26 हजार मानदेय व सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

Published at :03 May 2026 7:09 PM (IST)
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26 हजार मानदेय व सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

26 हजार मानदेय व सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग

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मई दिवस के अवसर पर रसोइयों की बैठक में केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ उठी आवाज

लखीसराय. बिहार राज्य मिड डे मील वर्कर्स यूनियन लखीसराय शाखा के तत्वावधान में जिले के रसोइया की एक बैठक रविवार को नया बाजार स्थित सम्राट अशोक भवन में संपन्न हुई. इसकी अध्यक्षता संगठन के राज्य कमेटी सदस्य सह जिला सचिव रंजीत कुमार अजीत ने की. इसमें सैकड़ों की संख्या रसोइया ने अपनी उपस्थिति में दर्ज करायी. बैठक के शुरुआत में मई दिवस के अवसर पर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की गयी. मौके पर जिला सचिव ने कहा कि 1886 में शिकागो शहर में आठ घंटे काम न्यूनतम मजदूरी व मजदूरों के अधिकार के लिए जन क्रांति पूरे दुनिया में यादगार है. भारत के संविधान में सभी को अपने हक अधिकार की लड़ाई संगठन बनाकर लड़ने का अधिकार है, लेकिन वर्तमान एनडीए की सरकार ने चार श्रम कोड लाकर मजदूरों के काम का समय 12 घंटा करने की मंशा लेकर आयी है. साथ ही अपने हिसाब से मजदूरी तय करने मनसा है. मोदी सरकार महिलाओं के सम्मान की बात करती है, लेकिन स्कीम वर्कर्स 80 से 90 प्रतिशत महिलाएं देश एवं राज्य के अंदर रसोइया, ममता, आशा, आंगनबाड़ी के रूप में काम कर रही है, जिसे आज भी न्यूनतम मजदूरी से कम मजदूरी मिल रही है. अगर असली सम्मान की बात सरकार करती है तो 26 हजार रुपये मानदेय प्रतिमाह करने की सरकार घोषणा करें. तभी समझेंगे कि सरकार महिलाओं को सम्मान देने की बात कर रही है. बिहार में नयी सरकार का गठन हुआ और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में विश्वास मत के दौरान कहा कि वे महिलाओं को सम्मान के लिए पीछे नहीं रहेंगे. संगठन मांग करती है कि 80 से 90 प्रतिशत महिलाएं विद्यालय में खाना बनाकर सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं को पूरा कर रही है. उसे 26 हजार रुपये मानदेय प्रतिमाह घोषित करें. वर्तमान में इस महत्वाकांक्षी योजना में काम कर रही महिलाओं को मात्र 33 सौ रुपये ही सरकार दे रही है. जिसमें भी साल के 10 महीना ही मिलता है. अगर सरकार की सही मायने में महिलाओं के प्रति सम्मान है तो न्यूनतम मजदूरी 26 हजार रुपये घोषित करें एवं सरकारी कर्मचारी की दर्जा देते हुए रसोइया को सभी कर्मचारियों के अनुसार लाभ दिया जाय. रसोईया के रिटायरमेंट के उपरांत उसके परिवार को प्राथमिकता के तौर पर बहाल किया जाय. इन सभी समस्याओं एवं सवालों को लेकर बिहार मिड डे मील वर्कर्स यूनियन लखीसराय सभी स्कीम वर्क्स को साथ लेकर संघर्ष को तेज करने का निर्णय लिया गया. मौके पर संगठन की जिलाध्यक्ष बबीता देवी, संयुक्त सचिव रेखा देवी, रीना देवी, नेता देवी, संरक्षक दिनकर कुमार, मनोज कुमार मेहता, अनुज कुमार, उषा देवी, महेश मांझी ने भी अपने विचारों को रखने का काम किया.

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Rajeev Murarai Sinha Sinha

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By Rajeev Murarai Sinha Sinha

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