समझाने पहुंचे डीएम, नहीं माने हरजोड़ावासी

समझाने पहुंचे डीएम, नहीं माने हरजोड़ावासी फोटो – मधेपुरा 05, 06, 07 कैप्शन – गांव में बिजली नहीं लगने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का लिया है निर्णयडीएम के समझाने पर भी ग्रामीणों का आक्रोश नहीं हो रहा कम प्रतिनिधि, आलमनगर आलमनगर प्रखंड के गंगापुर पंचायत के हरजोड़ा सहित कई गांवों के ग्रामीणों को […]
समझाने पहुंचे डीएम, नहीं माने हरजोड़ावासी फोटो – मधेपुरा 05, 06, 07 कैप्शन – गांव में बिजली नहीं लगने पर आक्रोशित ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार का लिया है निर्णयडीएम के समझाने पर भी ग्रामीणों का आक्रोश नहीं हो रहा कम प्रतिनिधि, आलमनगर आलमनगर प्रखंड के गंगापुर पंचायत के हरजोड़ा सहित कई गांवों के ग्रामीणों को मतदान के लिए समझाने गये जिला निर्वाचन पदाधिकारी सह डीएम का प्रयास विफल रहा. ग्रामीणों का आक्रोश कम होने का नाम नहीं ले रहा है. यहां के लोग गांव में आज तक बिजली नहीं लगने पर आक्रोशित हैं. गौरतलब है कि आलमनगर प्रखंड के गंगापुर पंचायत स्थित हरजोड़ा घाट, खरोवा बासा, भवानीपुर बासा,बलहा वासा, माड़वारी वासा व लुटना के ग्रामीणों ने गांव में सड़क व बिजली नहीं रहने के कारण इस बार विधान सभा चुनाव में वोट बहिष्कार का निर्णय लिया है. ग्रामीणों को मतदान के लिए मनाने की कोशिश पहले भी की गयी थी. आलमनगर के बीडीओ, सीओ व थानाध्यक्ष ने ग्रामीणों को समझाने बुझाने का प्रयास किया था, लेकिन लोगों ने उनकी बात मानने से इनकार कर दिया था. जिला निर्वाचन पदाधिकारी मो सोहैल शनिवार की सुबह करीब 10 बजे हरजोड़ा घाट पहुंचे. यहां उन्होंने ग्रामीणों की समस्याओं को सुना. डीएम ने कहा कि मतदान लोकतंत्र सबसे बड़ा पर्व है. अगर मतदान नहीं करेंगे तो जनप्रतिनिधि के चुनाव में उनकी भूमिका नहीं होगी. उन्होंने ग्रामीणों से मतदान करने की अपील की. लेकिन ग्रामीण ने डीएम की एक भी बात मानने को तैयार नहीं थे. इस दौरान डीएम को भारी विरोध का सामना करना पड़ा. घंटों डीएम लोगों को समझाते रहे. ग्रामीणों में महिलाओं की संख्या अधिकाधिक थी. महिलाओं ने जम कर समस्या गिनाना शुरू किया और अपनी भड़ास निकाली. कुछ देर रास्ता अवरूद्ध कर डीएम के काफिले को रोके रखा. ———इनसेट ———दियारा का यह गांव कब तक विकास की बाट जोहेगा प्रतिनिधि,आलमनगर. आलमनगर प्रखंड के गंगापुर पंचायत कोसी नदी के दियारा में है. वहां पहुंचने के लिए कभी पैदल तो कभी नाव का सहारा लेना पड़ता है. ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के इतने साल बीत जाने के बाद भी इस क्षेत्र में विकास नहीं हो पाया है. ग्रामीण भीम मंडल, रधुनंदन साह, राजो राम, मनोज ऋषिदेव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 1985 में बिजली का पोल गाड़ा गया था. परंतु आज तक इन खंबों पर तार भी नहीं लग पाया. बिजली तो सपना ही बन कर रह गया है. वहीं ग्रामीण गुड़िया देवी, मीना देवी, सीता देवी, सहित सैकड़ों महिलाओं ने कहा कि आज तक उन लोगों को सड़क नसीब नहीं हो पायी है. जनप्रतिनिधियों सिर्फ वोट लेने आते हैं एवं आश्वासन देकर चले जाते हैं. सड़क के नाम पर मनरेगा सहित अन्य एजेंसियों द्वारा लाखों के वारे न्यारे किये गये हैं. इसकी शिकायत करने के बावजूद भी कार्रवाई नहीं हो पाती है. सड़क नहीं रहने के कारण हमलोगों की जरूरत का समान भी मुश्किल से उपलब्ध हो पाता है. सड़क नहीं रहने के कारण बीमार पड़ने पर जल्दी इलाज नहीं हो पाता है एवं बीमार रास्ते में दम तोड़ देते हैं. प्रत्याशी पसंद नहीं तो नोटा को दें वोटहरजोड़ा गांव में डीएम मो सोहैल ने उपस्थित ग्रामीणों को चुनाव के बाद हर हाल में बिजली उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया. उन्होंने सड़क निर्माण कराने की बात भी कही. उन्होंने ग्रामीणों से कहा कि इवीएम मशीन में एक विकल्प नोटा का भी होता है. इस बटन को दबाने का अर्थ है कि आपको कोई प्रत्याशी पसंद नहीं है. आप भले ही नोटा दबायें लेकिन मतदान जरूर करें. विद्यालय भी पहुंचे डीएम हरजोड़ा पहुंचे डीएम ग्रामीणों को समझाने के बाद मध्य विद्यालय भी पहुंच गये. ग्रामीणों ने शिकायत की थी कि विद्यालय में पढ़ाई नहीं होती. डीएम ने बीडीओ को विद्यालय की जांच के दौरान अनुपस्थित पाये गये दो शिक्षकों को निलंबित करने का आदेश दिया. इस दौरान बीडीओ मिनहाज अहमद, सीओ विकास कुमार सिंह, थानाध्यक्ष राजेश रंजन मौजूद थे.
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