Katihar: सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, मरीजों पर आर्थिक बोझ, व्यवस्था पर उठे सवाल

Published by : Shruti Kumari Updated At : 14 May 2026 12:47 PM

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सदर अस्पताल मधेपुरा

अस्पताल की स्थिति यह है कि कई विभागों में कर्मियों और डॉक्टरों की भारी कमी है. बाहर से देखने में अस्पताल भले ही व्यवस्थित नजर आता हो, लेकिन अंदर की स्थिति व्यवस्था की पोल खोल देती है. मरीजों के अनुसार अस्पताल में सुविधाएं सिर्फ फाइलों और दावों तक सीमित हैं.

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मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट:

मधेपुरा: सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सुविधा अब तक शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. अस्पताल में लाखों रुपये की मशीन उपलब्ध होने के बावजूद रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण यह सेवा वर्षों से बंद पड़ी है.

अस्पताल की स्थिति यह है कि कई विभागों में कर्मियों और डॉक्टरों की भारी कमी है. बाहर से देखने में अस्पताल भले ही व्यवस्थित नजर आता हो, लेकिन अंदर की स्थिति व्यवस्था की पोल खोल देती है. मरीजों के अनुसार अस्पताल में सुविधाएं सिर्फ फाइलों और दावों तक सीमित हैं.

रेडियोलॉजिस्ट के पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण अल्ट्रासाउंड सेवा शुरू नहीं हो पा रही है. हालांकि गर्भवती महिलाओं के लिए कुछ प्रशिक्षण प्राप्त स्टाफ के माध्यम से सीमित सुविधा दी जा रही है, लेकिन सामान्य मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है.

सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉ. सचिन के अनुसार रेडियोलॉजिस्ट की कमी के कारण नियमित अल्ट्रासाउंड सेवा बाधित है, हालांकि गर्भवती महिलाओं के कुछ आवश्यक जांच की व्यवस्था की जा रही है.

निजी सेंटरों पर बढ़ा बोझ, मरीजों की जेब पर असर

अल्ट्रासाउंड सुविधा नहीं मिलने के कारण मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ता है, जहां 600 से 800 रुपये तक शुल्क लिया जा रहा है. आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों के लिए यह खर्च बड़ी परेशानी बन गया है. कई मरीजों ने बताया कि रोज़ कमाई से इलाज कराना मुश्किल हो रहा है.

बिचौलियों की सक्रियता पर भी सवाल

अस्पताल परिसर में बिचौलियों की सक्रियता भी एक गंभीर समस्या बनी हुई है. आरोप है कि कुछ लोग मरीजों को बेहतर इलाज का झांसा देकर निजी नर्सिंग होम, पैथोलॉजी और अल्ट्रासाउंड सेंटरों तक ले जाते हैं और कमीशन के आधार पर काम करते हैं. इससे मरीजों का शोषण बढ़ रहा है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है. जिससे सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर लगातार सवाल उठ रहे है.

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