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पौधरोपण करना गर्व की बात: जिला जज

Updated at : 27 Sep 2024 8:32 PM (IST)
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पौधरोपण करना गर्व की बात: जिला जज

पौधरोपण करना गर्व की बात: जिला जज

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विश्व पर्यटन दिवस पर न्यायालय परिसर में किया गया पौधरोपण

फोटो संख्या 15- पौधरोपण करते न्यायाधीश

प्रतिनिधि, लखीसराय. विश्व पर्यटन दिवस के शुभ अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा द्वारा व्यवहार न्यायालय परिसर में पौधारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया. पौधारोपण कार्यक्रम में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम शुभ नंदन झा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश तृतीय राजीव कुमार मिश्रा, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश पंचम संदीप कुमार, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश षष्ठ श्वेता शाही, अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सप्तम दिव्य प्रकाश, मुख्य एक दंडाधिकारी आशीष कुमार अग्निहोत्री, जिला विधिक सेवा प्राधिकार सचिव राजू कुमार, अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शिप्रा कुमारी, न्यायिक दंडाधिकारी द्वितीय श्रेणी आकांक्षा कुमारी सहित कई लोगों ने व्यवहार न्यायालय परिसर में पौधारोपण किया. इस अवसर पर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा ने कहा कि विश्व पर्यटन दिवस के शुभ अवसर पर पौधारोपण करना अत्यंत ही गर्व की बात है, वृक्ष मानव के लिए अति आवश्यक हैं. वृक्ष वातावरण को शुद्ध करके हमें आक्सीजन प्रदान करते हैं, प्रकृति से हम वृक्ष के माध्यम से तरह-तरह के मीठे फल प्राप्त करते हैं. वृक्ष परोपकार का काम करते हैं, हमें भी वृक्ष से सीखना चाहिए. मौके पर प्राधिकार के रिटेनर अधिवक्ता सितेश सुधांशु समेत कई व्यक्ति उपस्थित थे.

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वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र विषय पर विधिक जागरूकता शिविर

फोटो संख्या 14- शिविर में रिटेनर अधिवक्ता सीतेश सुधांशु व अन्य.

प्रतिनिधि, लखीसराय

विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष जिला एवं सत्र न्यायाधीश अजय कुमार शर्मा, प्राधिकार के सचिव राजू कुमार के निर्देशानुसार इंद्रधनेश्वर महादेव मंदिर अशोक धाम परिसर में वैकल्पिक विवाद समाधान तंत्र विषय पर विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया. जिसकी अध्यक्षता मंदिर कमेटी के प्रबंधक सदस्य अनिल कुमार सिंह एवं संचालन पारा विधिक स्वयंसेवक बबलू प्रसाद ने की. मुख्य वक्ता प्राधिकार के रिटेनर अधिवक्ता सितेश सुधांशु ने कहा कि एडीआर विवाद समाधान की वैकल्पिक प्रक्रिया है, जिसमें न्यायालय की प्रक्रियाओं में उलझे बिना सहमत पक्ष में सुलह करायी जाती है. इसमें केवल दीवानी मामले ही सुलझाया जाते हैं और ऐसा निर्णय दिया जाता है जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य होता है. जिससे आपसी दुश्मनी जन्म नहीं लेती है. सुधांशु ने कहा कि एडीआर पांच प्रकार के होते हैं जिसमें पंचायत, मध्यस्थता, सुलह, लोक अदालत एवं ग्राम पंचायत प्रमुख हैं. संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 32 में लोगों को न्याय दिलाने की बात की जाती है अर्थात न्याय लोगों का नैसर्गिक अधिकार है तथा डीएसपीएस का अनुच्छेद 39 ए सामान्य न्याय व निशुल्क विधिक सहायता की बात कहती है. शिविर में इंद्रधनेश्वर महादेव के खोजकर्ता अशोक बाबा, राकेश कुमार, तीरथ कुमार, विकास कुमार, चंद्रमलेश्वर पांडेय, द्रौपदी देवी, रूपाली कुमारी, पलक राज समेत कई व्यक्ति उपस्थित थे.

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