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चाय बागान जमीन को ले तनाव का है पुराना इतिहास

Updated at : 06 Jun 2019 6:14 AM (IST)
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चाय बागान जमीन को ले तनाव का है पुराना इतिहास

ठाकुरगंज : बुधवार को ठाकुरगंज प्रखंड के सखुआडाली पंचायत में आदिवासियों के उग्र होने की घटना जिले में इस तरह की घटना का कोई पहला उदाहरण नहीं है. इसके पूर्व भी चार घटना इसी बागान में हुई थी़ आदिवासी आक्रोशित होकर इस तरह की घटना को अंजाम दे चुके है. जिसमें दो बार का मामला […]

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ठाकुरगंज : बुधवार को ठाकुरगंज प्रखंड के सखुआडाली पंचायत में आदिवासियों के उग्र होने की घटना जिले में इस तरह की घटना का कोई पहला उदाहरण नहीं है. इसके पूर्व भी चार घटना इसी बागान में हुई थी़ आदिवासी आक्रोशित होकर इस तरह की घटना को अंजाम दे चुके है. जिसमें दो बार का मामला चाय बागान को लेकर था तो एक विवादित जमीन पर मवेशी चराने को लेकर हुए विवाद के बाद तो एक विवाद शराब पीकर लौट रहे दो आदिवासियों की पुलिस पिटाई के बाद फैले अफवाह से आक्रोशित आदिवासियों ने पोठिया थाना में आग लगा दी थी.

2012 में हुई थी पहली घटना. यह घटना 02 मई 2012 को है जब पोठिया प्रखंड के पहाड़कट्टा थाना अंतर्गत शीतलपुर स्थित एक चाय बागान में पूर्व से चले आ रहे भूमि विवाद को लेकर आदिवासियों व बागान मालिक के बीच तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गयी थी. इस दौरान आदिवासियों ने लगभग दो दर्जन तीर चलाये. मौके पर पहुंची पहाड़कट्टा पुलिस की जीप को भी आदिवासी समुदाय के लोग ठेलकर अपने इलाके में लेकर चले गये. उक्त चाय बगान पहाड़कट्टा के पूर्व थाना प्रभारी मो सोहेल का था.
तीन माह बाद ही हुई थी दूसरी घटना.जिले में आदिवासियों द्वारा आक्रामक होने की दूसरी घटना पौआखाली थाना क्षेत्र अंतर्गत महेशपुर गांव में घटित हुई थी. जहां विवादित जमीन पर मवेशी चराने को लेकर आदिवासियों और स्थानीय ग्रामीणों में विवाद पैदा हुआ था. इस दौरान चले तीर में तीन लोग जख्मी हो गए थे. जिसमें जैनाल, सुकारु व नौशाद शामिल थे. इस दौरान नैजाल व सुकारु तीर से जख्मी हुआ था वही नौशाद मारपीट में घायल हुआ था.
तीसरे विवाद में पोठिया थाना में लगा दी थी आग. आदिवासियों के उग्र होकर तीर चलाने की तीसरी घटना 11 फरवरी 2017 में घटित हुई थी. जब पोठिया थाना के कर्मियों ने दो आदिवासी को शराब पीकर लौटने के दौरान पकड़ लिया. इस दौरान यह अफवाह फैल गई कि युवक की मौत हो गयी है, जबकि सच्चाई यह थी की पिटाई से युवक की हालत बिगड़ गई. जिसके बाद उसे हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. आदिवासी युवक की पिटाई से मौत की खबर सुनते ही सैकड़ों आदिवासी तीर-धनुष लेकर पहुंचे और थाने में आग लगा दी. हालात इतने बदतर हो गये थे कि आदिवासियों को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को हवा में आठ राउंड फायरिंग करनी पड़ी थी.
इसी बगान में हुई थी चौथी घटना.धुलाबाड़ी झिलबस्ती गांव में अनवारुल के चाय बागान में कब्जा जमाए आदिवासियों ने 15 मई को हिंसक रुख अपनाते हुए दूसरे पक्ष के लोगों पर अंधाधुंध तीर चला दिया, जिससे दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गये़ घटना के 15 दिनों पूर्व ही चाय बागान की जमीन को बिहार सरकार की जमीन बोल कर 56 परिवारों ने जबरन कब्जा कर लिया था, जिसके बाद एसडीओ ओर एसडीपीओ के दौरे के बाद इन्हें जमीन उपलब्ध करवाने का आश्वासन दिया गया था, जो पूरा नहीं होने पर 15 मई मंगलवार को हिंसक रूप ले लिया़ हालांकि आदिवासियों का कहना है कि दूसरा पक्ष हमला करने की नीयत से आया था़ जिसके बाद उन्होंने तीर चलाया़ इस हमले में दो व्यक्ति मुश्ताक व इम्तियाज घायल हो गये़
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