सदर अस्पताल में नहीं हैं हड्डी के चिकित्सक

Published at :22 Aug 2016 4:56 AM (IST)
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सदर अस्पताल में नहीं हैं हड्डी के चिकित्सक

आर्थोपेडिक सर्जन के अभाव में मधेपुरा सदर अस्पताल में सिर्फ मरहम पट्टी कर करते हैं रेफर मधेपुरा : मधेपुरा सदर अस्पताल फर्स्ट एड अस्पताल बन कर रह गया है. मरीजों का यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद रेफर कर देना फितरत बन गयी है. अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है. दुर्घटना में गंभीर […]

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आर्थोपेडिक सर्जन के अभाव में मधेपुरा सदर अस्पताल में सिर्फ मरहम पट्टी कर करते हैं रेफर

मधेपुरा : मधेपुरा सदर अस्पताल फर्स्ट एड अस्पताल बन कर रह गया है. मरीजों का यहां प्राथमिक उपचार करने के बाद रेफर कर देना फितरत बन गयी है. अस्पताल में हड्डी रोग विशेषज्ञ का अभाव है. दुर्घटना में गंभीर घायल हो कर यह पहुंचे मरीज को मरहम पट्टी कर यहां से रेफर कर दिया जाता है. अस्पताल की यह स्थिति कई माह से है. लेकिन अस्पताल प्रशासन और अधिकारी इस ओर से बेपरवाह बने हुए हैं.
न आर्थोपेडिक सर्जन हैं, न स्पेशलिस्ट
सिंहेश्वर प्रखंड के सिंगियोन निवासी शंकर सवारी गाड़ी चलाते थे. एक दुर्घटना में उनके पैर की हड्डी बुरी तरह टूट गयी. सदर अस्पताल से हमेशा की तरह पटना रेफर कर दिया गया. गांव के गरीब लोग पटना का नाम सुनते ही घबरा गये. नतीजतन निजी नर्सिंग होम में जाना पड़ा. इलाज के लिए जमीन भी बिक गयी. शंकर जैसे हजारों मरीज की जिले में यही स्थिति है.
नहीं बन रहा अस्थि प्रमाण पत्र
मुरलीगंज प्रखंड के मोरकाही गांव के झमेली चल नहीं सकते. लाठी के सहारे घिसटते हैं. उनका नाम बीपीएल में शामिल है लेकिन इंदिरा आवास के लिए अस्थि नि:शक्त प्रमाण पत्र की जरूरत है. सदर अस्पताल में बीस दिन से घूम कर जा रहे हैं. अस्पताल में हड्डी विशेषज्ञ नहीं होने के कारण मेडिकल बोर्ड नहीं बैठ रही है. झमेली से पहले भी कई लोग इस इंतजार में हैं.
सदर अस्पताल में पदस्थापित डाॅक्टरों की स्थिति
डाक्टर नियमित संविदा
स्वीकृत पद 58 03
पदस्थापित 13 06
बोले सिविल सर्जन
आर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर पहले यहां डा बीएन भारती पदस्थापित थे. उन्हें सुपौल अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया है. वरीय अधिकारियों को इस स्थिति से अवगत करा दिया गया है. साथ पत्र लिखते हुए उन्हें सप्ताह में तीन दिन मधेपुरा अस्पताल में सेवा देने का आग्रह किया गया है. लेकिन सरकार के आदेशानुसार प्रतिनियुक्ति नहीं किया जाना है.’
डाॅ गदाधर पांडेय, सिविल सर्जन, मधेपुरा
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