एक माह में फरियादी को मिला न्याय

Published at :09 Jul 2016 8:08 AM (IST)
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एक माह में फरियादी को मिला न्याय

सदर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने शहर के आजाद टोला निवासी राकेश कुमार को उनके परिवाद पर फैसला दिया है. राकेश ने अपनी निजी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने व मुख्यमंत्री रोड-नाला निर्माण के तहत नाला और रोड बनाने की साजिश के संबंध में शिकायत की थी. मधेपुरा :लोक शिकायत […]

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सदर अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने शहर के आजाद टोला निवासी राकेश कुमार को उनके परिवाद पर फैसला दिया है. राकेश ने अपनी निजी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने व मुख्यमंत्री रोड-नाला निर्माण के तहत नाला और रोड बनाने की साजिश के संबंध में शिकायत की थी.
मधेपुरा :लोक शिकायत निवारण के तहत लोगों को न्याय मिलना प्रारंभ हो चुका है़ सदर अनुमंडल के अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा आजाद टोला मधेपुरा के निवासी राकेश कुमार को उनके परिवाद पर फैसला दिया गया़ राकेश की शिकायत थी कि उनके निजी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर बनाने तथा मुख्यमंत्री रोड-नाला निर्माण के तहत नाला और रोड बनाने की साजिश संबंधित वार्ड पार्षद एवं नगर परिषद द्वारा की जा रही थी़
इस मामले में लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी ने फैसला सुनाते हुए कहा कि किसी के निजी जमीन पर बिना भू-स्वामी के सहमति, स्वेच्छा से बिना बिहार सरकार को दान दिये अथवा बगैर नियमानुसार जमीन अधीगृहित किये नगर परिषद द्वारा कोई निर्माण कराया जाना अथवा प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भूमि हिनों का आवास बनाया जाना बिल्कुल नियम संगत नहीं है़ उन्होंने जमीन पर वास्तविक स्वत्व किसका है जांचने का निर्देश देते हुए निजी जमीन के लिए नियम संगत प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया़ वहीं नगर परिषद द्वारा बिना यह जाने कि यह जमीन निजी है या सरकारी, उस जमीन पर कोई निर्माण कार्य करने हेतु कार्य प्रारंभ करना या करने की चेष्टा को अवैध करार दिया़
क्या है मामला
नगर परिषद क्षेत्र के वार्ड नंबर-12 के निवासी राकेश कुमार की शिकायत थी कि वार्ड पार्षद रेशमा प्रवीण एवं उसके पति सफीक आलम द्वारा बिना जानकारी तथा बिना सहमति के बगैर किसी आम सभा के ग्रामीण रंजिश के तहत उनकी निजी भूमि पर सड़क और नाला बनाने का उददेश्य लेकर नगर परिषद में प्रस्ताव दिया गया़
वहीं प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत भी उनके उसी जमीन पर किसी दूसरे का आवास बनाये जाने के लिए सूची दी गयी़ जबकि वह जमीन राकेश की पुश्तैनी है़ हालांकि उस जमीन के एक हिस्से का हाल सर्वे में खाता किसी और व्यक्ति के नाम से खुल गया है इस संबंध में भी न्यायालय में टाईटिल सूट चल रहा है़ राकेश ने इन दोनों मामलों की शिकायत नगर विकास एवं आवास विभाग में भी की़
सूची पर भी उठाया सवाल
अपने परिवाद पत्र में राकेश कुमार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के वार्ड नंबर-12 की सूची पर भी कई गंभीर आरोप लगाते हुए सवाल उठाया है़ राकेश का कहना है कि वार्ड पार्षद द्वारा उन सभी व्यक्तियों का नाम सूची में दिया गया है जो कि सरकारी नौकरी में है या सुखी संपन्न है
जमीन-जायदाद के साथ पक्का मकान के मालिक है साथ ही ऐसे लोगों का नाम दर्ज कराया गया है जो कि स्थायी रूप से सरहसा-सुपौल या दिल्ली में रह रहे हैं जिनके नाम से यहां कोई जमीन भी नहीं है़ राकेश ने सर्वेक्षण टीम से मिलीभगत से वार्ड पार्षद द्वारा व्यापक रूप से हेरा-फेरी करने, अपने सभी संबंधी एवं पूरे परिवार का नाम भी सूची में देना का आरोप लगाया है़
दर्ज किया था परिवाद
राकेश द्वारा अनुमंडलीय लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के कार्यालय में भी सात जून को परिवाद दायर किया गया था़ लेकिन लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी के यहां नगर परिषद की ओर से कार्यपालक पदाधिकारी अनुपस्थित रहे़ अंतत: लोक शिकायत निवारण पदाधिकारी द्वारा फैसला राकेश के पक्ष् में सुनाया गया़
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