अस्पताल बन गया गोहाल

Published at :14 Feb 2017 6:55 AM (IST)
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अस्पताल बन गया गोहाल

उदासीनता . चौसा पीएचसी फुलौत पश्चिमी में असुविधाओं का डेरा चौसा प्रखंड क्षेत्र के उपस्वास्थ्य केंद्र फुलौत पश्चिमी तबेला बन कर रह गया है. यहां पर न डॉक्टर रहते हैं और न ही दवाओं की कोई व्यवस्था होती है. नतीजतन, मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. चौसा : चौसा प्रखंड क्षेत्र के […]

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उदासीनता . चौसा पीएचसी फुलौत पश्चिमी में असुविधाओं का डेरा

चौसा प्रखंड क्षेत्र के उपस्वास्थ्य केंद्र फुलौत पश्चिमी तबेला बन कर रह गया है. यहां पर न डॉक्टर रहते हैं और न ही दवाओं की कोई व्यवस्था होती है. नतीजतन, मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
चौसा : चौसा प्रखंड क्षेत्र के उपस्वास्थ्य केंद्र फुलौत पश्चिमी पशुओं का अड्डा बन गया है. यह लोगों का इलाज नहीं पशुओं का तबेला बन कर रह गया है. केंद्र में मात्र एक एक डॉक्टर कार्यरत हैं, जो अपने मनमाने तरीके से केंद्र का संचालन करते हैं. यह वैसा डॉक्टर हैं, जिसे एक भी लोग इसका नाम भी नहीं जानते हैं. जब से उनकी यहां पर ड्यूटी हुई है तब से लेकर अब तक एक भी दिन सही से अपने जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किये हैं. गौरतलब है कि स्वास्थ्य उपकेंद्र फुलौत पश्चिमी का 2001 में निर्माण हुआ है तब से लेकर आज तक एक भी रोगी का इलाज संभव नहीं हो पाया है. स्वास्थ्य उपकेंद्र बनने के बाद क्षेत्र के लोगों में उम्मीद जगी थी अब इलाज हेतु दूर नहीं जाना पड़ेगा. लेकिन लोगों की समस्या जस की तस बनी हुई है.
यह केंद्र मात्र लोगों के लिए शोभा की वस्तु बनी हुई है. शुरुआती दौर में कुछ दिनों के लिए डॉक्टरों की चहल पहल देखी गयी. भूले भटके यदि कोई रोगी पहुंच भी जाय तो उसके बैरंग लौटना पड़ता है और प्रखंड मुख्यालय ही जाना पड़ता है. ऐसे में यहां के रोगियों को उपकेंद्र होने के बाद भी पैसे खर्च कर प्रखंड मुख्यालय जाना पड़ता है. इससे समय की भी बर्बादी होती है. वहीं प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए सड़क भी जर्जर अवस्था में है. यदि किसी रोगी की स्थिति दयनीय होती है तो उसे इस सड़क से प्रखंड मुख्यालय ले जाने में देरी हो जाती है और कुछ भी घटित होने की आशंका से लोग डरे रहते है. इस बाबत ग्रामीणों ने बताया कि किसी भी रोगी के साथ यदि आकस्मिक हो जाय तो उसे चौसा ही जाना पड़ेगा.
सरकारी जमीन है अतिक्रमण की चपेट में . केंद्र की जमीन को स्थानीय लोगों के द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया. जमीन के अतिक्रमण कर पशुओं को बांधते है. खेती करने के उपरांत यहीं सब अपने काम करते है. आवासीय घर भी बना लिया है. अब अतिक्रमित जमीन को खाली करने के लिए कहा जाता है तो अड़ जाते है. जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है. जयनारायण यादव ने बताया कि अगर विभाग के द्वारा बांड्री दे दी जाती तो वहां किसी के द्वारा अतिक्रमण नहीं किया जाता. लेकिन विभाग के द्वारा ऐसा कुछ भी नहीं किया गया. जिसके कारण स्थानीय लोगों के द्वारा सरकारी जमीन को अतिक्रमण कर लिया गया है.
नहीं है कोई सुविधा. जानकारी देते हुए सरपंच जयनारायण मेहता ने बताया स्वास्थ्य केंद्र पर कचरे का अंबार लगा हुआ है. यहां शौचालय भी नहीं है. पानी की व्यवस्था के लिए चापाकल भी नहीं है. ऐसे में यदि देखा जाय तो यह उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीजों के लिए मुलभूत सुविधाओं को घोर अभाव है.
कहते हैं ग्रामीण . क्षेत्र के लोग अरविंद कुमार मंडल, शुभाष कुमार, मंटू मंडल, रामदेव मुनी, मिथिलेश कुमार, हरेंद्र चौधरी, बमबम पंडित, मुन्ना राम, रोहित राम, रामचंद्र पासवान, भुटकू शर्मा, जवाहर चौधरी, बिलखू यादव, अर्जुन यादव, सकुन यादव, मन्नू यादव, शहंशाह कैफ सहित अन्य लोगों ने कहा कि उप स्वास्थ्य केंद्र में मरीज के ईलाज के बदले शौचालय का सामग्री व मवेशी का पालन किया जाता है . अगर दवाई उपलब्ध कराने के लिए समर्थ नहीं है तो उप स्वास्थ्य केंद्र नहीं बनाना चाहिए. ईलाज के लिए दवाई, पानी, बिजली, जाने के लिए रास्ता भी नहीं है. चौसा की दूरी तय करने में घंटों लग जाता है. ऐसे में यहां से मरीज को चौसा ले जाने में काफी परेशानी होती है. ग्रामीणों ने अस्पताल प्रशासन से उप स्वास्थ्य केंद्र को जल्द चालू करवाने की मांग की है. कलाधर मंडल बताते है कि दुर्घटना ग्रस्त रोगी, गर्भवती महिला या अन्य मरीजों को किसी भी प्रकार की परेशानी होती है तो चौसा जाने में काफी लंबा समय लग जाता है. जिससे मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है. आकस्मिक स्थित में जरूरत पड़ने पर यहां मरीज काफी परेशान हो जाते है. प्रखंड मुख्यालय की लंबी दूरी तय करनी पड़ती है. वहीं यदि एंबुलेंस की जरूरत होती है तो एंबुलेंस मंगवाने के लिए काफी मशक्कत का सामना करना पड़ता है.
कहते हैं चिकित्सा प्रभारी . चिकित्सक प्रभारी चौसा अमित कुमार सिंह ने बताया कि फुलौत के दोनों पंचायत के उप स्वास्थ्य केंद्र के आस पास के ग्रामीण ने दबंगई से कब्जा जमा रखे है. सप्ताह के भीतर ही वहा पहुंच कर हटाया जायेगा. जहां तक उप स्वास्थ्य केंद्र मोरसंडा पंचायत में एएनएम पद स्थापित है दो दिन के अंदर उप स्वास्थ्य केंद्र मोरसंडा को सुचारू रूप से चलाया जायेगा.
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