नवरात्रा: जय माता दी की जयकारों से गूंज रहा शहर

नवरात्रा: जय माता दी की जयकारों से गूंज रहा शहरमां के कालरात्री स्वरूप की पूजा आज दुर्गा पूजा को लेकर शहर में उत्साह, माता की चुनरी से पटा शहर – सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके…फोटो- मधेपुरा 10कैप्शन- मां को अंतिम रूप देते कलाकारफोटो- मधेपुरा 11कैप्शन- बड़ी दुर्गा मंदिर पर तैयार किया जा रहा भव्य […]
नवरात्रा: जय माता दी की जयकारों से गूंज रहा शहरमां के कालरात्री स्वरूप की पूजा आज दुर्गा पूजा को लेकर शहर में उत्साह, माता की चुनरी से पटा शहर – सर्व मंगल मांगल्ये शिवे सर्वाथ साधिके…फोटो- मधेपुरा 10कैप्शन- मां को अंतिम रूप देते कलाकारफोटो- मधेपुरा 11कैप्शन- बड़ी दुर्गा मंदिर पर तैयार किया जा रहा भव्य पंडाल फोटो- मधेपुरा 12कैप्शन- बंगाल स्कूल स्थित पंडाल का निर्माण कर रहे बाहर के कारीगर फोटो- मधेपुरा 13कैप्शन- पूजा सामग्री व माता की चुनरी की सजी दुकानें प्रतिनिधि.मधेपुरा.जिले में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह चरम पर है़ शनिवार को विभिन्न दुर्गा मंदिरों में भक्ति भाव से मां के स्कंदमाता स्वरूप की पूजा की गयी. वहीं पूजा के छठे दिन रविवार को मां के काल रात्रि स्वरूप की पूजा की जायेगी. हिंदू धर्म के इस महापर्व को लेकर जिले भर में मां का मंदिर सज धज कर तैयार हो रहे है़ं विभिन्न जगहों के कलाकारों द्वारा माता के प्रतिमाओं को आकर्षक रूप दिया जा रहा है़ माता का मंदिर श्रद्धालुओं से पट चुका है़ अष्टमी से विभिन्न जगहों पर मेला प्रारंभ होगा. शहर में यहां यहां होती है पूजा शहर में चार जगहों पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है. मुख्य बाजार स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर में वर्षों से नगरवासियों के द्वारा वैदिक रीति रिवाज के अनुसार मां जगदंबा की अराधना की जाती है. वहीं बांग्ला स्कूल परिसर में मां दुर्गा की पूजा बंगाली प्रद्धति के अनुसार होती है. वहीं रेलवे कॉलनी परिसर में मंदिर की छटा देखने योग्य है. लोग बताते है कि मां की अराधना करने प्रत्येक वर्ष दशहरा के मौके पर सात समुंदर पार बसे श्रद्धालु का भी शहर में आवागमन होता है. वहीं गोशाला चौक स्थित दुर्गा मंदिर में पंडालों को अंतिम रूप दिया जा रहा है. गौरतलब है कि गोशाला में 2001 से माता का दरबार सज रहा है. रेलवे कॉलोनी में हवन का है विषेश महत्व मधेपुरा. शहर के रेलवे कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर में अष्टमी की रात होने वाले हवन का विशेष महत्व है. इस बाबत मंदिर के पुजारी ने बताया कि श्रद्धा भाव से हवन में भाग लेने वाले श्रद्धालुओं की सारी मनोकामना माता पूरी करती हैं. उन्होंने कहा कि रेलवे कॉलोनी मंदिर के हवन में भाग लेने वाले भक्त आज देश ही नहीं विदेशों में भी जॉब कर रहे है. वहीं मंदिर समिति के सदस्यों ने कहा कि 1959 में तत्कालीन स्टेशन मास्टर द्वारा रेलवे कॉलोनी में माता की पूजा शुरू की गयी थी. तब वर्तमान पुजारी के पिता वंशीधर मुखर्जी मंदिर के पुजारी हुआ करते थे. बांग्ला स्कूल में सौहार्दपूर्ण माहौल में होती है पूजा मधेपुरा. शहर के बांग्ला स्कूल दुर्गा मंदिर में हिंदू-मुसलिम सौहार्दपूर्ण माहौल में मां दुर्गा की पूजा करते है. यहां सौ साल पहले से मां की आराधना हो रही है. पूजा समिति के सदस्य बताते हैं कि बांग्ला स्कूल में स्व खोखन घोष के पूर्वजों ने मैया की पूजा अर्चना शुरू की थी. यहां 1901 से माता की पूजा बांग्ला पद्धति से हो रही है. सदस्य इंद्रनील घोष ने बताया कि इस मंदिर की सबसे खास बात यह है कि पश्चिम बंगाल के कलाकार के द्वारा माता के दरबार को आकर्षक रूप से सजाया जाता है.मन्नत पूरी होने पर भक्त देते है चढ़ावा मधेपुरा. शहर की पुरानी दुर्गा मंदिर में मन्नत पूरी होने पर भक्त सोना, चांदी व सोने चांदी के आभूषण के अलावे अन्य चढ़ावा चढ़ाते हैं. मुख्य बाजार स्थित पुरानी दुर्गा मंदिर में प्रतिदिन हजारों की संख्या में भक्त माता के दरबार में हाजिरी लगाते हैं. बताया जाता है सैकड़ों वर्ष पूर्व से यहां वैदिक रीति रिवाज से माता की पूजा होती है. इस वर्ष टेंट हाउस के द्वारा माता के मंदिर को भव्य रूप से सजाया जा रहा है. 13 वर्षों से हो रही गोशाला में मां दुर्गा की पूजा मधेपुरा. विवि चौक स्थिति गोशाला परिसर में मां दुर्गा की पूजा 2001 से हो रही है. पूजा समिति के सदस्यों ने बताया कि 13 वर्ष पूर्व लाल बहादुर यादव की अध्यक्षता में यहां पूजा शुरू की गयी थी. इसके बाद से पूजा अनवरत जारी है. दुर्गा पूजा के मौके पर यहां भव्य मेले का आयोजन किया जाता है. उन्होंने बताया कि पूजा के शुरुआत में यहां के पुजारी किशोर प्रसाद यादव हुआ करते थे. सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है मंजौरा की दुर्गा पूजा उदाकिशुनगंज, मधेपुरापूर्णिया एवं मधेपुरा जिले के सीमा पर स्थित उदाकिशुनगंज प्रखंड के मंजौरा बाजार स्थित मां दुर्गा मंदिर सांप्रदायिक सद्भाव की मिसाल है़ यही वजह है कि पर्व में मुसलिम समुदाय के लोग हर वर्ष बढ़-चढ़ कर भाग लेते है़ं बताते हैं कि यहां भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण होती है़ वैसे यहां मेला लगने की परंपरा बहुत पुरानी नहीं है. मेला समिति के सदस्य बताते है कि ग्रामीणों के विचार से 2001 में मां की प्रतिमा का निर्माण करा मेला लगाने की प्रथा शुरू की गयी. कुछ ही वर्ष बाद माता का भव्य मंदिर का निर्माण हुआ़ जब से मेला आरंभ तब से भक्तों की भारी भीड़ लगती है़ मां का दरबार पूरी तरह सज चुका है़ भक्तों का सैलाब मंदिर में उमड़ने लगा है. भान टेकठी में लगेगा पांच दिवसीय मेला घैलाढ़, मधेपुराजिले के प्रखंड के भान टेकठी पंचायत के भान गांव में श्री श्री 108 मां दुर्गा की महिमा अपरंपार है. यह दुर्गा मंदिर पौराणिक है और इसे शक्ति की उपासना व श्रद्धा का केंद्र भी माना जाता है. भान टेकठी के मुखिया व ग्रामीणों की मानें तो यहां 150 वर्ष पूर्व से ही दुर्गा पूजा धूमधाम से मनायी जाती है. कहते हैं कि माता ने यहां के एक बुजुर्ग को स्वप्न दे कर मंदिर बनाने कहा. उसने सुबह उठ कर जब स्वप्न की बात सबको बतायी, तब से ही यहां झोपड़ी बना कर मां की पूजा होने लगी. प्रत्येक वर्ष दुर्गा पूजा में यहां मेला का आयोजन भी किया जाने लगा. ग्रामीणों की मानें तो यू तो प्रत्येक रोज यहां मन्नतें मांगने श्रद्धालु आते हैं और मां उनकी मुराद पूरी करती हैं. दुर्गा पूजा में यहां श्रद्धालुओं की काफी भीड़ रहती है. मान्यता है कि यहां मां के चरणों में पान चढ़ाने पर अगर अपनी जगह से खिसक कर श्रद्धालु की ओर आ गया तो उनकी मन्नत पूरी हो गयी. 