प्रमंडलीय पुस्तकालय: ऊपर से फिट फाट अंदर से मोकामा घाट
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :09 Feb 2015 12:36 PM (IST)
विज्ञापन

सहरसा मुख्यालय: जिला मुख्यालय स्थित एकमात्र प्रमंडलीय पुस्तकालय का अस्तित्व समाप्त ही हो चुका है. पिछले दस वर्षो से यहां कोई पाठक नहीं आते हैं. शासन प्रशासन भी इसके अच्छे दिन लाने के प्रति गंभीर नहीं है. तभी तो इस बार भी पुस्तक व पुस्तकालय कर्मियों के लिए कोई योजना नहीं भेज सिर्फ भवन जीर्णोद्धार […]
विज्ञापन
सहरसा मुख्यालय: जिला मुख्यालय स्थित एकमात्र प्रमंडलीय पुस्तकालय का अस्तित्व समाप्त ही हो चुका है. पिछले दस वर्षो से यहां कोई पाठक नहीं आते हैं. शासन प्रशासन भी इसके अच्छे दिन लाने के प्रति गंभीर नहीं है. तभी तो इस बार भी पुस्तक व पुस्तकालय कर्मियों के लिए कोई योजना नहीं भेज सिर्फ भवन जीर्णोद्धार व रंग रोगन के लिए राशि भेजी गयी है. प्रमंडलीय पुस्तकालय का हाल ‘ऊपर से फिट फाट अंदर से मोकामा घाट’ जैसी हो गयी है. भवन का सुंदर रंग बाहर से ही लोगों को आकर्षित करता है, लेकिन अंदर जाने पर दीपक चाट चुकीपुस्तकों से ही मुलाकात होती है. हालत यह है कि यहां एक अदद दैनिक अखबार या मासिक पत्रिका तक नहीं मंगायी जाती है.
जीर्णोद्धार की हो रही खानापूर्ति : वही जिला प्रशासन व नप द्वारा प्रमंडलीय पुस्तकालय के आधारभूत संरचना को सुधारे बिना जीर्णोद्धार के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है. मालूम हो कि तत्कालीन आयुक्त पंकज दीक्षित के कार्यकाल के दौरान प्रमंडलीय पुस्तकालय की खस्ता हालत को देख भवन की मरम्मत की अनुशंसा की गयी थी. नप ने शहरी विकास अभिकरण की योजना मद की चार लाख 99 हजार की राशि से जीर्णशीर्ण भवन का रंग रोगन व मरम्मत का कार्य किया जा रहा है.
ऐतिहासिक है पुस्तकालय : जिला बनने के साथ 1954 में स्थापित केंद्रीय पुस्तकालय की शुरुआत सर्वप्रथम पूरब बाजार स्थित शंकर प्रसाद टेकरीवाल के कमरे में हुई. कुछ वर्षो के बाद स्थान बदलते इसे जिला स्कूल में स्थानांतरित किया गया. फिर डीबी रोड स्थित डीबी कॉलोनी मवि के कमरे में पुस्तकालय को शिफ्ट किया गया.
पुस्तकालय का चौथा स्थानांतरित जगह जिप का कमरा व बरामदा था. बार-बार जगह बदलने के पीछे एक कारण यह भी रहा था कि पुस्तकालय व पाठकों के लिए हर स्थान छोटा पड़ता गया. वर्ष 2000 तक जिप के कमरे में चलने तक पुस्तकालय के सदस्य पाठकों की संख्या सैकड़ों में थी. वर्ष 2001 में तत्कालीन विधायक शंकर प्रसाद टेकरीवाल के प्रयास से पुस्तकालय के अपने भवन का निर्माण सुपर बाजार में कराया गया, जिसका उद्घाटन तत्कालीन सांसद दिनेश चंद्र यादव ने 2001 में किया.
कंप्यूटर हो रहा बेकार : पुस्तकालय में दो कमरे है. कमरों में आलमारी व आलमारी में किताबें सजी है. पाठकों के इंतजार में टेबुल व कुरसी धूल फाक रही है. नये भवन में शिफ्ट होने के साथ ही पुस्तकालय को दो कंप्यूटर व एक जेनेरेटर आवंटित हुआ था. पुस्तकालय कक्ष में रखे एक कंप्यूटर के ऊपर चढ़ा प्लास्टिक का कवर आज तक नहीं उतारा जा सका है. वहीं दूसरा कंप्यूटर किसी साहब के आवास पर चल रहा है.
लाइब्रेरी है, लाइब्रेरियन नहीं : सुबह दस बजे से अपराह्न् चार बजे तक चलने वाले इस प्रमंडलीय पुस्तकालय में पुस्तकालयाध्यक्ष का पद वर्षो से रिक्त है. लिहाजा यहां का सारा भार एक मात्र आदेशपाल भोगी लाल पंडित के भरोसे है.
महत्वपूर्ण पुस्तकें उपलब्ध हैं यहां
पुस्तकालय पर भले ही किसी प्रशासनिक अधिकारी, राजनेता या कथित समाजसेवियों की सकारात्मक नजर नहीं, लेकिन यह प्रमंडलीय पुस्तकालय दुर्लभ पुस्तकों से भरा है. प्लांट पैथोलॉजी, जापान की शासन व्यवस्था, गूंगे सुर बांसुरी के, गांधी धर्म और समाज, प्रेमचंद्र परिचर्चा, अजेय राष्ट्रभावना, रावण तेरे रूप अनेक, माया, प्रेम में भगवान, सफेद कौआ, राजघाट की सानिध्य में, वह, नवरंग, उगते सूरज की किरण, कुरान सार, राहबीती, वृत विहार, अंजीर, मेरी शवयात्रएं जैसी दुर्लभ किताबें पाठकों के इंतजार में व रखरखाव के अभाव में धूल फांक रही है.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन










