Madhepura: आज़ादी के 78 साल बाद भी सड़क नहीं: कीचड़ बनी लोगों की मजबूरी, प्रशासन मौन

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बारिश के बाद जलमग्न सड़क

यह सड़क वार्ड संख्या 03, 04 और 05 को जोड़ती है और आसपास के हरिराहा, टेंगराहा, परिहारी, मधैली, मोरकाही, बसंतपुर और रायभीड़ जैसे गांवों के लिए भी मुख्य संपर्क मार्ग मानी जाती है. लेकिन यह जीवनरेखा अब पूरी तरह टूटकर बदहाल हो चुकी है.

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शंकरपुर, मधेपुरा से निरंजन कुमार की रिपोर्ट:

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मधेपुरा: शंकरपुर प्रखंड के टेंगराहा परिहारी पंचायत अंतर्गत दमगरा गांव के लोगों को आजादी के 78 वर्ष बाद भी पक्की सड़क की सुविधा नहीं मिल सकी है. लगभग 3500 की आबादी वाले इस गांव में आने-जाने का मुख्य मार्ग आज भी जर्जर सोलिंग सड़क पर निर्भर है, जिसकी हालत पिछले दो दशकों से लगातार खराब बनी हुई है.

यह सड़क वार्ड संख्या 03, 04 और 05 को जोड़ती है और आसपास के हरिराहा, टेंगराहा, परिहारी, मधैली, मोरकाही, बसंतपुर और रायभीड़ जैसे गांवों के लिए भी मुख्य संपर्क मार्ग मानी जाती है. लेकिन यह जीवनरेखा अब पूरी तरह टूटकर बदहाल हो चुकी है.

स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार सड़क की पुरानी ईंटें पूरी तरह उखड़ चुकी हैं. मनरेगा योजना के तहत करीब 3 वर्ष पूर्व दोनों सिरों पर पीसीसी ढलाई की गई थी, लेकिन घटिया सामग्री के उपयोग के कारण वह भी टूटने के कगार पर है. सड़क की कुल लंबाई लगभग 1.5 किलोमीटर है, जो उत्तर में हरिराहा गांव स्थित साइफन चौक (ब्राह्मण टोला) आंगनबाड़ी केंद्र संख्या 03 से शुरू होकर भीसी (छोटी माइनर नहर) होते हुए दक्षिण में मध्य विद्यालय दमगरा तक जाती है.

बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है. मई से अक्टूबर तक पूरे मार्ग पर कीचड़ ही कीचड़ जमा रहता है, जिससे ग्रामीणों को पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है. कई बार लोग एक फीट तक कीचड़ में जूते-चप्पल हाथ में लेकर चलने को मजबूर होते हैं.

गांव के लोगों का कहना है कि हल्की बारिश में भी सड़क नरकीय रूप ले लेती है. इस वजह से सिंहेश्वर और अन्य बाजारों से वाहन गांव में आने से कतराते हैं. अगर कोई वाहन आता भी है तो मनमाना और तीन से चार गुना किराया वसूला जाता है.

इस बदहाल स्थिति का सबसे ज्यादा असर मरीजों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है. आपात स्थिति में एंबुलेंस भी गांव तक नहीं पहुंच पाती, जिससे मरीजों को अस्थायी जुगाड़ के सहारे मुख्य सड़क तक ले जाना पड़ता है. इस दौरान कई बार अप्रिय घटनाएं भी हो चुकी हैं.

किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ता है, क्योंकि कीचड़ के कारण वाहन गांव तक नहीं पहुंच पाते. ऐसे में किसानों को अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को मजबूर होना पड़ता है.

ग्रामीणों ने बताया कि इस सड़क निर्माण को लेकर कई बार पंचायत मुखिया और स्थानीय विधायक डॉ. रमेश ऋषिदेव को आवेदन दिया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है. हर चुनाव में पीएमजीएसवाई योजना से सड़क बनाने का आश्वासन दिया जाता है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से जल्द से जल्द सड़क निर्माण की मांग की है, ताकि उन्हें इस लंबे समय से चली आ रही समस्या से राहत मिल सके.


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