जिले का एकमात्र अंगीभूत कॉलेज सुविधाओं का मोहताज
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :01 Feb 2016 5:06 AM (IST)
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लखीसराय : उच्च शिक्षा देनेवाला शहर का एकमात्र अंगीभूत केएसएस कॉलेज वर्षों से मूलभूत समस्या से जूझ रहा है. इसके प्रति लखीसराय के जनप्रतिनिधि, शिक्षाप्रेमी व समाजसेवी के संवेदनशील नहीं रहने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है. 1996 में स्थापना इस कॉलेज की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी. मंजूरी वर्ष 1967 […]
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लखीसराय : उच्च शिक्षा देनेवाला शहर का एकमात्र अंगीभूत केएसएस कॉलेज वर्षों से मूलभूत समस्या से जूझ रहा है. इसके प्रति लखीसराय के जनप्रतिनिधि, शिक्षाप्रेमी व समाजसेवी के संवेदनशील नहीं रहने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच गहरा आक्रोश व्याप्त है.
1996 में स्थापना
इस कॉलेज की स्थापना वर्ष 1966 में हुई थी. मंजूरी वर्ष 1967 में दी गयी. सरकारी मान्यता 18 दिसंबर 1980 को मिली. इस कॉलेज परिसर में एक हिस्सा में जिला कांग्रेस कमेटी का कार्यालय संचालित होता है. जब बड़े-बड़े कांग्रेस पार्टी का आयोजन होता है तो छात्रों के स्थान पर कांग्रेस के नेता व कार्यकर्ता दिखाई देते हैं.
नामांकन की स्थिति
इस महाविद्यालय में आइए, आइएससी, बीए, बीएससी के छात्र-छात्राओं की संख्या लगभग 35 सौ है. इस कॉलेज में सृजित पद के विरुद्ध शिक्षक व शिक्षकेत्तर कर्मियों का घोर अभाव है. तीन विषय उर्दू, दर्शन शास्त्र व मनोविज्ञान में एक भी शिक्षक नहीं हैं. जबकि तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर द्वारा सभी विषयों में ऑनर्स की पढ़ाई की मंजूरी दे दी गयी है.
कॉमन रूम की स्थिति
इस महाविद्यालय में छात्राओं के लिए तो एक छोटा सा कॉमन रूम हैं लेकिन छात्र के लिए कॉमन रूम नहीं है. वहीं कॉलेज परिसर की बाहरी दीवार भी आधी-अधूरी है. जिससे छात्र-छात्रा खुद काे असुरक्षित महसूस करते हैं.
क्रीड़ा मैदान का अभाव
कॉलेज में क्रीड़ा मैदान नहीं होने से यहां अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के खेल कौशल का विकास नहीं हो पा रहा है.
राशि का उपयोग
यूजीसी द्वारा प्रत्येक वर्ष कॉलेज के विकास के लिए राशि उपलब्ध करायी जाती है लेकिन जमीन के अभाव में राशि का उपयोग नहीं हो पा रहा है. इससे कॉलेज का इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हो पा रहा है.
क्या कहते हैं छात्र-छात्रा
छात्रों के मुताबिक प्राइवेट महाविद्यालय में इंफ्रास्ट्रक्चर पर्याप्त रहता है. लेकिन कॉलेज अंगीभूत होने के बावजूद भी इंफ्रास्ट्रक्चर का घोर अभाव है. इन लोगों ने बताया कि इस कॉलेज में न तो खेल का मैदान है, न चहारदीवारी है, न पर्याप्त मात्रा में कमरा है और न ही विशेषज्ञ शिक्षक ही हैं. उन्होंने बताया कि इस कॉलेज में लगभग 35 सौ विद्यार्थी अध्ययनरत है. इस कमी से बाध्य होकर यहां नामांकित विद्यार्थी परीक्षा पास करने व विषय का ज्ञान प्राप्त करने के लिए कोचिंग का सहारा लेते हैं.
कहते हैं प्रभारी प्राचार्य
इस संबंध में प्रभारी प्राचार्य कौशल किशोर ने बताया कि उन्होंने प्रभार ग्रहण करते ही इन समस्याओं से विश्वविद्यालय के कुलपति को अवगत करा दिया है, ताकि छात्र-छात्राओं की इन समस्याओं का समानधान हो सके व छात्रों को इन समस्याओं से जूझना न पड़े.
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