नशे के लिए दवाईयों का प्रयोग कर रहे हैं युवा

Published at :16 Jul 2013 1:34 PM (IST)
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नशे के लिए दवाईयों का प्रयोग कर रहे हैं युवा

।। ब्रजेश कुमार ।। आलमनगर(मधेपुरा) : प्रखंड क्षेत्र के युवाओं द्वारा महंगी शराब के बदले इन दिनों व्यापक पैमाने पर नशीली दवाओं का सेवन कर रहे है. इससे उनके परिजन व अभिभावक परेशानी के दौर से गुजर रहे है. जानकारी के अनुसार उत्पाद विभाग द्वारा पूरे क्षेत्र में जगह- जगह देशी व विदेशी शराब की […]

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।। ब्रजेश कुमार ।।
आलमनगर(मधेपुरा) : प्रखंड क्षेत्र के युवाओं द्वारा महंगी शराब के बदले इन दिनों व्यापक पैमाने पर नशीली दवाओं का सेवन कर रहे है. इससे उनके परिजन व अभिभावक परेशानी के दौर से गुजर रहे है. जानकारी के अनुसार उत्पाद विभाग द्वारा पूरे क्षेत्र में जगह- जगह देशी व विदेशी शराब की लाइसेंसी दुकान में शराब की कीमत अधिक हो जाने से नशे की लत के शिकार युवकों का रूख नशीली दवाओं की ओर अधिक होने लगा है.

मालूम हो कि आलमनगर प्रखंड मुख्यालय में देशी व विदेशी शराब के तीन ठेकेमौजूद है. वहीं यहां प्रखंड क्षेत्र के दक्षिणी क्षेत्रों सोनामुखी, रतवारा व कपसिया के दियारा इलाका में अवैध रूप से महुआ शराब बनाने की झोंपड़ियां भी है. इसके अलावा अवैध रूप से प्रखंड क्षेत्र के सभी गांवों में देशी पौलिथीन भी चोरी छिपे बेची जाती है, जहां हर दिन हमेशा शराबियों की हुजूम लगी रहती है.

यहां काफी मात्र में अवैध रूप से महुआ व देशी शराब की बिक्री होने से शराब के सेवन करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है. दूसरी ओर शराब की महंगी कीमत व इसके दरुगध से युवा व किशोर अपने घर में पकड़े जाने की वजह से नशीली दवाओं का शराब के विकल्प के रूप में धड़ल्ले से प्रयोग करते देखे जा रहे है.

अंग्रेजी दवा दुकानों में बिकने वाली फोर्टवीन, कम्पोज आदि इंजेक्शन व नींद की दवा अल्प्राजोलम, कफ सीरफ, कोस्कोपीन, बेनाड्रील, कोरेक्स, पेन कीलर, स्पास्मोप्रोक्सीवीन आदि सहित दर्जनों अन्य दवाईयों नशे का विकल्प बन गया है. इसके अलावा एडहेसिव सुंघना तथा आयोडेक्स का इस्तेमाल नशे के लिए करना शामिल है.

दवा दुकानदार द्वारा अधिक लाभ के लिए बिना रजिस्टर्ड चिकित्सक के पुरजे के ही यह दवा ऊंची कीमत पर बेची जा रही है, जिससे युवाओं का एक वर्ग इन दवाओं की दुष्प्रभाव की गिरफ्त में समाता जा रहा है.

इन दवाओं के सेवन करने वालों युवकों ने बताया कि कोर्टबिन व कंपोज इंजेक्शन लेने व कफ सीरप, पेन किलर आदि दवाओं के निर्धारित मात्र से अधिक सेवन करने से अत्यधिक नशे की अनुभूति होती है एवं इसका असर देर तक रहता है. उक्त नशीली दवायें शराब की तुलना में काफी सस्ती होती है. इसके सेवन से घर में पकड़े जाने की भी आशंका नहीं रहती है.

* कफ सीरप का अधिक मात्र में सेवन हृदय गति रोक सकता है. वहीं नींद व दर्द निवारक दवाई से नशा करना भी बेहद जानलेवा साबित हो सकता है. इन दवाओं में मौजूद केमिकल कई तरह के दुष्प्रभाव हो सकते है. जिसमें पागल होने से लेकर मानसिक रूप से दुर्बल होना शामिल है.
डॉ सच्चिदानंद यादव, फिजिसियन व आइएमए के जिला सचिव

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