आवंटन का रोना रो रहा है विभाग, नहरें भी है सूखी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Jan 2016 1:24 AM (IST)
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पंपसेट से हो रही सिंचाई मधेपुरा : सुलभ व सस्ता फसलों की सिंचाई करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमंडल के विभिन्न नलकूप संयत्र लगाया गया था. लेकिन अधिकांश नलकूप वर्षों से खराब रहने के कारण किसान रबी फसलों की सिंचाई एक से दो बार पंप सेट करा चुके है. चूंकि खराब पड़े नलकूपों से […]
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पंपसेट से हो रही सिंचाई
मधेपुरा : सुलभ व सस्ता फसलों की सिंचाई करने के लिए राज्य सरकार द्वारा अनुमंडल के विभिन्न नलकूप संयत्र लगाया गया था. लेकिन अधिकांश नलकूप वर्षों से खराब रहने के कारण किसान रबी फसलों की सिंचाई एक से दो बार पंप सेट करा चुके है. चूंकि खराब पड़े नलकूपों से एक बुंद पानी नहीं टपकता है तो सिंचाई की बात करना कहा तक उचित होगा.
वैसे विभाग राशि की अनुपलब्धता की बहाना बना कर खराब पड़े नलकूपों की मरम्मत वर्षों से नहीं करायी जा सकी है. इधर अनुमंडल की सभी नहरें भी सूखी पड़ी हुई है. जिससे किसानों की फसलों की पटवन करने के लिए पंप सेट का सहारा लेना पड़ रहा है. जो काफी महंगा साबित हो रहा है. नलकूपों से एक बूंद पानी नहीं निकलता है इसके लिए प्रशासनिक आंकड़ा की काफी कुछ बया कर जाता है.
खराब व चालू है नलकूप . विभागीय जानकारी के अनुसार उदाकिशुनगंज प्रखंड में सात नलकूप सयंत्र लगाये गये है. जिसमें से मात्र दो ही ठीक है और पांच खराब पड़ा हुआ है. इसी तरह ग्वालपाड़ा प्रखंड के आठ में से छह, चौसा प्रखंड 19 में आठ, बिहारीगंज प्रखंड के चार में दो, पुरैनी प्रखंड के चार में से चार, व आलमनगर प्रखंड के तीन में से तीनों खराब पड़ा हुआ है.जबकि सच्चाई यही है कि एक भी नलकूप ठीक अवस्था में नहीं है. जिस वजह से खेतों में लगी फसलों का पटवन पंप सेट से किसानों द्वारा की जा रही है.
खेतों तक नहीं पहुंच पाता है पानी . सिंचाई करने के लिए नलकूपों से खेतों तक पक्की नाला बना हुआ नहीं है. जिसके कारण जो नलकूप ठीक भी है तो खेतों तक पानी नहीं पहुंचाया जा सकता है. जिससे इन नलकूपों से किसानों को कुछ भी लाभ नहीं हो पा रहा है. नलकूप मात्र दिखावा बन कर रह गया है.
सस्ता होता पटवन. अगर नलकूप ठीक रहता तो कम लागत खर्च में एक हेक्टर जमीन का पटवन हो पता. चूंकि एक – एक हेक्टेयर खेतों का पटवन करने पर रब्बी मौसम में 271 रूपये और खरीफ मौसम में तीन सौ 55 रूपये प्रति हेक्टर नलकूप का किराया देना पड़ता है. यानी पूरे सीजन पटवन करने पर इतनी ही राशि सरकार को देना होता.
लाखों का लागत आता है एक नलकूप पर . एक नल कूप संयत्र लगाने पर करीब छह लाख रूपये खर्च आता है. जबकि किसानों को दो कटठा जमीन सयंत्र लगाने के लिए मुफ्त में सरकार को देना होता है. अगर अनुमंडल की बात कहें तो पूरे 40 नलकूपों में सरकार का करीब दो करोड़ 40 लाख रूपये लागत खर्च है. जबकि स्टाफ को प्रतिमाह वेतन का भी भुगतान करना पड़ता है. लेकिन इस विभाग न तो सरकार को लाभ हो रहा है और न तो को सुविधा ही मिल पा रही है.
आवंटन का है रोना .विभागीय कार्यपालक अभियंता का मानना है कि नलकूप की मरम्मति के सरकार द्वारा राशि का आवंटन प्राप्त नहीं होने के कारण खराब पड़े नलकूपों की मरम्मति नहीं करायी जा सकी है. अगर विभाग की ही बात पर यकिन की जाय तो फिर किसानों की सुविधा के लिए साशन और प्रशासन के द्वारा सिंचाई की कोई वैकल्पिक व्यस्था क्यों नहीं की जा सकी.
नहरें पड़ी है सुनी . इस रब्बी के मौसम में भी अनुमंडल के सभी नहरें सूखी पड़ी हुई है. अगर नहरों में पानी दिया जाता तो भी अधिकांश किसानों को लाभ होता. सस्ते किराये पर फसलों की सिंचाई कर पाते. परंतु विभागीय अधिकारी या सरकार किसानों के हित में ऐसा नहीं कर पा रही है. अगर नहरों में पानी होता तो पूरे सीजन में एक एकड़ खेत का पटवन करने में किराये के रूप में मात्र 12 रूपये देने होते. लेकिन यहां तो किसानों को सरकार अपने हाल पर छोड़ दिये है. आखिर कैसे होगा किसानों का भला.
पंप सेट से पटवन करना मंहगा . पंप सेट पटवन करना किसानों के लिए काफी महंगा साबित हो रहा है. एक एकड़ खेत का सिंचाई करने पर पंप सेट से दस घंटा से 12 घंटा पानी देना पड़ता है. जबकि प्रति घंटा एक सौ रूपये पंप सेट किराया देना होता है. जो किसानों के महंगा साबित हो रहा है. अगर कुल देखा जाय तो किसानों के हित में कोई खास काम नहीं कर पा रही है.
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