नीट-यूजी में फर्जीवाड़ा बेनकाब, 30 गिरफ्तार, बायोमेट्रिक संचालक निकला सॉल्वर गैंग का मास्टरमाइंड
गिरफ्तार मयंक कश्यप, मुख्य सेटर
NEET UG Scam: लखीसराय में आयोजित नीट-यूजी परीक्षा में पकड़े गए फर्जी परीक्षार्थियों के मामले ने तूल पकड़ लिया है. नौ मुन्ना भाइयों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस और प्रशासन की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. सूत्रों के अनुसार अब तक दो दर्जन से अधिक लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है, जिनमें बायोमीट्रिक प्रक्रिया से जुड़े कई कर्मी भी शामिल बताए जा रहे हैं. इस मामले ने परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
लखीसराय से प्रभात खबर की टीम
NEET UG Scam: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी में लखीसराय से सामने आया फर्जीवाड़ा अब बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रहा है. नौ मुन्ना भाइयों की गिरफ्तारी के बाद जांच की परतें खुल रही हैं और पुलिस सॉल्वर गैंग के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश में जुटी है.
ऐसे खुले पूरा खेल का राज
एसडीओ प्रभाकर कुमार बताया कि परीक्षा शुरू होने से पहले एसपी प्रेरणा कुमार को सूचना मिली थी कि कुछ फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हो सकते हैं. इसके बाद एसडीओ और एसडीपीओ शिवम कुमार के नेतृत्व में विशेष जांच दल का गठन किया गया. सभी परीक्षा केंद्रों पर सघन जांच शुरू हुई, जिसके दौरान केंद्रीय विद्यालय केंद्र से सात फर्जी परीक्षार्थी पकड़े गए. हसनपुर हाईस्कूल में एक अभ्यर्थी का बायोमेट्रिक सत्यापन विफल होने पर पूछताछ की गई, जिससे पूरे नेटवर्क का खुलासा शुरू हुआ.
बायोमेट्रिक संचालक ही निकला मास्टरमाइंड
जांच में सामने आया कि हाजीपुर के पासवान चौक निवासी मयंक कश्यप इस नेटवर्क का मुख्य संचालक था. वह पीएमसीएच पटना का तृतीय वर्ष का छात्र बताया जा रहा है. आरोप है कि उसने बायोमेट्रिक जांच से जुड़ी एजेंसी के कर्मचारियों के साथ मिलकर खुद को बायोमेट्रिक ऑपरेटर के रूप में परीक्षा केंद्र में तैनात करा लिया. इसके बाद फर्जी परीक्षार्थियों को बिना बायोमेट्रिक सत्यापन के परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिलाया गया.
30 गिरफ्तार, जांच का दायरा बढ़ा
अब तक गिरफ्तार 30 लोगों में 14 बायोमेट्रिक सिस्टम से जुड़े कर्मचारी बताए जा रहे हैं. इसके अलावा फर्जी परीक्षार्थी, मूल अभ्यर्थी और गिरोह से जुड़े अन्य लोगों को भी हिरासत में लिया गया है. पुलिस का मानना है कि इस नेटवर्क की जड़ें कई राज्यों तक फैली हो सकती हैं. शेष आरोपियों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है.
मेधावी छात्रों को बनाते थे सॉल्वर
गिरोह मेधावी छात्रों को पैसे का लालच देकर फर्जी परीक्षार्थी बनने के लिए तैयार करता था. बताया जा रहा है कि विभिन्न विश्वविद्यालयों और मेडिकल संस्थानों में पढ़ रहे प्रतिभाशाली छात्रों को टारगेट कर उन्हें दूसरे अभ्यर्थियों की जगह परीक्षा दिलाई जाती थी.
मुख्य सॉल्वर गैंग तक पहुंचने की कोशिश
एसपी प्रेरणा कुमार ने बताया कि अब तक 30 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है और मुख्य सॉल्वर गैंग तक पहुंचने के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है. प्रशासन का कहना है कि यह मामला प्रश्नपत्र लीक से जुड़ा नहीं है, बल्कि फर्जी परीक्षार्थियों के माध्यम से परीक्षा पास कराने की साजिश से संबंधित है. पूरे नेटवर्क का खुलासा होने तक जांच जारी रहेगी.
(खबर अपडेट की जा रही है)
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