विद्यालय रसोइयों को दो माह से मानदेय भुगतान नहीं किया जाना निंदनीय
Published by : Prabhat Khabar News Desk Updated At : 04 Nov 2024 10:35 PM
मधेपुरा सहित पूरे बिहार की करीब 2.40 लाख विद्यालय रसोइयों को दिपावली-छठ जैसे बड़े त्योहार के मौके पर भी पिछले दो माह का बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाना अत्यंत निंदनीय है.
मधेपुरा. मधेपुरा सहित पूरे बिहार की करीब 2.40 लाख विद्यालय रसोइयों को दिपावली-छठ जैसे बड़े त्योहार के मौके पर भी पिछले दो माह का बकाया मानदेय का भुगतान नहीं किया जाना अत्यंत निंदनीय है. एक्टू के राज्य कमेटी सदस्य सह मधेपुरा जिला सचिव रामचंद्र दास ने कहा कि सरकार ने दीपावली-छठ पर्व के अवसर पर राज्य में कार्यरत कर्मियों का वेतन-मानदेय का भुगतान त्योहार से पूर्व करने का आदेश दिया था. किंतु मात्र 1650 रुपाया के मामूली मासिक मानदेय पर कार्यरत सरकारी स्कूलों के रसोइयों को पिछले दो माह के मानदेय का भुगतान अब तक नहीं किया गया है. दीपावली-छठ जैसे बड़े त्योहार के अवसर पर भी गरीब रसोइयों को मानदेय का भुगतान नहीं किया जाना, नीतीश-भाजपा सरकार की घोर लापरवाही है. उन्होंने डबल इंजन की नीतीश-भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार का काम सिर्फ विज्ञापन, प्रचार-प्रसार व सरकारी कागजी आदेश तक सिमट गया है. वास्तव में सरकारी आदेश व निर्णय के बावजूद काम तो उच्च अधिकारियों के मनमर्जी के अनुसार ही हो रहा है. उन्होंने सभी विद्यालय रसोइयों को अविलंब सितंबर व अक्टूबर दो माह का बकाया मानदेय का भुगतान करने की मांग करते हुए कहा कि सरकार इस बात का हवाला देकर रसोइयों के साथ अन्याय नहीं कर सकती कि केंद्र ने पैसे नहीं दिये इसलिए राज्य सरकार रसोइयों को दो माह का बकाया मानदेय नहीं देगी. उन्होंने सरकार से सवाल किया कि मध्याह्न भोजन योजना की रीढ़ विद्यालय रसोइयों के साथ वह इतना बड़ा अन्याय कैसे कर सकती है? उन्होंने विद्यालय रसोइयों के बीच कुकिंग प्रतियोगिता आयोजित करने के निर्णय को ढकोसला बताया और कहा कि कभी प्रशिक्षण, कभी प्रतियोगिता की बजाय सरकार रसोइयों के मानदेय में सम्मानजनक वृद्धि करें व नियमित भुगतान सुनिश्चित करें. उन्होंने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि भागलपुर सहित राज्य की 2.40 लाख विद्यालय रसोइया को अविलंब अगर पिछले दो माह का बकाया मानदेय भुगतान नहीं किया गया तो त्योहार खत्म होने के बाद बिहार राज्य विद्यालय रसोइया संघ (ऐक्टू) सड़कों पर उतर आंदोलन तेज करेगी.
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