परेशानी. विद्यालय नहीं करते निर्देशों का पालन बैग के बोझ से दबे जा रहे बच्चे
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :06 Apr 2016 5:59 AM (IST)
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स्कूल बैग का बढ़ता बोझ बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. भारी स्कूल बैग को लेकर हर शिक्षण सत्र के पहले सीबीएसइ और आइसीएसइ पैटर्न स्कूलों को निर्देश दिये जाते हैं. उन्हें जानकारी दी जाती है कि स्कूली बैग का वजन कितना हो, लेकिन अधिकांश स्कूलों के द्वारा इन नियमों की अनदेखी […]
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स्कूल बैग का बढ़ता बोझ बच्चों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ है. भारी स्कूल बैग को लेकर हर शिक्षण सत्र के पहले सीबीएसइ और आइसीएसइ पैटर्न स्कूलों को निर्देश दिये जाते हैं. उन्हें जानकारी दी जाती है कि स्कूली बैग का वजन कितना हो, लेकिन अधिकांश स्कूलों के द्वारा इन नियमों की अनदेखी की जाती है.
लखीसराय : छोटी कक्षाओं में भी सात से आठ किताबें चलायी जाती है. इस पर उतने ही नोटबुक,1 लंच बॉक्स या टिफिन, वाटर बोतल, इंस्ट्रूमेंट बॉक्स आदि से स्कूली बैग का वजन काफी बढ़ जाता है. ऊंची कक्षाओं में किताब, नोटबुक आदि की संख्या बढ़ने के साथ स्कूल बैग का वजन और अधिक बढ़ जाता है.
बोर्ड की ओर से जारी निर्देश
पहला निर्देश: यह निर्देश वर्ष 2004 में दिया गया था. इसमें नर्सरी से कक्षा दो तक के बच्चों को किसी भी तरह के स्कूल बैग के साथ स्कूल आने पर पाबंदी थी. बच्चों की पढ़ाई से संबंधित सारी चीजें स्कूल के पास ही रखी जानी थी. इस निर्देश में हर बच्चे को स्कूल में लॉकर की सुविधा दी जानी थी.
दूसरा निर्देश: इस निर्देश के तहत स्कूलों में कक्षा एक से 8वीं कक्षा तक कम से कम किताब चलाने को कहा गया था. जो किताबें बेहद जरूरी हो, उन्हीं किताबों को वर्ग एक से 8 तक के छात्रों के कोर्स में शामिल किया जाना था.
तीसरा निर्देश: इसके तहत स्कूल बैग के अंदर वाटर बोतल और टिफिन नहीं रखा जाना है, ताकि स्कूल बैग का वजन नियंत्रित रही.
बच्चों का खेल-खेल में हो मानसिक विकास
विमल वर्मा ने कहा कि बच्चों का खेल-खेल में मानसिक विकास किया जाना चाहिए. उन पर किताब का अधिक बोझ डालने से बच्चे पढ़ाई में कम ध्यान देकर खेल की ओर ज्यादा आकर्षित होते हैं.
प्रभाकर सिंह ने कहा कि बच्चों को कम से कम किताब का बोझ डाल कर पढ़ाई के प्रति उन्हें अधिक सजग करने की आवश्यकता है. पुस्तकों के नियंत्रित बोझ से बच्चों का सभी क्षेत्रों में विकास होगा.
चंद्र प्रकाश ने कहा कि सरकार द्वारा भी बच्चों को खेल के माध्यम से ही पढ़ाये जाने की बात कही जाती है. इसके बावजूद निर्धारित मापदंडों की अनदेखी से परेशानी बनी हुई है.
आशीष कुमार ने कहा कि बच्चों पर किताब का बोझ नहीं डाल कर उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देने की जरूरत है. इससे बच्चों की पढ़ाई के साथ उनका बौद्धिक विकास भी हो सकेगा. सरकार द्वारा स्कूलों में टेक्स्ट बुक की जगह अभ्यास पुस्तिका से पढ़ाई कराने की पहल होनी चाहिये.
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