छह माह से विद्यालय बंद, पढ़ाई बाधित

Published at :27 Jul 2016 8:43 AM (IST)
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छह माह से विद्यालय बंद, पढ़ाई बाधित

मुरलीगंज प्रंखड अंतर्गत नव सृजित प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला कोल्हायपट्टी वार्ड नंबर एक में महादलित परिवार के बच्चे पढ़ाई करते हैं. पिछले छह माह से विद्यालय बंद पड़ा है. विद्यालय के बंद रहने से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है. इसे देखने वाला कोई नहीं है. मुरलीगंज : नव सृजित प्राथमिक विद्यालय पासवान […]

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मुरलीगंज प्रंखड अंतर्गत नव सृजित प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला कोल्हायपट्टी वार्ड नंबर एक में महादलित परिवार के बच्चे पढ़ाई करते हैं. पिछले छह माह से विद्यालय बंद पड़ा है. विद्यालय के बंद रहने से बच्चों के भविष्य पर असर पड़ रहा है. इसे देखने वाला कोई नहीं है.
मुरलीगंज : नव सृजित प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला कोल्हायपट्टी वार्ड नंबर एक में महादलित परिवार के बच्चे पढ़ाई करते हैं. लेकिन, आज कल इस स्कूल में पढ़ाई नहीं हो रही है. हालांकि, इसको लेकर महादलित परिवार के लोगों द्वारा सड़क जाम, प्रदर्शन आदि किये गये, लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी व प्रधानाध्यापक के कान पर अब तक जू नहीं रेंगी है.
ग्रामीणों ने कहा एक विद्यालय पर सरकार का लगभग डेढ़ से दो लाख रुपये महीने का खर्च है. लेकिन प्रधानाध्यापक एवं शिक्षकों के मनमानेपूर्ण रवैये को छह माह से विद्यालय बंद कर फरार है. इस तरह बच्चे की पढाई कैसे पूरी हो पायेगी.
नव सृजित प्राथमिक विद्यालय पासवान टोला कोल्हायपट्टी पर जब प्रभात खबर की टीम की साढे दस बजे पहुंची तो न तो छात्रों की उपस्थिति पायी गयी न ही विद्यालय में कोई शिक्षक उपस्थित पाये गये. कुछ देर के बाद भूदाता नंदन पासवान पहुंचे. उन्होंने बताया कि विद्यालय छ: माह से बंद पड़ा है.
कभी कभी एक शिक्षक सरफराज आलम आते है. कुछ देर विद्यालय में उपस्थित होकर पुन: विद्यालय बंद कर चले जाते है. एक तरफ मुख्यमंत्री ने शिक्षकों की शत प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए टास्क शिक्षा विभाग को सौंपा है. शिक्षा मे गुणात्मक एवं परिणात्मक सुधार के लिए विभागीय स्तर पर हर आवश्यक कदम उठाने के लिए कहा गया है. ऐसे में विद्यालय का इतने दिनों तक अकारण बंद पड़े रहना शिक्षा विभाग सवालों के कटघरे में ला सकता है.
स्थानीय ग्रामीण जयकांत पासवान ने बताया कि हमलोग दलित है और क्या हम महादलित के बच्चों को पढ़ने का आधिककार नहीं है. इसी मंशा से कि दलित के बच्चों को अनपढ़ बना रह जाये. इसी उद्देश्य से विद्यालय को बंद रखा जाता है. स्कूल के सचिव ममता देवी के पति अर्जुन पासवान ने बताया हमने महादलित और हरिजन के बच्चों के शैक्षणिक सुधार से संबंधित पदाधिकारी को आज से नहीं वर्षों से प्रयास कर रहे है. विद्यालय के स्थिति के सुधार के लिए सड़क जाम भी किया लेकिन सुधार की बात तो दुर और स्थिति बिगड़ती चली गयी.
तदोपरांत वार्ड के कुछ बच्चे भी वहां पहुंच गये. लेकिन उन्हें बैरंग अपने घर वापस लौटना परता है. बच्चों में उत्सुकता रहती है कि अब विद्यालय खुल जायेगा. लेकिन कोई फायदा नहीं. स्थानीय अर्जुन पासवान ने बताया कि हमारा स्कूल बंद है. स्कूल खुला भी रहता है तो मध्यान भोजन नहीं बनता है.
बच्चों को छत्रवृत्ति व पोशाक की राशि भी नहीं दी जाती है. विद्यालय के आसपास खेलते हुए बच्चों सुरेश, सपना कुमारी, आशीष कुमार, ज्योतिष कुमार, विशाल कुमार, बंकर कुमार आदि से माध्यान भोजन के बारे में पूछा तो बताया कि जब विद्यालय ही नहीं खुलता तो माध्यान भोजन कहां से बनेगा.
माध्यान भोजन नहीं भी बने तो कोई बात नहीं कम से कम पढाई तो होना चाहिए. हम सभी के माता – पिता अधिक राशि नहीं कमाते है जो बाहर के स्कूलों में पढाई करवाये.
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