9.50 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज एमआरआइ मशीन, मरीजों को 52 प्रकार की जांच, आठ जिलों के लोगों को लाभ

Updated at : 13 Mar 2026 7:13 PM (IST)
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9.50 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज एमआरआइ मशीन, मरीजों को 52 प्रकार की जांच, आठ जिलों के लोगों को लाभ

9.50 करोड़ की लागत से मेडिकल कॉलेज एमआरआइ मशीन, मरीजों को 52 प्रकार की जांच, आठ जिलों के लोगों को लाभ

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सिंहेश्वर.

जननायक कर्पूरी ठाकुर मेडिकल काॅलेज अस्पताल परिसर में अब मरीजों कम रेट पर मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग जांच हो सकेगी. शुक्रवार से मेडिकल काॅलेज में मशीन का शुभारंभ किया गया. मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक डॉ नगीना चौधरी, उपाधीक्षक डॉ प्रिय रंजन भास्कर, अंजनी कुमार ने बताया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल में एमआरआइ टेस्ट की सुविधा शुरू हो गयी है. इससे कोसी क्षेत्र के अलावा दूर-दराज के आठ जिलों के मरीज को इलाज में सुविधा होगी. उन्होंने कहा एमआरआइ जांच शुरू होने से अब अस्पताल में कम दरों में एमआरआइ जांच की सुविधा उपलब्ध हो गयी हैं. अस्पताल में रोजाना 12 घंटे में लगभग 25 से 20 मरीजों को इससे फायदा होगा. अस्पताल में 1.5 टेस्ला एमआरआइ मशीन स्थापित की गयी है. यहां पीपीमोड से कम दरों पर जांच की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी. स्वास्थ्य विभाग ने पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप के तहत ये सुविधा उपलब्ध करवायी है. अब अस्पताल में इस नई एमआरआइ मशीन से सभी प्रकार की जांच एक्यूरेट हो सकेंगी.

कोसी क्षेत्र का सबसे बड़ा सरकारी अस्पताल होने के कारण यहां रोजाना हजारों की संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचकर अपना इलाज कराते है. जिला के अलावा सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, अररिया, कटिहार, किशनगंज, पूर्णिया सहित समेत आसपास के आठ जिले के हजारों रोगियों को अब एमआरआइ जांच के लिए भटकना नहीं पड़ेगा.

बता दें राष्ट्रीय राजमार्ग में अधिकांश सड़क हादसों के शिकार लोग चोटिल हो जाते हैं. अधिकांश के माथे, पैर और अन्य जगह गंभीर चोटे लगती हैं, लेकिन एमआरआइ की सुविधा नहीं होने के कारण सटीक जांच नहीं हो पाती थी. पहले एमआरआइ जांच के लिए मरीजों को पटना या अन्य बड़े शहरों का रुख करना पड़ता था. इससे न सिर्फ समय की बर्बादी होती थी, बल्कि आर्थिक बोझ भी बढ़ता था. उचित समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण जान का भी जोखिम बना रहता था.

मेडिकल कॉलेज में यह सेवा शुरू होने से गरीब और मध्यम वर्ग के मरीजों को सहूलियत होगी. नई एमआरआइ मशीन विभिन्न जांचों को बेहद एक्यूरेसी से दिखाएंगी. मेडिकल कालेज में स्थापित एमआरआइ मशीन 9.50 करोड़ रुपये की लागत से स्थापित किया गया है. इसमें निर्माण, उपकरण और तकनीकी उन्नयन शामिल हैं. इसमें 1.5 टेस्ला जेडई मशीन लगायी गयी है, जो हाल ही में लॉन्च उन्नत तकनीक से लैस है. यह तेज, सटीक स्कैनिंग, उन्नत इमेजिंग और ऊर्जा दक्षता सुनिश्चित करती है. केंद्र में प्रतिदिन 30 मरीजों की स्कैनिंग क्षमता है, न्यूनतम प्रतीक्षा समय और सटीक रिपोर्टिंग के साथ गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करता है.

पीपीपी मोड के तहत बाजार की अपेक्षा 50 प्रतिशत तक कम शुल्क पर एमआरआइ जांच की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी. अस्पताल में हेड विदाउट कॉन्टैक्ट जांच 1998 रुपये में हो सकेगी, जबकि बाहर में यह जांच छह से सात हजार रुपये में होती है. वहीं सर्वाइकल स्पाइन की जांच मात्र 2125 रुपये में होगी, जबकि बाहर यह 6000 में होती है. पैर के घुटने के ज्वाइंट का एमआरआइ बाहर सात हजार से नौ हजार पांच सौ में होता है, जबकि मेडिकल में मात्र 2125 रुपये संभव है. इस प्रकार यहां कुल 52 प्रकार के जांच की जायेगी.

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Kumar Ashish

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