तीसरे दिन भी बंद रहा मुरलीगंज बाजार

Updated at : 08 Sep 2017 4:29 AM (IST)
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तीसरे दिन भी बंद रहा मुरलीगंज बाजार

मधेपुरा : मुरलीगंज बाजार लगातार तीसरे दिन भी बंद रहा. इक्का-दुक्का अधखुले शटर के पीछे से लोग झांकते हुए मिले. सभी के जुबां पर बस एक ही बात है कि अगर किसी ने गलती की है, तो उसकी सजा मासूम बच्चों या राहगीरों समेत स्थानीय लोगों एवं दुकानदारों को क्यों दी गयी है. चाहे मुरलीगंज […]

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मधेपुरा : मुरलीगंज बाजार लगातार तीसरे दिन भी बंद रहा. इक्का-दुक्का अधखुले शटर के पीछे से लोग झांकते हुए मिले. सभी के जुबां पर बस एक ही बात है कि अगर किसी ने गलती की है, तो उसकी सजा मासूम बच्चों या राहगीरों समेत स्थानीय लोगों एवं दुकानदारों को क्यों दी गयी है. चाहे मुरलीगंज का गोल चौक हो या जयरामपुर चौक, हाट रोड, शांति नगर हर जगह लोग आपस में मुरलीगंज में घटी घटना पर चर्चा करते दिख जाते हैं. बहरहाल, हालात देख कर यह स्पष्ट हो रहा है कि मुरलीगंज के व्यवसायी और स्थानीय निवासी पुलिसिया कार्रवाई को लेकर कहीं न कहीं आक्रोशित हैं और इसी का नतीजा है कि मुरलीगंज बाजार बंद पड़ा है.

आठवीं के छात्र को भी बनाया गया आरोपित भेजा गया जेल
रूपेश कुमार आठवीं का छात्र है. मुरलीगंज के निजी विद्यालय में अध्ययनरत रूपेश उन 26 लोगों में शामिल हैं, जिन्हें माहौल बिगाड़ने के आरोप में प्रशासन द्वारा गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है. रूपेश के परिजन साफ कहते हैं कि उसे स्कूल के गेट से उठाकर पुलिस ले गयी है. कमोबेस यही कहानी मैट्रिक के छात्र गोपी, प्रशांत, सोनी एवं प्रीतम की है.
विदेत कुमार भी इसी तरह पुलिस के हत्थे चढ़ा है. वह महज 17 वर्ष का है. मुरलीगंज के बेंगापुल से सटे हाट रोड शांतिनगर के महादलित भी उद्देलित हैं. मुन्नी देवी, गीता देवी, गायत्री देवी, संजू देवी, मिलिया देवी कहती हैं कि घर में घुस कर बच्चों को मारा गया. मुन्नी देवी की बेटी तो पुलिस का रौद्ररूप देख कर बेहोश हो गयी. सभी किवाड़ पर ठोकर मारने गाली-गलौज करने का भी आरोप लगाते हैं. पुलिस की पिटाई से हाथ जख्मी करा बैठे शंभु भगत एवं महेश रजक कहते हैं कि उन्हें घर के आगे खड़े रहने की सजा दी गयी है,
जबकि कचहरी के शिवमंदिर के आगे रहने वाली फुलझरी देवी कहती है कि अपने बच्चों को बचाने में उसे लगी लाठियों ने जख्मी कर दिया है. मुरलीगंज के लोगों के लिए पांच सितंबर की यादें बेहद कड़वी है. वे कहते हैं कि कभी भी मुरलीगंज में इस तरह से कोई घटना नहीं हुई. स्थानीय लोग पूरे मामले की निष्पक्ष जांच चाहते हैं. वे कहते हैं कि गलत लोगों पर कार्रवाई हो इससे कोई गुरेज नहीं है. लेकिन जिस तरह से आम लोग राहगीर एवं मासूमों को पीटा गया, जेल भेजा गया इस पूरे प्रकरण की उच्च स्तरीय जांच कर दोषी अधिकारियों एवं पुलिस कर्मी पर भी कार्रवाई होने चाहिए. वहीं प्राथमिकी में सौ डेढ़ सौ लोग अज्ञात के तौर पर डाला गया है.
इसके आड़ में पुलिसिया भयादोहन पर भी रोक लगे. यह प्रमुख मांग है. लोगों ने कहा कि घटना के दिन स्थानीय वार्ड पार्षदों एवं गणमान्य लोगों द्वारा थाना पर जाकर निर्दोष बच्चों को छोड़ने की मांग की गयी थी. थानाध्यक्ष द्वारा एक घंटे बाद आने को कहा गया, लेकिन इसी बीच सभी को जेल भेज दिया गया. बहरहाल मुरलीगंज बाजार बंद रहना यह जतलाता है कि आक्रोश अभी सुलग रहा है. प्रशासन को फौरन स्थानीय लोगों से वार्ता कर इस मामले का तार्किक हल निकालना चाहिए.
आसपास के गांवों का मुख्य बाजार व मंडी है मुरलीगंज
मुरलीगंज आसपास के दर्जनों गांव के लिए मुख्य बाजार एवं मंडी के तौर पर कार्य करता है. यहां पाट व्यवसायी हैं, जहां किसान पाट बेचते हैं. वहीं से रकम लेकर वे सामान खरीदते हैं. अभी पाट की बिक्री तो शुरू हुई है, लेकिन बाजार बंद होने से किसान हलकान महसूस कर रहे हैं. मुरलीगंज पहुंचे कई किसान कहते हैं कि जब सेठ जी से गद्दी पर जाकर मिलना चाहे, तो उन्होंने कहा कि अभी कई दिन लग सकता है. बाजार सामान्य होने पर ही खरीद शुरू की जायेगी. यही हाल सब्जी एवं फल बाजार का भी है. कमोबेस दर्द हर जगह दिखता है. छोटे व्यवसायी काफी परेशान महसूस कर रहे हैं.
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