जिले में सरकारी नर्सरी बदहाल, निजी नर्सरी मालामाल

Published at :16 Jul 2013 1:33 PM (IST)
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जिले में सरकारी नर्सरी बदहाल, निजी नर्सरी मालामाल

मधेपुरा : जिले में स्थित चार पुरानी दो नयी सरकारी नर्सरी अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रही है. वहीं प्राइवेट नर्सरी मालिकों का कारोबार फल-फूल रहा है. पौधरोपण करने वाले लोगों को सरकार द्वारा संचालित नर्सरी से उचित दामों में पौधा नहीं मिल रहा है. इसके कारण किसानों से प्राइवेट नर्सरी वाले मनमानी कीमत […]

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मधेपुरा : जिले में स्थित चार पुरानी दो नयी सरकारी नर्सरी अपनी बदहाल स्थिति पर आंसू बहा रही है. वहीं प्राइवेट नर्सरी मालिकों का कारोबार फल-फूल रहा है. पौधरोपण करने वाले लोगों को सरकार द्वारा संचालित नर्सरी से उचित दामों में पौधा नहीं मिल रहा है.

इसके कारण किसानों से प्राइवेट नर्सरी वाले मनमानी कीमत वसूलते हैं. गम्हरिया के किसान पप्पू यादव बताते हैं कि कई सालों से फलदार वृक्ष लगाने के लिए सिहेंश्वर में संचालित प्राइवेट नर्सरी से पौधा लेना पड़ता है. उन्होंने कहा कि नर्सरी में एक पौधे का दो सौ रुपया से लेकर एक हजार रुपया तक लिया जाता है.

सिहेंश्वर के किसान मोहम्मद रहमान बताते हैं कि बीस वर्ष पहले प्रखंड कार्यालय के बगल में संचालित सरकारी नर्सरी से सस्ते दरों में पौधा मिलता था, परन्तु धीरे-धीरे उसका अस्तित्व मिटता चला गया. इस संबंध जिला उद्यान पदाधिकारी महेश लाल कांत बताते हैं कि जिले में सिहेंश्वर, उदाकिशुनगंज, चौसा, मुरलीगंज पुरानी नर्सरी है. कुमारखंड एवं आलमनगर में दो नयी नर्सरी है.

मधेपुरा सदर में चल रही नर्सरी वन विभाग के अधीन है. उन्होंने नर्सरी का सुचारू रूप से नहीं चलने का मुख्य कारण कर्मचारी की कमी को बताया. उनका कहना है कि पुराने कर्मचारी सेवानिवृत हो चुके हैं. जो कर्मचारी सरकार की ओर से बहाल किये गये है उनमें अनुभव की कमी है.

नये कर्मचारी जो बहाल हुए हैं वह ज्यादातर बाजार समिति से आये हुए हैं. नर्सरी को पुनर्जीवित करने के लिए सरकार ने प्रत्येक नर्सरी के लिए 80 हजार रुपये की राशि आवंटित की है. इससे चारदीवारी, सिंचाई, माली और शेड आदि की व्यवस्था की जा रही है.

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