया. सत्संग को सफल बनाने में ओमप्रकाश यादव, घनश्याम यादव, विजय गुप्ता, राजकुमार गुप्ता आदि का सराहनीय योगदान रहा.

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कुमार आशीष

लेखक के बारे में

By कुमार आशीष

कुमार आशीष 15 वर्षों से प्रभात खबर समूह के साथ पत्रकारिता जगत में सक्रिय हैं. दिल्ली विश्वविद्यालय से स्नातक और भारतीय विद्या भवन, नई दिल्ली से जनसंचार में डिग्री प्राप्त करने के बाद इन्होंने राजनीति, अपराध और कोसी अंचल की रिपोर्टिंग में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाई है. डिजिटल प्लेटफॉर्म पर पिछले पांच वर्षों से सक्रिय हैं. पत्रकारिता में उत्कृष्ट योगदान के लिए इन्हें नेपाल में 'अंतरराष्ट्रीय मैथिली युवा पत्रकारिता सम्मान' से नवाजा जा चुका है.

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