मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालय पर अनावश्यक केस के बोझ को किया जा सकता है कम-एसडीजेएम
Updated at : 18 Jul 2025 7:21 PM (IST)
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मध्यस्थता के माध्यम से न्यायालय पर अनावश्यक केस के बोझ को किया जा सकता है कम-एसडीजेएम
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उदाकिशुनगंज/ग्वालपाड़ा.
व्यवहार न्यायालय उदाकिशुनगंज के सभागार में शुक्रवार को एसडीजेएम सुनील कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में मध्यस्थता में मामले के सुलह को लेकर बैठक हुई. एसडीजेएम ने अधिक से अधिक मामले के डिस्पोजल पर फोकस करते हुये सहयोग की बात कही. एसीजेएम शंभु दास ने कहा कि छोटे-छोटे भूमि विवाद को लेकर पुस्त दर पुस्त मुकदमा चलता है, सब कुछ बर्बाद होने के बाद मेल मिलाप की प्रक्रिया अपनायी जाती है. इसी से बचने के लिए एक वैकल्पिक प्रणाली बनायी गयी है. इसमें मध्यस्थता के माध्यम से अधिक से अधिक भूमि विवाद का निष्पादन मध्यस्थता के माध्यम से करवा कर न्यायालय से मुकदमे के बोझ को कम किया जा सकता है. वहीं मुंसिफ मजिस्ट्रेट दिनेशमणि त्रिपाठी ने कहा कि कम खर्च में न्याय पाने का माध्यम है. मध्यस्थता जिसके माध्यम से समस्याओं का समाधान संभव है. वहीं प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी सह जज इंचार्ज सूरज कुमार चौधरी व प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रतन कुमार पासवान ने बताया कि 30 सितंबर तक इस अभियान को पूरे देश में चलाये जाने की बात कही.आर्म्स की त्वरित ट्रायल-एसडीपीओ
बैठक में उपस्थित एसडीपीओ अविनाश कुमार ने मध्यस्थता अभियान में अधिक से अधिक सहयोग करने की बात कही. उन्होंने कहा कि आर्म्स एक्ट से संबंधित जितने भी चार्ज सीटेट मामले हैं उसमें त्वरित ट्रायल कर गवाह करवाते हुए सजा दिलाने पर जोर दिया. बैठक में प्रथम श्रेणी न्यायिक मजिस्ट्रेट सह जज इंचार्ज सूरज कुमार चौधरी, प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी रतन कुमार पासवान, एसडीपीओ अविनाश कुमार, एपीओ चंद्रजीत कुमार, मृत्युंजय कुमार पंकज आदि मौजूद थे.डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
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