ट्रेनों से लकड़ी तस्करी जारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jun 2017 5:46 AM (IST)
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उदासीनता. रेल पुलिस प्रशासन के सामने उतारा जाता है बंडल चानन, कजरा व पीरीबाजार थाना क्षेत्र के जंगलों से लकड़ी की अवैध कटाई के बाद उसकी ट्रेनों के माध्यम से तस्करी जिले में बदस्तूर जारी है. जीआरपी व आरपीएफ के सामने किऊल में लकड़ियों का बंडल उतारा जाता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है. लखीसराय […]
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उदासीनता. रेल पुलिस प्रशासन के सामने उतारा जाता है बंडल
चानन, कजरा व पीरीबाजार थाना क्षेत्र के जंगलों से लकड़ी की अवैध कटाई के बाद उसकी ट्रेनों के माध्यम से तस्करी जिले में बदस्तूर जारी है. जीआरपी व आरपीएफ के सामने किऊल में लकड़ियों का बंडल उतारा जाता है, लेकिन कार्रवाई नहीं होती है.
लखीसराय : जिला पुलिस व वन विभाग द्वारा क्षेत्र के जंगलों से अवैध रूप से पेड़ों को काट लकड़ियों की तस्करी पर रोक लगाने के लाख दावे करते रहे हों, लेकिन हकीकत यह है कि आज भी जंगल से पेड़ों का काटा जाना जारी है. जंगल में ही लकड़ी की सिल्ली बनाकर इसकी तस्करी की जा रही है़
जिले के चानन, कजरा व पीरीबाजार थाना क्षेत्र के जंगली इलाकों के भोले-भाले आदिवासियों को थोड़े से पैसों का लालच देकर लकड़ी तस्कर जंगल में पेड़ों को कटवाते हैं और जंगल में ही लकड़ी की सिल्ली बनवा कर उसे चानन के मननपुर, बंशीपुर, कजरा थाना क्षेत्र के कजरा व धनौरी तथा पीरीबाजार थाना क्षेत्र के अभयपुर रेलवे स्टेशनों तक पहुंवाते हैं. जहां से इन लकड़ियों को डीएमयू, इएमयू व अन्य पैसेंजर ट्रेनों के माध्यम से किऊल रेलवे स्टेशन तक पहुंचाया जाता है़
किऊल से लकड़ी तस्करों की निगरानी में इन लकड़ियों को लखीसराय में बिक्री के लिए पहुंचाया जाता है़ आश्चर्य की बात यह है कि ट्रेनों एवं स्टेशनों पर आरपीएफ व जीआरपी जवानों की ड्यूटी लगी रहने के बावजूद इनके खिलाफ किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं होती है़ सिर्फ मई महीने में धनौरी रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ जमालपुर पोस्ट के जवानों द्वारा लकड़ी की 55 सिल्ली को जब्त करने के साथ एक व्यक्ति की गिरफ्तारी किया गया था. लेकिन उसके बाद पुन: यह खेल लगातार जारी है़ अवैध लकड़ी के कारोबारियों का मनोबल इतना बढ़ा रहता है कि ट्रेन में लकड़ी चढ़ाने के दौरान परेशानी होने के बावजूद कोई पैसेंजर इनसे कुछ बोल नहीं पाता है़
यहां बता दें कि किऊल जंकशन के प्लेटफार्म दो व तीन पर ही इन लकड़ियों को उतारा जाता है, जहां आरपीएफ, जीआरपी, स्टेशन प्रबंधक एवं सीआइटी कार्यालय मौजूद है. इसके बावजूद इन पर कार्रवाई शून्य ही रहती है़
तस्करों की मनमानी के कारण ट्रेन में लकड़ी चढ़ाने के दौरान परेशानी होने के बावजूद पैसेंजर नहीं कर पाते विरोध
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