फिर बलुआहा नदी का बढ़ा जल स्तर , कटाव जारी

Published at :02 Sep 2016 12:00 AM (IST)
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फिर बलुआहा नदी का बढ़ा जल स्तर , कटाव जारी

मधेपुरा : बलुआहा नदी के बहाव के परिवर्तन के कारण कई घर बाढ़ की चपेट में फिर आ गया है. गुरुवार की रात्रि से अचानक जलस्तर में वृद्धि के कारण बलुवाहा नदी फिर तबाही मचाने के लिए अपने उफान पर है. रामपुर पंचायत के आदिवासी टोले में लोगों काफी डरे सहमे हैं. गत दिनों जिला […]

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मधेपुरा : बलुआहा नदी के बहाव के परिवर्तन के कारण कई घर बाढ़ की चपेट में फिर आ गया है. गुरुवार की रात्रि से अचानक जलस्तर में वृद्धि के कारण बलुवाहा नदी फिर तबाही मचाने के लिए अपने उफान पर है. रामपुर पंचायत के आदिवासी टोले में लोगों काफी डरे सहमे हैं.

गत दिनों जिला अधिकारी मो सोहैल की तत्परता के कारण फ्लड पाइटिंग कोपड़िया को युद्ध स्तर पर बंबू पाइललिंग के दिशा निर्देश देने से कटाव निरोधी कार्य किया गया था. गुरुवार की रात्रि फिर जलस्तर में वृद्धि के कारण रात से कटान शुरू हो गया. जैसे -जैसे दिन चढ़ता गया, वैसे-वैसे नदी का कटाव बढ़ता गया. यह कटाव इतना बढ़ गया कि आस पास के कई घरों को फिर अपने आगोश में समाने लगा है. स्थानीय ग्रामीणों ने बताया कि दूसरी बार कटाव शुरू हुआ है. लोग दहशत में हैं. पूर्व में कराये गये बंबु पाइलिंग भी पानी में आये तेज बहाव के कारण ध्वस्त हो गया है.

घर नदी नदी में विलीन हो रहा है. जब तक इस कटाव निरोधी कार्य बोल्डर क्रेटिंग या नेट बोल्डर क्रेटिग और उसके बाद बालू भरे बोरे नहीं डाले जाते हैं तब तक इस गांव का बच पाना मुश्किल होगा. जानकारी के अनुसार पिछले दो दिनों से लगातार बारिश से कोसी क्षेत्र में जलस्तर की वृद्धी के कारण बलुवाहा नदी भी तबाही मचाने के लिए अपने उफान पर है. जिसके कारण बीती रात से कटान शुरू हो गया था. मौके पर उपस्थित अशोक हांसदा, गंगा टुडू, श्यामलाल किसकु, चंदर किसकु, चंदन टुडू ने बताया कि नदी में बढ़ते जल स्तर के कारण घर बह गया है.

उनलोगों ने बताया कि अगर इस नदी के कहर से बचने का जल्द कोई उपाय नहीं किया गया तो लगभग दो सौ की आबादी वाले इस गांव का अस्तित्व खत्म हो जायेगा. अगर समय रहते बचाव व राहत कार्य नहीं किया गया तो बाद में काफी परेशानी होगी. क्योकि इस दो सौ आबादी वाले गांव तक पहुंचे के लिए पर्याप्त रास्ता भी नहीं हैं. स्थानीय सूरज कुमार टूडू ने कहा कि कुछ समझ में नहीं आ रहा है. रतजगा कर रहे हैं. ललिता देवी ने कहा कि हो बाबू हमारा सब के घर नदी में बहल जाई छए, कोय नै या दकहे वाला कोना जइबे होउ बाबू सब. वहीं बंटी देवी ने बताया की नदी विकराल रूप धारण कर रही है. बच्चे, बूढ़े साथ रात – रात भर नहीं सोते हैं. स्थानीय गोविंद ऋषिदेव ने बताया कि फिर से अचानक बलुआहा के जलस्तर में बढ़ोतरी से हमलोगों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है. नदी किनारे घर रहने से हमेशा यह चिंता लगी रहती है कि कब हम लोगों का घर कट जायेगा और कब हम लोग विस्थापित हो जायेंगे. इस दिशा में स्थानीय प्रशासन सुस्त है. हमलोगों पर ध्यान देने वाला कोई नहीं हैं. वहीं मुन्नी देवी ने कहा एक बार पहले तो हमलोगों का जीना मुश्किल हो गया था. अब क्या होगा भगवान जाने.

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