25 वर्ष पूर्व ग्रामीणों के सहयोग से यहां मंदिर का भी निर्माण कराया गया है. इस भगवती मां की कृपा यहां के लोगों पर सदा बनी रहती है. सच्चे मन से पहुंचने वाले भक्तों को मां मनोवांछित फल देती हैं. यहां पांच दिनों तक मेला का आयोजन किया जाता है. रात्रि में बच्चों के द्वारा नाटक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किया जाता है, जिसमें प्रशासनिक पदाधिकारियों के साथ-साथ विभिन्न समुदाय के लोगों का भी भरपुर सहयोग मिलता है.बुधमा दुर्गा की दूर-दूर तक फैली है ख्याती जितापुर, मधेपुरा. मुरलीगंज प्रखंड के बुधमा रेलवे स्टेशन परिसर में सार्वजनिक वैष्णवी दुर्गा स्थान बुधमा कटरवा में स्थापित है. इनका निर्माण 1956 में किया गया था. यहां जो भी मन्नत लोग मांगते हैं उसे माता पूर्ण करती हैं. यहां पर जब-जब विकट समय आता है तो मंदिर में दीप प्रज्वलित होता है. मंदिर के पुजारी बताते है शुरू में इस मार्ग से कोशी नदी बहती थी और यहां बुद्धम धाट था. एक बार कोसी नदी ने विकराल रूप धारण कर बुद्धम धाट रेलवे स्टेशन को अपने गर्भ में समा लिया और चारों ओर तबाही मचानी शुरू कर दी. इस क्षेत्र के कई लोगों ने बुद्धम घाट स्टेशन के पास ही मां दुर्गा का आह्वन किया और मंदिर बना दिया. मंदिर स्थापना के बाद ही कोसी शांत हो गयी और उसी दिन से ही मंदिर की कृति दूर-दूर तक फैल गयी. लोग बताते हैं कि मंदिर की स्थापना रेलवे परिसर में होने के कारण समस्तीपुर रेलवे के इंजिनीयर ने मंदिर निर्माण को रोक दिया था. इसके बाद इंजीनियर को भारी मुसीबतों का सामना करना पड़ा था. इंजीनियर की पत्नी असाघ्य रोग से पीडि़त हो गयी. इस बात की जानकारी जब उनके कर्मचारी को हुई तो उन्होंने इंजीनियर को मां के दरबार में क्षमा याचना करने कहा. इंजीनियर ने मां के दरबार में क्षमा याचना की तो ठीक उसी समय उनकी पत्नी ठीक हो गयी. तब से बुधमा घाट का मंदिर जो की अब बुधमा के नाम से जाना जाता है की ख्याती दूर- दूर तक फैल गयी. दंड प्रमाण देने भक्तों की उमड़ रही है भीड़ सिंहेश्वर,मधेपुरा. दुर्गा पूजा को लेकर सिंहेश्वर मंदिर में दंड प्रमाण देने भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है. कलश स्थापना के साथ ही सिंहेश्वर मंदिर में बचपन से पचपन वर्ष के भक्तों में दंड प्रमाण देने की होड़ लगी रहती है. शनिवार को हजारों की संख्या में श्रद्धालु उत्साह के साथ बाबा को दंड प्रमाण दे रहे थे. दंड प्रमाण देने वाले भक्तों की बाबा सभी मुराद पूरी करते हैं. मंदिर परिसर स्थित शिव गंगा में भक्त डुबकी लगा कर दंड प्रमाण देते हुए बाबा मंदिर तक जाते है. इसके बाद पूजा अर्चना कर पुन: भक्त बाबा मंदिर से दुर्गा चौक स्थित सार्वजनिक दुर्गा मंदिर तक दंड प्रणामी देते हैं. हालांकि अधिकांश भक्त मंदिर परिसर स्थित मैया के मंदिर तक ही दंड प्रणामी देते है. दुर्गा पूजा के मौके पर सिंहेश्वर