आवागमन की समस्याओं से घिरा है फुलौत

Published at :05 Mar 2016 7:51 AM (IST)
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आवागमन की समस्याओं से घिरा है फुलौत

मधेपुरा : फुलौत गांव स्थित हाहा धार में शनिवार की सुबह पांच व्यक्तियों की मौत नहीं होती अगर गांव के दोनों और पुल का निर्माण हो गया होता. ग्रामीणों ने नौका दुर्घटना में हुई मौत पर प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर ग्रामीणें द्वारा आक्रोश व्यक्त करना जरूरी भी था. क्योंकि हाहा धार पर पुल बनाये […]

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मधेपुरा : फुलौत गांव स्थित हाहा धार में शनिवार की सुबह पांच व्यक्तियों की मौत नहीं होती अगर गांव के दोनों और पुल का निर्माण हो गया होता. ग्रामीणों ने नौका दुर्घटना में हुई मौत पर प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों पर ग्रामीणें द्वारा आक्रोश व्यक्त करना जरूरी भी था. क्योंकि हाहा धार पर पुल बनाये जाने की मांग पिछले कई वर्षों से की जा रही है. परंतु इस और किसी ने भी ध्यान नहीं दिया.
कांग्रेस के शासनकाल में ही बना था पुल
70 के दशक में कांग्रेस सरकार में शामिल क्षेत्रीय विधायक सह पथ निर्माण मंत्री स्व विधाकर कवि द्वारा हाहा धार पर पुल का निर्माण कराया गया था. लेकिन वर्ष 1979 में ये पुल ध्वस्त हो गया. तब से आज तक किसी ने इस और ध्यान देना गवारा नहीं समझा. लोगों का कहना है कि 80 के दशक के पूर्व में फुलौत गांव क कांग्रेसियों का गढ़ माना जाता था. लेकिन 1977 में हुए चुनाव में कांग्रेस के हार जाने के बाद पार्टी ने अपना जनाधार खो दिया.
दो नदियों से घिरा है फुलौत : फुलौत गांव दो नदियों से घिरा हुआ है इस गांव की आबादी 25 से 30 हजार के करीब है. गांव के चारों और घघरी नदी एवं उसकी उपधारा से घिरा ये गांव बरसात में टापु सा दिखता है. बरसात के मौसम में लोगों को मवेशी के चारे के लिए भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है. साथ ही इस मौसम में रोजमर्रा का सामना लाना भी लोगों के लिए काफी कष्टकर होता है.
कहते हैं ग्रामीण
स्थानीय ग्रामीण अंजनी सिंह, बिनोद यादव, सिकेंद्र मंडल, मनटु सिंह आदि का कहना है कि फुलज्ञेत पूर्वी एवं पश्चिमी पंचायतों के बच्चों को पढ़ने के लिए नदी के उसपार जाना पड़ता है. पंचायत अपना लेकिन विद्यालय नदी टपकर जाना बच्चों को पढ़ाई से वंचित कर देता है. झंडापुरवासा, सपनी, घसकपुर आदि पंचायत के लोग सामान खरीदने भी जान जोखिम में डालकर बाजार आते है.
सबसे बड़ा दुध उत्पादक गांव है फुलौत : जिले का सबसे बड़ा दुध उत्पादक क्षेत्र रहने के बावजूद यहां के दुध उत्पादक किसान को भारी आर्थिक समस्या से जुझना पड़ता है. दुध उत्पादक किसानों का कहना है कि नाव से पार करने में समय लग जाता है, जिससे दुध फटने का भी डर लगा रहता है.
दुध के नुकसान हो जाने से हमारे सामने आर्थिक समस्या बनी रहती है. गांव में प्रतिदिन 40 से 50 क्विंटल दुध का उत्पादन होता है. यहां से मधेपुरा के अलावे भागलपुर एवं नवगछिया में भी दुध सप्लाई किया जाता है. लेकिन वहीं दूसरी और पुल का निर्माण नहीं होने से मक्के की खेती कर रहे किसानों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है.
चुनाव के समय ही याद आते हैं वायदे : स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि नेताओं ने सिर्फ क्षेत्र की जनता को ठगने का ही काम किया है. चुनाव के समय एनएच-106 पर बनने वाले पुल की घोषणा भी कागजों में सिमट कर रह गयी है.
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