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दस सालों से खराब है सरकारी नलकूप, किसान परेशान

Updated at : 14 Dec 2025 6:15 PM (IST)
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दस सालों से खराब है सरकारी नलकूप, किसान परेशान

किसानों को लाभ पहुंचाये बिना देश का विकास संभव नहीं है.

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कुमारखंड

प्रखंड क्षेत्र के रौता गांव के पश्चिम टोला तथा गांव के उत्तर में स्थित दो सरकारी नलकूप पिछले दस साल से बंद होने से किसानों को खेतों की पटवन की समस्या एक गंभीर समस्या बन गया है. निजी नलकूप के सहारे किसान खेतों की सिंचाई कर रहे हैं. बारिश नहीं होने पर किसानों के लिए वरदान साबित होने वाले ये सरकारी नलकूप पिछले सात सालो से किसानों के लिए बस दिखावे के लिए रह गए हैं. सोवा गांव में एक समय था कि सरकारी नलकूप होने से लोग अपने खेती का सिचाई समय समय पर कर लेते थे. लेकिन वही अब इस महंगाई के दौर में किसान अपने खेतों के सिचाई करने में असमर्थ है जिन लोगो के पास निजी नलकूप है वे लोग तो अपना खेती कर लेते है, लेकिन जिनके पास पटवन का कोई उचित सुविधा नहीं है. उनलोगों के खेतों की सिंचाई नहीं हो पाता है. एक तरफ सरकार का कहना है कि किसानों को लाभ पहुंचाएं बिना देश का विकास संभव नहीं है. वहीं दूसरी तरफ सरकार की अनदेखी के कारण असमर्थ किसानों की आर्थिक स्थिति कमजोर होने कारण कर्जो के बोझे तले दबते दिखाई दे रहे हैं. गांव में लगे नलकूप सात साल बाद भी चालू नहीं हो पाई है. इससे क्षेत्र के किसानों को सरकारी स्तर पर लगाए गये नलकूप से सिंचाई का लाभ नहीं मिल पा रहा है. नलकूप बंद होने के कारण किसानों को फसलों की पटवन करने में भारी परेशानिया हो रहा है. इनके पास निजी नलकूप है वो अपने फसलों की सिंचाई कर लेते है लेकिन जो किसान आर्थिक रूप से कमजोर है. उनको खेतों की सिंचाई करने में जेब ढीली हो जाती है. ऐसे में सिंचाई उनके सामने एक बड़ी समस्या बनी हुई है. किसानों की खेती में घाटा हो जाने से कर्ज में डूब जाते है. उन्हें दूसरों के नलकूप से प्रति बीघा चार सौ रुपये की दर से खेत में पानी पटवन करनी पड़ती है. किसान पैसे की तंगी कारण पटवन नहीं कर पाते है. इससे खेतों में लगे फसल सुख जाती है.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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Kumar Ashish

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By Kumar Ashish

Kumar Ashish is a contributor at Prabhat Khabar.

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