जंगल-पहाड़ों के बीच विराजती हैं मां जलप्पा, संतान सुख की मन्नत लेकर पहुंचते हैं श्रद्धालु

Edited by Pintu Pranav
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मां जलप्पा स्थान मंदिर

Religious Tourism: लखीसराय जिले के चानन प्रखंड स्थित रामसीर गांव में अवस्थित मां जलप्पा स्थान आस्था, विश्वास और लोकमान्यताओं का प्रमुख केंद्र है. प्राकृतिक सौंदर्य से घिरे इस प्राचीन शक्तिपीठ में वर्षभर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है. विशेष रूप से संतान प्राप्ति की कामना लेकर आने वाली महिलाओं के बीच इस मंदिर की गहरी मान्यता है. मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है.

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सूर्यगढ़ा (लखीसराय) से राजेश कुमार गुप्ता की रिपोर्ट

Religious Tourism: घने जंगलों और पहाड़ियों के बीच स्थित एक ऐसा शक्तिपीठ, जहां महिलाओं के आंचल से जुड़ी आस्था सदियों से जीवित है. मान्यता है कि मां जलप्पा के दरबार में संतान सुख की कामना लेकर पहुंचने वाले भक्त खाली हाथ नहीं लौटते.

स्वप्न में मिले संकेत के बाद हुई थी प्रतिमा की स्थापना

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार कई सौ वर्ष पूर्व एक ग्रामीण को देवी ने स्वप्न में दर्शन देकर अपनी उपस्थिति का संकेत दिया था. इसके बाद झाड़ियों में दबे देवी विग्रह को निकालकर यहां स्थापित किया गया. तब से यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में शामिल हो गया. मंदिर में काले पत्थर से निर्मित करीब चार फीट ऊंची मां जलप्पा की प्रतिमा स्थापित है. परिसर में भगवान शिव और भगवान हनुमान की प्रतिमाएं भी विराजमान हैं.

आंचल चढ़ाकर मांगी जाती है संतान सुख की मन्नत

मां जलप्पा स्थान की सबसे बड़ी विशेषता संतान प्राप्ति से जुड़ी आस्था है. मान्यता है कि जिन महिलाओं को संतान नहीं होती या बच्चे जीवित नहीं रह पाते, वे यहां आकर मां से मन्नत मांगती हैं. श्रद्धालु महिलाएं अपने आंचल का एक हिस्सा फाड़कर देवी को अर्पित करती हैं. मन्नत पूरी होने पर बच्चे का मुंडन संस्कार और विशेष पूजा-अर्चना कराई जाती है.

मंगलवार और शनिवार को लगता है आस्था का मेला

मंदिर में प्रतिदिन पूजा-अर्चना होती है, लेकिन मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़ उमड़ती है. पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या के अवसर पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. ढोल-नगाड़ों और भक्ति गीतों के बीच मुंडन संस्कार सहित कई धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाते हैं.

विवाह और धार्मिक आयोजनों का भी प्रमुख केंद्र

स्थानीय लोगों के अनुसार शादी-विवाह के मौसम में मंदिर परिसर में कई वैवाहिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं. धार्मिक महत्व और प्राकृतिक वातावरण के कारण यह स्थल लोगों की पहली पसंद बनता जा रहा है.

पर्यटन स्थल बनने की अपार संभावनाएं

जिला मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर स्थित यह धार्मिक स्थल पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है. जंगलों और पहाड़ियों से घिरे इस स्थान में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं. बावजूद इसके अब तक इसे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित नहीं किया जा सका है. स्थानीय लोग वर्षों से इसके विकास की मांग कर रहे हैं.

सुबह पांच बजे खुलता है मंदिर का पट

मुख्य पुजारी के सहयोगियों राकेश शुक्ला, रोशन शुक्ला और दिनकर कुमार ने बताया कि मंदिर का पट प्रतिदिन सुबह पांच बजे खुलता है और शाम साढ़े छह बजे तक श्रद्धालुओं के लिए खुला रहता है. कार्तिक माह में यहां विशेष धार्मिक आयोजन होते हैं, जिनमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं.

हाल ही में हुआ मुख्य पुजारी का निधन

मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित गोपाल शुक्ला का 12 जून 2026 को निधन हो गया था. वे लंबे समय से अस्वस्थ थे और पटना में उनका इलाज चल रहा था. उनके निधन से क्षेत्र के श्रद्धालुओं में शोक की लहर दौड़ गई थी.

जानिए मां जलप्पा स्थान की प्रमुख विशेषताएं

  • रामसीर गांव में स्थित प्राचीन शक्तिपीठ
  • काले पत्थर की चार फीट ऊंची प्रतिमा
  • संतान प्राप्ति की मन्नत के लिए प्रसिद्ध
  • मंगलवार और शनिवार को विशेष भीड़
  • पूर्णिमा, पंचमी और अमावस्या पर विशेष पूजा
  • मुंडन संस्कार और विवाह आयोजन का प्रमुख केंद्र
  • जंगल और पहाड़ियों के बीच स्थित रमणीय स्थल
  • धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं

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