उपेक्षा . अनुमंडल मुख्यालय में बस पराव नहीं रहने के कारण हो रही है भारी दिक्कत

Published at :04 Apr 2016 1:00 AM (IST)
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उपेक्षा . अनुमंडल मुख्यालय में बस पराव नहीं रहने के कारण हो रही है भारी दिक्कत

कमाई लाखों रुपये की, सुविधाएं शून्य तेज धूप में पानी और शेड के लिए तरस रहे यात्री शौचालय जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं के लिए लोग परेशान अनुमंडल मुख्यालय में बस स्टैंड नहीं होने के कारण वाहन चालक सड़क के किनारे यत्र-तत्र खाली जगहों पर गाड़ी लगाने को मजबूर हैं. इससे राहगीरों को भारी कठिनाइयों का […]

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कमाई लाखों रुपये की, सुविधाएं शून्य

तेज धूप में पानी और शेड के लिए तरस रहे यात्री
शौचालय जैसी महत्वपूर्ण बुनियादी सुविधाओं के लिए
लोग परेशान
अनुमंडल मुख्यालय में बस स्टैंड नहीं होने के कारण वाहन चालक सड़क के किनारे यत्र-तत्र खाली जगहों पर गाड़ी लगाने को मजबूर हैं. इससे राहगीरों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है. वाहन के यत्र-तत्र लगाने बाजार में जाम की स्थिति उत्पन्न हो जाती है. लोगों का कहना है कि यहां से सरकार को लाखों की आमदनी होती है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर कुछ भी नहीं है.
उदाकिशुनगंज : स्थानीय दुकानदार का दुकानदारी भी प्रभावित होता है. वहीं बस पराव नहीं रहने के कारण लोगों को सड़क के किनारे ही खड़ा रहना पड़ता है. इस बढती गर्मी के साथ कड़े धूप में लोगों को सड़क किनारे खड़ा होने से काफी परेशानी होती है. स्थानीय लोगों ने बताया कि कड़ी धूप में खड़े रहने से बच्चे, बूढे सहित अन्य लोग बीमार पड़ सकते है. वहीं वाहन चालक की लापरवाही के कारण सड़क पर ही वाहन खड़ी कर यात्री उतारते है.
जिससे कई बार लोग दुर्घटना के शिकार भी हो चुके है. मुख्यालय से प्रतिदिन सैकड़ों गाड़ियों का आवागमन मधेपुरा, सहरसा, आलमनगर पुरैनी, चौसा, बिहारीगंज भागलपुर के लिए खुलती है. बावजूद इस और किसी किसी प्रतिनिधि, पदाधिकारी की नजर नहीं पड़ी है. जबकि वरिय पदाधिकारी का प्रतिदिन मुख्यालय मे आना जाना इन्हीं मार्गों से होता है. अनुमंडल मुख्यालय में बनाये गये यात्री सेड में भी फल और चाय दुकादारों का बसेरा बना हुआ है. यात्री शेड में की साफ सफाई नहीं की जाती है. जिसके कारण शेड के भीतर गंदगी फैली रहती है. वहीं यात्रियों को शौचालय एवं शुद्ध पेय जल के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
कहते हैं राहगीर . उदाकिशुनगंज अनुमंडल मुख्यालय के फुलौत चौक पर मधेपुरा, सहरसा, आलमनगर की तरफ जाने वाले राहगीर रमेश पासवान, सुनील कुमार, गणेश मंडल, मदन मोहन सिंह, दिनेश राय, संजय कुमार, संजीव कुमार यादव, प्रमोद यादव, रेशमी देवी, गोपाल कुमार, सुचीत यादव आदि का कहना है कि बस स्टैंड नहीं रहने की वजह से हमलोगों को बहुत बड़ी कठिनाईयों का सामना करना पड़ रहा है.
यात्री शेड भी बदतर स्थिति को देख कर लोगों को वहां जाने का मन नहीं करता है. बाहर से आये यात्रियों के ठहरने का कोई समुचित व्यवस्था नहीं है. वहीं स्थानीय लेागों ने स्थानीय अधिकारी से जल्द जगह की खोज कर बस स्टैंड बनाये जाने की मांग किया है. वही सरयुग चौक उर्फ चौसा चौक पर पुरानी, चौसा, भागलपुर की और जाने वाले राहगीर मनीष कुमार सिंह, सुनील कुमार, ममता देवी आदि का कहना है कि बस स्टैंड नहीं रहने के कारण हम राहगीरों को गाड़ी के इंतजार सड़क के किनारे खड़ा हो कर करना पड़ता है. यदि यहां बस पराव रहता तो हमलोगों को सड़क के किनारे खड़ा नहीं होना पड़ता.
कहते हैं स्थानीय व्यवसायी . मुख्यालय के फुलौत चौक पर दुकानदारी कर रहे दुकानदार जितेंद्र कुमार, बबलू कुमार, जयप्रकाश साह, हसमुद्दीन अली आदि का कहना है कि बाहर से आये यात्रियों को अगर मुख्यालय में रात गुजारनी हो तो अपने रिश्तेदार या फिर सड़क के किनारे ही रह जाते है. इससे यात्रियों को काफी परेशानी होती है.
सड़क किनारे बड़ी-छोटी गाड़ियों को लगाये जाने से प्रतिदिन किसी बड़ी घटना की आशंका बनी रहती है. यदि जल्द से जल्द जगह की खोज कर बस स्टैंड नही बनाया गया तो बढती आबादी एवं बढती गाड़ियां से कोई बड़ी घटनाएं होना आम बात हो जायेगी.
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