खावा-राजपुर पंचायत में विकास की तसवीर धुंधली

Published at :30 Nov 2015 6:44 PM (IST)
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खावा-राजपुर पंचायत में विकास की तसवीर धुंधली

खावा-राजपुर पंचायत में विकास की तसवीर धुंधली जल जमाव की समस्या से जूझ रहे हैं पंचायतवासीपंचायत फैक्टपंचायत – खावा राजपुरप्रखंड-सूर्यगढ़ा जनसंख्या-12401मतदाता- 6700 लगभगराजस्व गांव- खावा, झपानी व डीहगांव- खावा चंद्र टोला, खावा, झपानी, डीह पर व मकससपुर* स्थानीय मुखिया के गांव खावा चंद्र टोला सहित पंचायत में जल जमाव की समस्या* साढ़े चार वर्षो में […]

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खावा-राजपुर पंचायत में विकास की तसवीर धुंधली जल जमाव की समस्या से जूझ रहे हैं पंचायतवासीपंचायत फैक्टपंचायत – खावा राजपुरप्रखंड-सूर्यगढ़ा जनसंख्या-12401मतदाता- 6700 लगभगराजस्व गांव- खावा, झपानी व डीहगांव- खावा चंद्र टोला, खावा, झपानी, डीह पर व मकससपुर* स्थानीय मुखिया के गांव खावा चंद्र टोला सहित पंचायत में जल जमाव की समस्या* साढ़े चार वर्षो में नहीं हुआ एक भी नाला का निर्माण * पंचायत में साढ़े चार साल में हुआ न्यूनतम विकास * पंचायत की 70 प्रतिशत आबादी खुले में शौच के लिए मजबूर* रोजगार के अभाव में लोग करते हैं पलायन* कृषि प्रधान पंचायत में सिंचाई सुविधा का अभावफोटो- 01 , मुखिया सुनीला देवीफोटो- 02 , प्रमोद महतोफोटो-03 ,भीम महतोफोटो- 04 ,राम प्रसाद महतोफोटो- 05 , इंद्रदेव जीफोटो- 06 , सरस्वती देवीफोटो- 07 , अर्जुन रामफोटो- 08 , परमानंद शर्माफोटो-09, महेश कुमार शर्माफोटो -10 , रामानंद महतोफोटो- 11 , बबलू महतोफोटो- 12 , खावा चंद्रटोला में एन एच 80 से मुखिया जी के घर की ओर जाने वाली पीसीसी सड़क जर्जरफोटो- 13 ,खावा चंद्रटोला में समस्या की जानकारी देते लोगफोटो- 14, खावा गांव में अपनी बातें कहते लोग प्रतिनिधि, लखीसराय रोटी, कपड़ा और मकान लोगों की प्राथमिकता है. इनके बगैर विकास की कल्पना भी नहीं की जा सकती. किसी भी गांव, कस्बा या शहर का विकास वहां के लोगों के रहन-सहन के स्तर से पता चलता है. सूर्यगढ़ा प्रखंड मुख्यालय से लगभग आठ किलोमीटर दूर मुंगेर-सूर्यगढ़ा एनएच 80 पर बसे 12 हजार की जनसंख्या वाले खावा राजपुर पंचायत में साढ़े चार वर्षो में विकास की दर न्यूनतम रही है. अति पिछड़ा बाहुल्य आबादी वाले इस पंचायत में जल जमाव प्रमुख समस्या है, लेकिन साढ़े चार वर्ष में यहां एक भी नाला का निर्माण नहीं हुआ. रोजगार के अभाव में यहां के 50 प्रतिशत लोग बाहर मेहनत-मजदूरी करते हैं. 70 प्रतिशत आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है. सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन सही तरीके से होता, तो यहां के लोगों के जीवन स्तर में सुधार आ सकता था. पंचायत के लोगों का मुख्य पेशा कृषि है, लेकिन पंचायत में सिंचाई सुविधाओं का टोटा है. पंचायत में एक भी राजकीय नलकूप नहीं है. सिंचाई का अन्य कोई श्रोत नहीं है. बोरिंग से सिंचाई की सुविधा किसानों को नहीं मिल पा रही है. किसानों का कहना है सिंचाई के लिए न तो बोरिंग उपलब्ध है और न ही इसके लिए कोई सरकारी सहायता मिल पाती है. पंचायत के लोगों की कृषि योग्य भूमि मुंगेर जिला के दियारा में पड़ती है, इसलिए सरकारी योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल पाता है. पिछले पंचायत चुनाव के बाद पंचायत के लोगों ने विकास की जो उम्मीद पाल रखी थी. वह पूरा नहीं हो पाया. पंचायत की मुखिया सुनीला देवी के मुताबिक उपलब्ध संसाधनों से पंचायत का समुचित विकास किया गया. साढ़े चार वर्षों में लगभग 180 लोगों को इंदिरा आवास योजना का लाभ दिया गया. इसमें 2014-15 में 28 व 2015-16 में 41 लाभुक शामिल हैं. आठ सौ लोगों को विभिन्न पेंशन योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है. 