हर माह 1.5 करोड़ का कश लगाते हैं जिलेवासी

Published at :14 Jan 2016 6:41 PM (IST)
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हर माह 1.5 करोड़ का कश लगाते हैं जिलेवासी

हर माह 1.5 करोड़ का कश लगाते हैं जिलेवासी वर्ष 2014 में जिले में 666 वर्ष 2015 में 617 टीबी मरीजों का हुआ इलाज25 फीसदी मरीज ध्रुमपान की वजह से होते हैं टीबी का शिकार प्रति माह सिगरेट पर 230 रुपये व बीड़ी पर 40 रुपये खर्च करते हैं ध्रमपान के आदि लोग प्रतिनिधि, लखीसरायजिले […]

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हर माह 1.5 करोड़ का कश लगाते हैं जिलेवासी वर्ष 2014 में जिले में 666 वर्ष 2015 में 617 टीबी मरीजों का हुआ इलाज25 फीसदी मरीज ध्रुमपान की वजह से होते हैं टीबी का शिकार प्रति माह सिगरेट पर 230 रुपये व बीड़ी पर 40 रुपये खर्च करते हैं ध्रमपान के आदि लोग प्रतिनिधि, लखीसरायजिले की बड़ी आबादी प्रतिदिन लगभग पांच लाख रुपये सिगरेट बीड़ी पीने में खर्च कर जहर पी रहे हैं. एक अनुमान के मुताबिक जिले में करीब एक हजार दुकानों में सिगरेट बीड़ी बेचा जाता है. एक दुकान में अमुमन प्रतिदिन पांच सौ रुपये के सिगरेट व बीड़ी की बिक्री होती है. इस हिसाब से देखा जाय तो हर माह डेढ़ करोड़ रुपये जिले के लोग सिगरेट बीड़ी पीने में उड़ा देते देते हैं. सिगरेट पीनेवालों में 60 प्रतिशत लोग युवा वर्ग के होते हैं. सिगरेट व बीड़ी का चलन युवाओं के अलावे कम उम्र के किशोर में तेजी से फैल रहा है. लगातार सिगरेट सेवन करने से सरकारी व प्राइवेट अस्पतालों में सांस की बीमारी से पीड़ित की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है. आंकड़े पर गौर करें तो जिले में वर्ष 2013 में प्रतिदिन औसतन 20 से 21 टीबी मरीजों की जांच की गयी. वर्ष 2015 में जिले में कुल 617 टीबी मरीजों का इलाज किया गया. क्या कहते हैं यक्ष्मा पर्यवेक्षकसूर्यगढ़ा टीयू के यक्ष्मा पर्यवेक्षक कमल नयन पांडेय के मुताबिक यक्ष्मा रोग से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए प्रत्येक पांच लाख की आबादी पर एक टीयू व एक लाख की आबादी पर डीएमसी है. जिले में सूर्यगढ़ा व लखीसराय सहित दो टीयू है. सूर्यगढ़ा टीयू के अंतर्गत सूर्यगढ़ा के अलावे बड़हिया का इलाका आता है. सूर्यगढ़ा टीयू में वर्ष 2011 में 282, वर्ष 2012 में 260, वर्ष 2013 में 230, वर्ष 2014 में 217, वर्ष 2015 में 228 मरीजों का इलाज किया गया है. वहीं लखीसराय टीयू का कार्य देख रहे राम अवधेश प्रसाद के मुताबिक यहां वर्ष 2013 में लगभग 414 यक्ष्मा मरीजों का इलाज किया गया. जबकि वर्ष 2014 में 449 व वर्ष 2015 में 389 मरीजों का यक्ष्मा का इलाज किया गया. इनमें से 25 फीसदी मरीज धूम्रपान की वजह से खांसी व टीबी के शिकार हैं. ऐसे मरीज खांसी होने के बाद भी चिकित्सक के पास नहीं जाते. जब उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है तभी वे इलाज के लिए चिकित्सक के पास जातेे हैं. सार्वजनिक स्थलों पर प्रतिबंधित है धूम्रपानसरकार ने धूम्रपान के नियंत्रण के लिए कई कदम उठाये हैं. सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर प्रतिबंध लगाया गया है. किशोर में धूम्रपान के चलन को रोकने के लिये विद्यालय के एक सौ गज की दूरी में सिगरेट की बिक्री पर प्रतिबंध है. इसके उल्लंघन पर जुर्माना का भी प्रावधान है. लेकिन मामूली जुर्माना में दुकानदारों में भय पैदा नहीं कर रही है. कोटपा द्वारा भी इसका कड़ाई से अनुपालन नहीं किया जा रहा है. हालांकि बीते माह दिसंबर 2015 में तंबाकू रहित क्षेत्र में लखीसराय जिला को राज्य में दूसरा स्थान प्राप्त हुआ, लेकिन हकीकत कुछ अलग ही बयां करती है. क्या कहते हैं जिला कोटपा पदाधिकारीजिला कोटपा पदाधिकारी जितेंद्र कुमार लाल के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2015-16 में अब तक सेक्शन चार में 69 व सेक्शन 6ए में 49 दुकानदारों का चलान काटा गया. सिगरेट से होने वाले बीमारियों के बारे भी लोगों को आगाह किया जाता है. लेकिन शायद ही सिगरेट का सेवन करने वाले लोग इन वैधानिक चेतावनी पर ध्यान देते हैं. ग्रामीण इलाकों में लोग अधिकतर बीड़ी का सेवन करते हैं. लंबे समय तक इसके सेवन से लोग खांसी से ग्रसित हो जाते हैं. सिगरेट का सेवन करनेवाले मरीजों में सामान्य मरीजों से खांसी की आशंका दुगनी होती है. अनुमान के मुताबिक में हर माह सिगरेट पर लोग 230 रुपये व बीड़ी पर 40 रुपये से अधिक खर्च करते हैं. क्या कहते हैं चिकित्सकचिकित्सक डा सत्येंद्र कुमार के मुताबिक धूम्रपान से सबसे पहले गले में खरास व कफ की शिकायत होती है. कुछ दिनों बाद इसका असर समाप्त होने लगता है. गले की झिल्ली मोटी हो जाती है. मरीज का सांस फूलने लगती है. आगे चल कर इससे कैंसर की आशंका 50 प्रतिशत बढ़ जाती है. टीबी के लक्षण सीने में दर्द होना वजन घटना शाम में बुखार आना पसीना चलनासिगरेट से होने वाली बीमारियां टीबी, कैंसर, दमा, ब्रोंकाइटिस, पेट की गड़बड़ी, हर्ट की बीमारी आदि.

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