मानव जीवन में संगीत का महत्व व संगीत और जीवन

Published by : Kumar Ashish Updated At : 22 May 2026 6:12 PM

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मानव जीवन में संगीत का महत्व व संगीत और जीवन

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मधेपुरा. पार्वती साइंस कॉलेज के स्नातक संगीत विभाग द्वारा शुक्रवार को “मानव जीवन में संगीत का महत्व एवं संगीत और जीवन ” विषय पर एक दिवसीय सेमिनार का सफल आयोजन किया गया. सेमिनार का उद्देश्य विद्यार्थियों को संगीत की बारीकियों, उसके वैज्ञानिक पक्ष और दैनिक जीवन में इसके प्रभाव से परिचित कराना था. सेमिनार का शुभारंभ प्राचार्य प्रो डॉ पवन कुमार, अर्थपाल अशोक पोद्दार, परीक्षा नियंत्रक डॉ ललन कुमार ललन, एनएसएस अधिकारी डॉ चंद्रदेव ठाकुर, डॉ नीलकांत एवं संगीत विभागाध्यक्ष प्रो रीता कुमारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया. दीप प्रज्वलन से सभागार में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हुआ. कार्यक्रम की शुरुआत संगीत विभाग के विद्यार्थियों संतोष कुमार, सुष्मिता कुमारी, अंजली कुमारी एवं गौरी कुमारी द्वारा प्रस्तुत कुलगीत और स्वागत गीत से हुई. विभागाध्यक्ष प्रो रीता कुमारी के निर्देशन में तैयार इस प्रस्तुति में विद्यार्थियों के सधे हुये सुर एवं ताल ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया. अतिथियों ने विद्यार्थियों की प्रतिभा की सराहना की. प्राचार्य प्रो डॉ पवन कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है. यह तनाव दूर करने, एकाग्रता बढ़ाने एवं व्यक्तित्व विकास का सशक्त माध्यम है. भारतीय संस्कृति में संगीत को योग का दर्जा प्राप्त है क्योंकि यह मन और मस्तिष्क को जोड़ता है. उन्होंने कहा कि आज के प्रतिस्पर्धा भरे दौर में संगीत मानसिक शांति का सरल उपाय है. प्राचार्य ने विद्यार्थियों से पढ़ाई के साथ संगीत को भी अपनाने का आह्वान किया. उन्होंने लोकगीत, भजन एवं शास्त्रीय संगीत को हमारी परंपरा का वाहक और सामाजिक समरसता का सेतु बताया.संगीत विभागाध्यक्ष प्रो रीता कुमारी ने कहा कि संगीत मनुष्य के जीवन का अभिन्न अंग है. जन्म पर गाई जाने वाली लोरी से लेकर मृत्यु के समय के भजन तक, संगीत हर पड़ाव पर भावनात्मक संबल देता है. उन्होंने रागों के वैज्ञानिक पक्ष को समझाते हुये बताया कि सुबह का राग भैरव स्फूर्ति देता है तो रात का राग दरबारी शांति प्रदान करता है. प्रो कुमारी ने छात्रों को संगीत को करियर के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने बताया कि संगीत चिकित्सा, शिक्षण, मंच प्रदर्शन और डिजिटल प्लेटफॉर्म जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाएं हैं. सेमिनार में संगीत विभाग के छात्रों ने भी अपने विचार रखें. प्रश्नोत्तर सत्र में विद्यार्थियों ने संगीत चिकित्सा, मंच के डर को दूर करने एवं नियमित रियाज की तकनीकों पर विशेषज्ञों से सवाल पूछे. विशेषज्ञों ने सभी जिज्ञासाओं का समाधान किया. कार्यक्रम के अंत में विभाग के पूर्व छात्र सुनीत साना ने सभी अतिथियों, शिक्षकों एवं विद्यार्थियों का आभार व्यक्त किया. उन्होंने कहा कि महाविद्यालय भविष्य में भी ऐसे आयोजन करता रहेगा ताकि विद्यार्थियों को कला और संस्कृति से जोड़ा जा सके. सेमिनार को सफल बनाने में नीतीश कुमार, मेघा कुमारी, खुशी कुमारी, हिमांशु कुमार आदि विद्यार्थियों का विशेष सहयोग रहा. इस अवसर पर महाविद्यालय के शिक्षक, शिक्षकेतर कर्मचारी और बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित थे. मंच संचालन शिक्षाशास्त्र विभाग के अजय कुमार अंकोला ने किया. महाविद्यालय परिवार ने संगीत विभाग के इस प्रयास की सराहना की.

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