381 नव विवाहिता को मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का लाभ देने की अनुशंसा की गयी है. 12 पीसीसी का निर्माण हुआ. दो सड़कों का ईंट खरंजाकरण कराया गया. इसके अलावे मनरेगा से 12 यूनिट पौधरोपण किया गया . उनके मुताबिक साढ़े चार वर्षों में नाला निर्माण की कोई योजना नहीं ली गयी. पंचायत में जल जमाव की समस्या है. खास कर खावा चंद्रटोला में एक ओर एनएच 80 व दूसरी ओर सुरक्षा तटबंध होने के वजह से जल की निकासी नहीं हो पा रही है.विकास तो हुआ, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नहीं साढ़े चार वर्षों में विकास को लेकर जब पंचायत के लोगों की राय ली गयी तो अधिकतर लोगों में असंतोष दिखा. कुछ के मुताबिक विकास तो हुआ, लेकिन उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाया. खावा चंद्रटोला गांव के प्रमोद महतो के मुताबिक गांव में विकास तो हुआ, लेकिन लोगों की उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं हो पाया. गांव में बना एक मात्र नाला टूट चुका है. जल जमाव की समस्या बनी हुई है. इसी गांव के भीम महतो के मुताबिक गांव में रोजगार का अभाव है. काम की तलाश में गांव के 50 प्रतिशत लोग बाहर पलायन कर जाते हैं. साढ़े चार वर्षों में योजनाओं के क्रियान्वयन से पंचायत में विकास तो दिखता है, लेकिन काम अभी और बांकी है. खावा चंद्र टोला के ही राम प्रसाद महतो ने कहा कि गांव की 70 प्रतिशत आबादी खुले में शौच जाने को मजबूर है. कई लोगों को एपीएल से बीपीएल व बीपीएल से एपीएल सूची में डाल दिया गया. गांव के अवकाश प्राप्त विद्युत अधीक्षण अभियंता इंद्र देव के मुताबिक लोगों की उम्मीदों के मुताबिक काम नहीं हो पाया. गांव में विकास तो दिखता है, लेकिन सभी परिवारों को अभी शौचालय उपलब्ध नहीं हो पाया है. जरूरतमंदों को इंदिरा आवास का लाभ नहीं मिल पा रहा है. खावा चंद्रटोला के सरस्वती देवी के मुताबिक मनरेगा के तहत जॉब कार्ड तो बना लेकिन काम करने के बाद भी मजदूरी नहीं मिल पायी. जॉब कार्ड भी ठेकेदार के पास रखा है. खावा गांव के अर्जुन राम ने कहा कि साढ़े चार वर्ष पूर्व गांव की जो तसवीर थी, उसमें विशेष बदलाव नहीं हुआ है. विकास के नाम पर एक ईंट खरंजाकरण सड़क का निर्माण हुआ. अधिकतर लोगों के घरों में शौचालय नहीं है. जल जमाव की समस्या से लोग परेशान हैं. इसी गांव के परमानंद शर्मा के मुताबिक बीपीएल कार्डधारी होने के बावजूद इंदिरा आवास नहीं मिला. मुखिया के द्वारा सिर्फ एक सड़क का निर्माण कराया गया. उन्हें वृद्धावस्था पेंशन तो मिलता है, लेकिन उनकी पत्नी को इसका लाभ नहीं मिल रहा. खावा गांव के ही महेश कुमार शर्मा ने कहा कि गांव में विकास हुआ है. पीसीसी सड़क का निर्माण किया गया. झपानी गांव के रामानंद महतो के मुताबिक साढ़े चार वर्षो में विकास के नाम पर गांव में विशेष कुछ नहीं हुआ. गांव की स्थिति पहले की तरह ही है. झपानी गांव के ही बबलू महतो के मुताबिक मुखिया के द्वारा विकास का कार्य किया गया, लेकिन रोजगार के अभाव में अभी भी यहां के लोग बाहर रहने को मजबूर हैं. कहती हैं मुखियापंचायत की मुखिया सुनीला देवी के मुताबिक उपलब्ध संसाधनों से गांव का समुचित विकास किया गया. गांव में दर्जन भर पीसीसी का निर्माण कर आवागमन को बेहतर बनाया गया. मुखिया के मुताबिक जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण पंचायत में जल जमाव की स्थिति बनी हुई है. जिन जगहों पर गैर मजरूआ गड्ढा है. वहां जल जमाव नहीं होता है, लेकिन खावा चंद्र टोला, झपानी आदि गांव में परेशानी बनी हुई है. उन्होंने बताया कि विकासपरक योजनाओं का लाभ ग्रामीणों को दिया जा रहा है.

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