मधेपुरा में खुले नाले बने हादसों की वजह, लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार

सड़क किनारे खुले नाले में पड़ा कचरा
Madhepura news: स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के कई हिस्सों में आधा-अधूरा नाला निर्माण कर कार्य को लंबित छोड़ दिया गया है. लोगों का कहना है कि यह विभागीय लापरवाही एवं कार्य में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है.
शहर के कई इलाकों में खुले नालों से बढ़ा खतरा, बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा पर चिंता.
Madhepura news: मधेपुरा से अमन श्रीवास्तव की रिपोर्ट:
शहर के विभिन्न इलाकों में खुले नालों की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है. खुले नाले न केवल गंदगी और दुर्गंध का कारण बन रहे हैं, बल्कि लोगों की जान के लिए भी खतरा साबित हो रहे हैं. आए दिन लोग इन नालों में गिरकर घायल हो रहे हैं, जबकि बच्चों एवं बुजुर्गों के लिए स्थिति और अधिक खतरनाक बनी हुई है.
स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर के कई हिस्सों में आधा-अधूरा नाला निर्माण कर कार्य को लंबित छोड़ दिया गया है. लोगों का कहना है कि यह विभागीय लापरवाही एवं कार्य में पारदर्शिता की कमी को दर्शाता है. बारिश के दिनों में स्थिति और विकराल हो जाती है, क्योंकि नालों का पानी सड़क पर बहने लगता है और गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में राह चलते लोग अचानक नाले में गिरकर घायल हो जाते हैं.
स्थानीय निवासी रामकुमार यादव ने बताया कि पिछले सप्ताह उनका आठ वर्षीय बेटा खेलते समय खुले नाले में गिर गया था. हालांकि समय रहते उसे बाहर निकाल लिया गया, लेकिन थोड़ी सी देर होने पर बड़ा हादसा हो सकता था. उन्होंने कहा कि इस संबंध में कई बार नगर परिषद से शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है.

वहीं शिव मंदिर इलाके में कुछ दिन पहले एक बुलेट सवार भी खुले नाले में बाइक समेत गिरकर घायल हो गया था. स्थानीय लोगों का कहना है कि रात के समय सड़क पर पर्याप्त रोशनी नहीं रहने के कारण खुले नाले दिखाई नहीं देते, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा और बढ़ जाता है. कई लोग बाइक एवं साइकिल से गिरकर चोटिल हो चुके हैं.
दुकानदारों ने भी बताया कि खुले नालों के कारण ग्राहक उनकी दुकानों तक आने से कतराते हैं, जिससे व्यवसाय प्रभावित हो रहा है. इसके अलावा नालों से उठने वाली बदबू के कारण आसपास का वातावरण अस्वच्छ बना रहता है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार खुले नालों में जमा गंदा पानी मच्छरों के पनपने का मुख्य कारण बन रहा है, जिससे डेंगू, मलेरिया एवं अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ गया है. चिकित्सकों ने चेतावनी दी है कि यदि समय रहते समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में बीमारियों का प्रकोप बढ़ सकता है.
सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से खुले नालों को ढंकने, नियमित सफाई व्यवस्था सुनिश्चित करने तथा अधूरे निर्माण कार्य को जल्द पूरा कराने की मांग की है. लोगों का कहना है कि बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन को इस दिशा में तत्काल ठोस कदम उठाने चाहिए.
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By Shruti Kumari
श्रुति कुमारी एक पत्रकार और डिजिटल कंटेंट राइटर हैं। उन्होंने भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC) से अंग्रेजी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा प्राप्त किया है। वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में कार्यरत हैं। उन्हें विभिन्न प्लाटफॉर्म्स पर डिजिटल पत्रकारिता और कंटेंट राइटिंग का लगभग दो वर्षों का अनुभव है। अपने समाचार पोर्टल पर कार्य करते हुए उन्होंने समाचार लेखन और डिजिटल कंटेंट निर्माण में अनुभव हासिल किया। सामाजिक मुद्दों, महिला सशक्तिकरण, राजनीति, शिक्षा और लाइफस्टाइल जैसे विषयों पर लिखना उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है। इसके अलावा वे डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए स्क्रिप्ट राइटिंग करती हैं तथा हिंदी कविता और अंगिका भाषा में लेखन का भी शौक रखती हैं। प्रकृति से उनका विशेष लगाव है और वे मानती हैं कि संवेदनशील, तथ्यपरक और जनसरोकार से जुड़ी पत्रकारिता समाज में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बन सकती है।
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