MADHEPURA मखाना की खेती से समृद्धि की ओर बढ़ रहे परमानंदपुर पंचायत के किसान

मधेपुरा जिले में पहली बार कुमारखंड प्रखंड अंतर्गत परमानंदपुर पंचायत के किसान सैकड़ों एकड़ भूमि पर मखाना की खेती कर समृद्धि और खुशहाली की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
कुमारखंड (मधेपुरा) से पवन कुमार की रिपोर्ट :
मधेपुरा जिले में पहली बार कुमारखंड प्रखंड अंतर्गत परमानंदपुर पंचायत के किसान सैकड़ों एकड़ भूमि पर मखाना की खेती कर समृद्धि और खुशहाली की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं. पहले जहां किसान पारंपरिक रूप से धान की खेती कर सीमित मुनाफे में जीवनयापन करते थे, वहीं अब अधिकांश किसान मखाना की खेती अपनाकर बेहतर आमदनी अर्जित कर रहे हैं.बड़े पैमाने पर मखाना उत्पादन कर रहे किसान
स्थानीय किसान सहदेव साह, बैजनाथ साह, राजेंद्र साह और संजीत कुमार के साथ-साथ कटिहार और पूर्णिया जिले के व्यापारी भी यहां बड़े पैमाने पर मखाना उत्पादन कर रहे हैं. ये व्यापारी स्थानीय जमींदारों से 25 से 30 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से जमीन लीज पर लेकर खेती कर रहे हैं.
किसानों को दी जाती है सब्सिडी
कृषि पदाधिकारी सुमन सौरभ ने बताया कि सरकार की ओर से मखाना की खेती पर किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जाती है. उन्होंने कहा कि मखाना की खेती से किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो रहा है और यह क्षेत्र के लिए एक सकारात्मक संकेत है.
दिसंबर-जनवरी में होती है बुआई
मखाना की खेती के लिए 4 से 5 फीट गहरे पानी की आवश्यकता होती है. इसकी बुआई दिसंबर-जनवरी में होती है और जुलाई-अगस्त में फसल तैयार होती है. फसल तैयार करने में मजदूरों की अहम भूमिका होती है, जो पानी के भीतर से मखाना निकालते हैं. एक एकड़ में करीब 1000 पौधे लगाए जाते हैं, जिनकी लागत 3 से 4 हजार रुपये तक आती है. तैयार फसल का बाजार मूल्य 20 से 30 हजार रुपये प्रति क्विंटल तक होता है, जबकि प्रति एकड़ उत्पादन 6 से 7 क्विंटल तक पहुंचता है.
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