बाजार स्थित सार्वजनिक दुर्गा पूजा मंदिर के अलावा मंदिर परिसर में सिंहेश्वर मंदिर न्यास समिति की ओर से बड़े धूम-धाम के साथ माता की पूजा आराधना की जाती है. बच्चे हो या बूढ़े सभी लगा रहे हैं जयकारा – मंदिरों में उमड़ रही हैं माता के भक्तों की भीड़मधेपुरा. नवरात्रा शुरू होते ही सारा शहर माता के भक्ति में डूब गया है. शहर में दुर्गा पूजा को लेकर चहलकदमी बढ़ गयी है. माता की चुनरी से दुकानें पट गयी हैं. वहीं पूजा समाग्रियों से लेकर कपड़ों की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ उमड़ने लगी है. जिला मुख्यालय सहित विभिन्न प्रखंडों का माहौल भक्तिमय बन गया हैं. शहर की सड़कें जय माता दी की जयकारों से गूंज रही हैं. बच्चे हो या बूढ़े सभी माता के जयकारा लगा रहे हैं. खास कर जिले के विभिन्न मंदिरों में माता के भक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही हैं. वहीं सिंहेश्वर मंदिर में इन दिनों पूजा अर्चना करने हजारों की संख्या में भक्त पहुंच रहे हैं. कलश स्थापना के बाद दो दिन तक बाजार में खास रौनक नहीं देखी गयी. लेकिन चार पूजा होने के बाद बाजार की रौनक लौटने लगी हैं. पूजा के पांचवें दिन शनिवार को शहर में खरीदारों की अच्छी खासी भीड़ देखी गयी. इस वर्ष ब्रांडेड व नन ब्रांड डेड कपड़ों की खरीदारी खास कर युवा वर्ग के लोग कर रहे हैं.ब्रांडेड पर नन ब्रांडेड भारी मुख्य बाजार स्थित विभिन्न कंपनियों के शोरूम में एक से बढ़ कर एक लेटेस्ट डिजाइनों के जिंस पेंट, शर्ट, टी-शर्ट का रेंज उपलब्ध है. हालांकि इस वर्ष ब्रांडेड कंपनी से अधिक नन ब्रांडेड कंपनी के कपड़ों की डिमांड देखी जा रही है. दुर्गा पूजा के मौके पर नन ब्रांडेड कंपनी का क्रेज लोगों के सिर चढ कर बोल रहा है. कीमत हो या क्वालिटी नन ब्रांडेड कंपनी खरीददारों की पहली पसंद बन गयी है. यू कहें कि नन ब्रांडेड कंपनी ब्रांडेड कंपनी पर भारी पर रही है. बंबई वाले शर्ट का चल रहा है जादू बंबई वाले शर्ट, चाइनीज कॉलर, टोपी शर्ट के अलावे क्रास पैकेट पेंट व बैलून पेंट का जादू लड़कों पर जहां छा गया है. वहीं अनारकली ड्रेस लड़कियों को खूब भा रही है. इसके अलावा जिंस-टॉप, सलवार-सूट, लेगीज-कुर्ती लड़कियों की पहली पसंद बन गयी है. बच्चों के लिए जिंस-शर्ट एवं पेंट-शर्ट, बंडी की मांग अधिक देखी जा रही है.बच्चों के कपड़ों का सेल परवान पर शहर में नन ब्रांडेड कंपनी के कम कीमत में बेहतर रेंज उपलब्ध रहने के कारण लोग खूब खरीदारी कर रहे हैं. खासकर नन ब्रांडेड कंपनी में लेडीज व बच्चों के कपड़ों का सेल परवान पर है. खरीदारों का मानना है कि ब्रांडेड कंपनी के एक सेट की कीमत में नन ब्रांडेड कंपनी का चार सेट कपड़ा हो जाता है. पूजा समाग्रियों की दुकानों पर बढ़ी भीड़ दुर्गा पूजा को लेकर खास कर पूजा सामग्रियों की दुकानों पर अच्छी खासी भीड़ देखी जा रही हैं. इसमें महिला खरीदारों की संख्या काफी रहती हैं. महिला माता की चुनरी खरीद रही हैं. नवरात्रा को लेकर घर-घर में माता भवानी की पूजा अराधना की जा रही है. यही वजह होते ही शहर के सभी दुकानों पर लोगों की भीड़ लगी रहती हैं.
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