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अतिगंभीर कुपोषित बच्चों को मुहैया कराया जायेगा इलाज

By Prabhat Khabar Print Desk
Updated Date

लखीसराय : जिले में एक से 30 सितंबर तक पोषण अभियान अंतर्गत पोषण माह का आयोजन होगा. इस संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश के साथ राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने जिलाधिकारी व सिविल सर्जन को इस दौरान होने वाली गतिविधियों की सूची भेजी है. पत्र के माध्यम से भेजे गये निर्देश में कहा गया है कि कुपोषण की दर में सुधार लाने के लिए भारत सरकार द्वारा पोषण प्राइम मिनिस्टर ओवरआर्किंग स्कीम फॉर हॉलिस्टिक नॉरिशमेंट कार्यक्रम प्रारंभ किया गया है. इसके तहत अतिगंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान, रेफरल एवं प्रबंधन, स्तनपान को बढ़ावा, गृह आधारित नवजात की देखभाल, सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, राष्ट्रीय कृमिमुक्ति कार्यक्रम, विटामिन ए खुराक अभियान, आइएफए अनुपूरण, टीकाकारण व ग्रामीण स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस के आयोजनों को क्रियान्वित किया जाना है.

गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जायेगा

कोविड 19 को देखते हुए सुरक्षा के नियमों के साथ सभी पोषण पुर्नवास केंद्र क्रियाशील रहेंगे और कोविड 19 प्रोटेक्शन प्रोटोकॉल का पालन करते हुए अतिगंभीर कुपोषित बच्चों का गुणवत्तापूर्ण उपचार सुनिश्चित किया जाना है. उपचार के बाद डिस्चार्ज बच्चों को फोन के का माध्यम से फॉलोअप भी करना है. साथ ही स्वास्थ्य कर्मी व आशा संस्थानों व समुदाय स्तर पर सभी नवजातों को जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाना सुनिश्चित करेंगे. प्रसव पूर्व जांच व टीकाकरण के लिए आयीं गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को स्तनपान व पोषण संबंधी परामर्श देना है. धात्री महिलाओं से शिशु के दो साल तक नियमित स्तनपान व छह माह के बाद अनूपूरक आहार के लाभ पर चर्चा करना है.शिशु एवं माता की जांच तथा पोषण संबंधी सलाह दी जायेगी इसके साथ ही पोषण माह के दौरान आशा द्वारा गृह आधारित नवजात की देखभाल कार्यक्रम के तहत अपने संबंधित क्षेत्र में नवजात के घर का भ्रमण कर शिशु एवं माता की जांच तथा पोषण संबंधी सलाह दिया जायेगा.

चलेगा अभियान, गतिविधियों की सूचना रहेगा उपलब्ध

जिलाधिकारी एवं सिविल सर्जन को भेजे गये पत्र में बताया गया है कि 16 सितंबर से 29 सितंबर तक सघन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति कार्यक्रम व विटामिन ए खुराक अभियान चलाया जायेगा. आशा लाभार्थियों की सूची तैयार कर उन्हें आवश्यक खुराक देंगी. 6 से 59 माह तथा 5 से 10 वर्ष के बच्चों, किशोर, किशोरियों तथा गर्भवती महिलाओं में एनीमिया के रोकथाम के लिए आइएफए सिरप, आइएफए की गुलाबी, नीली व लाल गोली की उपलब्धता लाभार्थी तक सुनिश्चित कराना है. सत्र स्थलों पर शत प्रतिशत प्रतिरक्षण सुनिश्चित किया जाना है. नियमित टीकाकरण के साथ आशा, आंगनबाड़ी सेविका, एएनएम, स्वयं सहायता समूह, महिला मंडल, पंचायती राज के प्रतिनिधि कुपोषण, एनीमिया, स्वच्छता आदि पर चर्चा करेंगे. इन सभी गतिविधियों की सूचना पोषण अभियान डैशबोर्ड पर उपलब्ध कराना है.

आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता तैयार करेंगी कुपोषित बच्चों की सूची

सामान्य बच्चों की तुलना में अति गंभीर कुपोषित बच्चों में 9 से 11 गुणा मृत्यु का खतरा अधिक होता है तथा पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की होने वाली मृत्यु का 45 प्रतिशत अति गंभीर कुपोषण के कारण होता है. पोषण माह 2020 के अंतर्गत अति गंभीर कुपोषित बच्चों की पहचान करनी है. आशा व आंगनबाड़ी कार्यकर्ता उम्र की तुलना में बहुत कम वजन वाले बच्चों की सूची तैयार करेंगी. बेहतर इलाज के लिए स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र रेफर किया जायेगा.

लक्षणों की पहचान के साथ खुराक और परामर्श भी दी जायेगी

लगातार उल्टी व दस्त होना, दोनों पैरों में सूजन, सांस का तेज चलना, सुस्त दिखाई देने वाले, स्तनपान न करने वाले या भूख की कमी, छाती का धंसना, मिर्गी या चमकी आना, तेज बुखार, शरीर ठंडा पड़ना, खून की कमी, त्वचा पर घाव एवं ऊपरी बांह की गोलाई 11.5 सेंटीमीटर से कम आदि लक्षणों की जांच कर इन बच्चों को स्वास्थ्य केंद्र या पोषण पुर्नवास केंद्र रेफर करना है. अतिगंभीर कुपोषण के शिकार बच्चों के अभिभावकों को नियमित आयरन और फॉलिक एसिड की गोली, छह माही विटामिन ए सीरप एवं अल्बेंडाजोल टैबलेट की खुराक पर परामर्श भी देना है.

posted by ashish jha

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