नशा हमारे चरत्रि को करता है कलंकित : आचार्य

Published at :04 Jan 2016 6:45 PM (IST)
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नशा हमारे चरत्रि को करता है कलंकित : आचार्य

नशा हमारे चरित्र को करता है कलंकित : आचार्य फोटो- मधेपुरा 08,09कैप्शन – प्रवचन देते आचार्य, उपस्थित भक्तजन प्रतिनिधि, मुरलीगंज मुरलीगंज भगत धर्मशाला मे रविवार को जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मे शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी श्रद्धालुओं के जीवन का मुख्य उद्देश्य व उनके अच्छे कर्म पर व्याख्यान किया. उन्होंने तेरापंथी सभा मे मौजूद श्रद्धलुओं […]

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नशा हमारे चरित्र को करता है कलंकित : आचार्य फोटो- मधेपुरा 08,09कैप्शन – प्रवचन देते आचार्य, उपस्थित भक्तजन प्रतिनिधि, मुरलीगंज मुरलीगंज भगत धर्मशाला मे रविवार को जैन श्वेतांबर तेरापंथी सभा मे शांतिदूत आचार्य श्री महाश्रमण जी श्रद्धालुओं के जीवन का मुख्य उद्देश्य व उनके अच्छे कर्म पर व्याख्यान किया. उन्होंने तेरापंथी सभा मे मौजूद श्रद्धलुओं से कहा कि एक बड़ी कठिनाई को झेलने का मतलब है कि अंधकार मय जीवन से प्रकाश रूपी सूर्य की तरफ एक छलांग भरने के समान है. विश्वशांति व नि:शस्त्रीकरण के लिए हिंसात्मक लोगों का साथ नहीं दूंगा, जाति-रंग भेदभाव को दुर करने के दिशा मे आगे बढ़ने का प्रयत्न करूंगा, जन मानस मे व्याप्त उन्माद के खिलाफ आवाज उठाना एक सच्चे मानव के जीवन जीने का मुख्य उद्देश्य होना चाहिए. उन्होंने कहा कि मादक तथा नशीले पदार्थों के सेवन से मनुष्य का विवेक बुद्धि नष्ट हो जाती है. शारीरिक, मानसिक, नैतिक और आर्थिक दृष्टि से बर्बाद हो जाती है. उन्होंने कहा कि बढ़ती नशे की संस्कृति ने हमारे चरित्र को कलंकित कर दिया है. जिससे पारिवारिक, समाजिक व राष्ट्रीय स्तर पर भी विकृतियां आ गई है. सद्भावना, नैतिकता, नशामुक्ति व अहिंसा रोकने का संदेश जन जन तक फैलाना ही अहिंसा पद यात्रा का मुख्य उद्देश्य है. इससे समाज बढ़ते कुरीति, व्यभिचार, अत्याचार, जाति धर्म का भेेदभाव के विरुद्ध मनुष्य मे जागृति हो सके. उन्होंने श्रद्धलुओं से कहा कि अपने अंदर से क्रोध, लोभ, मोह, माया व अहंकार को त्याग करने का संकल्प ले. यह शरीर किसी की सहायता के लिए बना है. ना कि किसी को दुख देने के लिए. दान देने के संदर्भ मे आचार्य श्री महाश्रमण ने कहा कि यह जरूरी नही कि धन का ही दान दिया जाए, अगर आपके पास समय बचता है तो किसी की सहायता मे लगाये. यह समय भी दान है, वही अहिंसा यात्रा मे साथ चल रहे साध्वी प्रमुख कनकप्रभा जी ने कहा कि बीत रहे समय का एक एक क्षण मूल्यवान है. बीत रहे समय को सार्थक बनाये. उन्होंने नव वर्ष के शुभ संकल्पों के साथ लोगों को नये जीवन की शुरूआत करने की बात कही. उन्होंने कही कि उम्मीद उमंग और उल्लास के बीच किसी के गलत व्यवहार को भुलने और उसके अच्छे कर्म को याद रखना चाहिए. इस दौरान स्थानीय और देश के विभिन्न राज्यों से आये सैकड़ों श्रद्धलु उपस्थित रहे.

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