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जन सहयोग से किऊल नदी पर फिर बन रहा जुगाड़ पुल

Updated at : 19 Oct 2024 8:30 PM (IST)
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जन सहयोग से किऊल नदी पर फिर बन रहा जुगाड़ पुल

किऊल व लखीसराय स्टेशन के बीच आम लोगों के आवागमन के लिए किऊल नदी पर पुल नहीं रहने से हर साल लाखों लोगों को काफी परेशानी होती रही है.

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लखीसराय. किऊल व लखीसराय स्टेशन के बीच आम लोगों के आवागमन के लिए किऊल नदी पर पुल नहीं रहने से हर साल लाखों लोगों को काफी परेशानी होती रही है. बरसात के बाद अक्तूबर माह में नदी में पानी घटते ही जुगाड़ पुल का निर्माण कर लिया जाता है. लोगों का कहना है कि सरकार नदी पर पुल नहीं बनाती है तो वो खुद जनसहयोग से बना लेते हैं. केंद्र सरकार में यहां से दो कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा यहां से लगातार तीसरी बार जीत चुके हैं. पिछले साल की भांति इस साल भी किऊल नदी में पानी घटते ही शनिवार को आम लोगों ने फिर जन सहयोग से जुगाड़ पुल निर्माण कार्य शुरू कर दिया है. लखीसराय के डीएम मिथिलेश मिश्र ने किऊल रेल पुल स्थित जुगाड़ पुल कार्य स्थल पर पहुंच कर निर्माण कार्य करवा रहे किऊल के आरपीएफ इंसपेक्टर अरविंद कुमार सिंह, किऊल जीआरपी के थानाध्यक्ष मोहम्मद नसीम अहमद, खगौर पंचायत के मुखिया पति प्रतिनिधि पूर्व मुखिया मोहम्मद इरफान, जिप उपाध्यक्ष प्रतिनिधि मदन मंडल, समाजसेवी नवल मंडल, महेश यादव, श्रवण मंडल, वाल्मीकि मंडल, सुरेश यादव, रवींद्र कुमार, शैलेंद्र यादव उर्फ गब्बर सिंह, चानन प्रखंड के पूर्व प्रमुख प्रतिनिधि नृपेंद्र कुमार सहित अन्य लोगों का हौसला बढ़ाया. साथ ही तन, मन धन से भरपूर सहयोग देने का आश्वासन दिया. डीएम ने लखीसराय नगर परिषद के चेयरमेन अरविंद पासवान एवं ईओ अमित कुमार को मजदूर सहित जेसीबी उपलब्ध करने को कहा. जुगाड़ पुल निर्माण कार्य में फिलहाल दो जेसीबी, दो ट्रैक्टर व दर्जनों मजदूर लगे हुए हैं.

आठ माह ही काम आता है जुगाड़ पुल, फिर बह जाता है

हर साल जन सहयोग से बने जुगाड़ पुल की लाइफ आठ माह की ही रहती है. हर साल 15 जून से 15 अक्टूबर तक किऊल नदी में पानी आ जाने से जन सहयोग से बना पुल ध्वस्त होता है. नदी में तेज बहाव से पुल के टूटते ही किऊल एवं लखीसराय के बीच 500 मीटर लंबा रेल पुल को पैदल पार कर पाना लोगों के लिए हिमालय की चोटी चढ़ने जैसा कठिन हो जाता है.

अनाधिकृत रेल पुल पर दर्जनों लोगों की होती है हर साल मौत

रेल पुल पर किऊल से लखीसराय बाजार आने और वापस जाने वाले लोगों को हर दिन कठिन परिश्रम करना पड़ता है. जल्दी पहुंचने के फेर में लोग रेल पटरियों का सहारा ले लेते हैं. इसी दरम्यान पटरी पर ट्रेन आ जाने से अकबकाहट में लोग खुद पुल से कूद जाते हैं अथवा ट्रेन की चपेट में आ कर मौत के मुंह चल जाता है. रेलवे सूत्रों के मुताबिक इस साल इन चार महीने में 14 लोगों की मौत हो चुकी है, इनमें पुरुष,महिला व बच्चे भी हैं.

दो केंद्रीय मंत्री व डिप्टी सीएम भी नहीं बना सके पुल

लखीसराय एवं किऊल मुंगेर लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है. सूर्यगढ़ा एवं लखीसराय विधानसभा मुंगेर क्षेत्र का मुख्य केंद्र बिंदु है. यहां से जदयू सांसद राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह केंद्र की मोदी सरकार में कैबिनेट मंत्री हैं, जबकि लखीसराय के बड़हिया नगर क्षेत्र वासी व बीजेपी के फायरब्रांड नेता गिरिराज सिंह भारत सरकार में पिछले 11 साल से लगातार कैबिनेट मंत्री पद पर हैं. दूसरी ओर लखीसराय के बीजेपी विधायक सह सूबे के डिप्टी सीएम विजय कुमार सिन्हा पिछले 15 साल से क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. उन्हें श्रम संसाधन मंत्री एवं बिहार विधानसभा में अध्यक्ष पद पर बैठने का भी सौभाग्य प्राप्त है. इतने पावरफुल हस्ती भी किऊल नदी पर एक अदद आरसीसी पुल निर्माण नहीं कर सके.

डिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है

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