रुपये का नहीं, समस्याओं का है बैंक
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :11 Jul 2016 1:02 AM (IST)
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उदासीनता . मुरलीगंज में बैंक की कार्यप्रणाली से ग्राहकों को परेशानी मुरलीगंज बाजार में कई बैंक तो हैं. लेकिन किसी भी शाखा में ठीक से व्यवस्था नहीं है. इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. मुरलीगंज : जिले के मुरलीगंज बाजार में कहने के लिए स्टेट बैंक की दो शाखाओं खुली हैं. […]
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उदासीनता . मुरलीगंज में बैंक की कार्यप्रणाली से ग्राहकों को परेशानी
मुरलीगंज बाजार में कई बैंक तो हैं. लेकिन किसी भी शाखा में ठीक से व्यवस्था नहीं है. इससे उपभोक्ताओं को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
मुरलीगंज : जिले के मुरलीगंज बाजार में कहने के लिए स्टेट बैंक की दो शाखाओं खुली हैं. वहीं एक शाखा बैंक आफ इंडिया, एक केनरा बैंक की शाखा व एक सेन्ट्रल बैंक आफ इंडिया की भी है. व्यवसायी दृष्टिकोण से इसे कभी मधेपुरा का मिनी गुलाबबाग तो कभी जूट व्यवसाय के कारण मिनी कोलकता भी कहा जाता था. ऐसे मे मुरलीगंज बाजार में बैंक की ज्यादा शाखा होना लाजमी है. जिस तरह जनसंख्या का विकास हुआ, साक्षरता बढ़ी ,संचार क्रांति फैली उस हिसाब से बैंकिग प्रणाली अपने आप को रफ्तार के अनुरूप बदलाव लाने मे सक्षम नजर नहीं आ रही है. कोर बैंकिंग हो या बैंक के कम्प्यूटरीकरण की बात यहां समस्या आज भी सुरसा की तरह मुंह बाये खड़ी हैं.
बैंकों में लगा रहता है लिंक फेल रहने बोर्ड : बैंक की शाखाएं संचार क्रांति के साथ कदम ताल नहीं मिला पा रही है. आज की बैंकिंग प्रणाली में पहले से अधिक दोष है. यह बातें अक्सर बैंक मे लगी भीड़ बयां करती है. कम्प्यूटरकृत बैकिग में प्रणाली चाहे नगर पंचायत की बैंक शाखा हो जिला स्तरीय बैंक की शाखा हो एक बीमारी लगा रहता है्. वह मियादी बुखार लिंक फेल है. किसी को पैसे की कितनी जरूरत है यह मायने नहीं रखता हैं बस लिंक फेल है. बैंकों में लिंक फेल रहने से दूसरे के एकाउन्ट मे पैसे का चला जाना कोई बड़ी बात नही है. आज भी एक बैंक के चेक या ड्राफ्ट को दूसरे बैंक में किलयरेन्स होने मे पहले की भाँति एक सप्ताह का समय करीब करीब लग ही जाता है.
शोभा की वस्तु बनी एमटीएम :बैंकिग प्रणाली का एटीएम शोभा की वस्तु बन कर रहे गयी है. जो किसी भी चौक चौराहे पर चौबीस घंटे खड़ी रहती है उस शौभा की में मशीन खराब रहने एवं बैलेंस नहीं रहने का बोर्ड लगा रहता है या फिर बाहर एक तख्ती पर लिखा होता है असुविधा के लिए खेद है. बता दे कि मुरलीगंज नगर पंचायत में कुल पाँच बैंक है सभी के ए टी एम का कमोबेश एक जैसा ही हाल है. एन एच 107 बैंगा पुल से पहले इंन्डीकैश का ए टी एम है. इसमें शायद साप्ताहिक पैसे डाले जाते हैं जो उँट के मुंह में जीरे के फौरन की तरह है. हाट बाजार के पास बैंक ऑफ इंडिया के ब्रांच के नीचे उसका अपना ए टी एम है वह हमेशा खराब रहता है या बैलेंस नहीं है का बोर्ड लगा रहता है.
बैंक के खिलाफ जनहित याचिका दायर करेंगे उपभोक्ता : स्टेट बैंक की मुख्य शाखा है के बाहर ए टी एम नही है, वहीं भीतर एक ए टी एम है वह एक शोभा की वस्तु बन कर रह गयी है.दिलीप कुमार पैसे के लिए समुचे शहर सभी ए टी एम का चक्कर लगने के बाद खींज कर कहा कि अब ऐसे मामलो के लिए भी बैक वालो के खिलाफ जनहित याचिक दायर करनी होगी जब हम ए टी एम के बदले सविॅस चाजॅ देते है हमारी उस सुविधा को बैकिग प्रणाली किस आधार पर हमें अपनी उपेक्षा का शिकार बना रही है.
अधिवक्ता अनिल कुमार का कहना है कि इस तरह ए टी एम के बदले सविॅस चाजॅ लेना और उपभोक्ता को लाभ न देना कानून अपराध है और छल द्वारा ए टी एम धारक से उसके बदले मासिक अधिभार वसुल करना कानूनी रूप से आपराधिक मामला बनता है और भा द वि 419 के तहत सूचना के अघिकार के तहत एक महीना मे ए टी एम विनिमय की सारी जानकारी उपलब्ध कर कोई भी मामला दजॅ करवा सकता है
मिनटों में खाली हो जाता है एटीएम
एसबीआई एटीएम के बारे में व्यवसायी प्रवीण ने बया कि इसमें हर दिन पैसे डाले जाते हैं वह भी अक्सर तीन और चार बजे शाम मे पर कुछ ही क्षणों में एटीएम खाली हो जाता है. उन्होंने ने बताया कि एक आदमी के पास कम से कम पाँच बैंक के ए टी एम होते हैं. वह लाइन मे खड़ा हो हर ए टी एम से 10,000 रूपया निकालते है, इस तरह पाचास हजार एक आदमी निकलता है ऐसे में बाँकी भीड़ को समय बर्बाद करने के साथ खाली हाथ लौटना पड़ता है.
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