बालश्रम सामाजिक अभिशाप, जड़ से करें समाप्त
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :13 Jun 2017 5:46 AM (IST)
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भाकपा कार्यालय में बाल श्रम उन्मूलन पर हुई विचार गोष्ठी सूर्यगढ़ा : विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के मौके पर स्थानीय भाकपा कार्यालय में एटक के तत्वावधान में विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. इसमें वक्ताओं ने बाल मजदूरों की स्थिति, बाल श्रमिक के विमुक्त होने पर सरकारी लाभ के प्रावधानों, बाल श्रमिकों की शिक्षा एवं […]
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भाकपा कार्यालय में बाल श्रम उन्मूलन पर हुई विचार गोष्ठी
सूर्यगढ़ा : विश्व बाल श्रम उन्मूलन दिवस के मौके पर स्थानीय भाकपा कार्यालय में एटक के तत्वावधान में विचार गोष्ठी आयोजित की गयी. इसमें वक्ताओं ने बाल मजदूरों की स्थिति, बाल श्रमिक के विमुक्त होने पर सरकारी लाभ के प्रावधानों, बाल श्रमिकों की शिक्षा एवं उसके परिवार के पुनर्वास की व्यवस्था आदि के संदर्भ में जानकारी दी. गोष्ठी की अध्यक्षता एटक महासचिव जनार्दन सिंह ने की.
विषय प्रवेश कराते हुए एटक नेता के बालश्रम को एक सामाजिक अभिशाप की संज्ञा देते हुए इसे जड़ से समाप्त किये जाने पर बल दिया. उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में आज भी गरीब परिवार के बच्चे स्कूल जाने की बजाय होटलों, चिमनी, दुकानों में मजदूरी कर रहे हैं. सरकार ने विमुक्त बाल मजदूर एवं उसके परिवार के लिए कई प्रकार के सरकारी लाभ की घोषणा कर रखी है लेकिन सरकार की लचर व्यवस्था के कारण बाल मजदूरों के परिवारों को सरकारी लाभ नहीं मिल पाता.
नेशनल प्रोजेक्ट सोसाइटी के तहत विमुक्त बाल श्रमिकों के लिए लखीसराय जिला में विद्यालय नहीं बन पाया. लखीसराय के एलइओ राजेश कुमार सिंह ने बाल श्रमिकों की विमुक्ति व उन्हें सरकार द्वारा उपलब्ध करायी जा रही योजनाओं के लाभ से संबंधित विस्तृत जानकारी दी. उन्होंने कहा कि विमुक्त बाल श्रमिक के परिवारों के पुनर्वास के लिए नौ विभागों को दायित्व सौंपा गया है.
अंचल द्वारा भूमि आवंटन में प्राथमिकता, प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभ में प्राथमिकता, स्वास्थ्य विभाग द्वारा हेल्थ कार्ड जारी किये जाने में प्राथमिकता, शिक्षा विभाग द्वारा नि:शुल्क आवासीय शिक्षा की व्यवस्था आदि का प्रावधान है. बाल श्रमिक के परिवार को राशन-केरोसिन एवं सामाजिक सुरक्षा पेंशन का लाभ प्राथमिकता के आधार पर मिलना है.
श्रम प्रवर्तन पदाधिकारी सूर्यगढ़ा प्रमोद कुमार मिश्रा ने कहा कि विमुक्त बाल श्रमिक को अविलंब एलआरडी का पैकेज तीन हजार रुपये उपलब्ध कराया जाता है तथा मुख्यमंत्री सहायता कोष से मिली 25 हजार रुपये की राशि फिक्सड डिपोजिट कर दी जाती है, जिसका लाभ बाल श्रमिक 18 वर्ष की उम्र के बाद ले सकते हैं. खेमयू के अंचल सचिव कैलाश प्रसाद सिंह ने बाल मजदूरी को समूल समाप्त किये जाने पर बल देते हुए इस बाबत जागरूकता फैलाने की बात कही.
उन्होंने कहा कि विमुक्त बाल मजदूर के लिए सरकार आवासीय विद्यालय एवं वोकेसनल ट्रेनिंग की व्यवस्था करे, ताकि पढ़-लिखकर ये बच्चे समाज के नवनिर्माण में सहायक बन सकें. सरकार के पास राशि की कमी नहीं है. बिहार भवन निर्माण कल्याण बोर्ड में काफी राशि है जिससे इन बाल मजदूरों के लिए विद्यालय का निर्माण किया जा सकता है.
जनता महाविद्यालय के पूर्व प्राचार्य पत्रकार राजेंद्र राज ने अपनी कविता के माध्यम से बाल मजदूरी का सजीव चित्रण किया. मौके पर जकड़पुरा के पंसस महेंद्र रजक, शंकर पासवान, अरुण पासवान, अनिल राम, रामबालक यादव, अरुण पासवान, अनिल राम, रामबालक यादव, शंकर रजक, कुशो राम, श्रीनिवास सिंह, शोषण राम, विशो राम, शाल्वी कुमारी आदि मौजूद थे.
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