जब बाजार खुद खेतों में उतर आया! ठाकुरगंज के अनानास बागानों में खरीदारों का जमावड़ा, सुनहरे फलों ने बदली किसानों की तकदीर
Published by : Divyanshu Prashant Updated At : 30 May 2026 12:25 PM
अनानास के खेत
Pineapple Farming: किशनगंज जिले के ठाकुरगंज में इन दिनों अनानास के बागानों में सुनहरे फलों की बहार के साथ देश भर के व्यापारियों का मेला लगा हुआ है, इस बार किसानों को 50 से 60 रुपये प्रति फल का बंपर दाम मिल रहा है, वहीं तुड़ाई से लेकर ढुलाई तक का पूरा खर्च भी व्यापारी खुद उठा रहे हैं.
ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट
Pineapple Farming: बिहार के सीमांचल में स्थित किशनगंज जिले का ठाकुरगंज प्रखंड इन दिनों एक बेहद सुखद और ऐतिहासिक कृषि क्रांति का गवाह बन रहा है. क्षेत्र में दूर-दूर तक फैले अनानास (Pineapple) के बागानों में न केवल सुनहरे और रसीले फलों की बहार आई है, बल्कि देश के विभिन्न राज्यों से आए बड़े-बड़े फल खरीदारों और थोक व्यापारियों की ऐसी भीड़ उमड़ रही है, मानो खेतों के बीच ही कोई विशाल अंतरराष्ट्रीय मंडी सज गई हो. जिन अन्नदाताओं ने महीनों तक हाड़-तोड़ धूप, कड़ाके की ठंड और मौसम की मार झेलकर अपनी फसल तैयार की थी, आज उनकी चौखट पर चलकर व्यापारी खुद पहुंच रहे हैं और मनमाफिक कीमत लगा रहे हैं. सुबह की पहली किरण के साथ ही बागानों में ट्रकों और ट्रैक्टरों का आना-जाना शुरू हो जाता है, जिससे पूरा इलाका गुलजार है.
50 से 60 रुपये प्रति फल मिल रहा मूल्य, तुड़ाई-ढुलाई का खर्च भी व्यापारी के जिम्मे
इस साल ठाकुरगंज के अनानास उत्पादक किसानों के लिए दोहरी खुशी का मौका है, जिसे निम्नलिखित बदलावों के जरिए समझा जा सकता है:
- शानदार बाजार भाव: अंतरराष्ट्रीय और घरेलू बाजार में भारी मांग के कारण इस बार किसानों को स्थानीय स्तर पर ही 50 से 60 रुपये प्रति फल तक का ऐतिहासिक मूल्य मिल रहा है.
- अतिरिक्त लागत से मुक्ति: सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि बागान से तैयार फसल को तोड़ने (Harvesting), लेबर चार्ज, वैज्ञानिक तरीके से पैकिंग करने और खेत की पगडंडियों से माल उठाकर ट्रकों तक लोड कराने का पूरा का पूरा खर्च व्यापारी स्वयं वहन कर रहे हैं. इसके चलते किसानों को शुद्ध मुनाफा हो रहा है और उनकी जेब पर परिवहन का कोई अतिरिक्त बोझ नहीं पड़ रहा.
कभी किसान खोजते थे खरीदार, अब खरीदार खोज रहे किसान
बदली तस्वीर: पिछले कुछ वर्ष पहले तक सीमांचल के इस इलाके की स्थिति बिल्कुल जुदा थी. फसल तैयार होने के बाद स्थानीय किसानों को कौड़ियों के दाम पर अपनी उपज बेचनी पड़ती थी और खरीदारों के पीछे मंडियों के चक्कर काटने पड़ते थे. कई बार समय पर उचित मूल्य और ट्रांसपोर्ट न मिलने से फल खेतों में ही सड़ जाते थे और मेहनत पर पानी फिर जाता था. लेकिन इस बार पूरी तस्वीर उलट गई है. अब किसान नहीं, बल्कि देश के कोने-कोने से आए व्यापारी अच्छे बागानों और उच्च गुणवत्ता वाली फसल की तलाश में गांव-गांव की खाक छान रहे हैं.
स्थानीय किसानों की जुबानी, समृद्धि की नई कहानी
खेतों में ही नकद भुगतान मिलने से उत्साहित स्थानीय किसानों ने अपनी खुशी साझा की:
- किसान शंकर राजभर बताते हैं, “इस बार प्रकृति (मौसम) और बाजार दोनों ने हमारा भरपूर साथ दिया है. हमारे क्षेत्र के अनानास का आकार और मिठास लाजवाब है, जिसके कारण व्यापारी सीधे खेतों में आकर डील पक्की कर रहे हैं. तुड़ाई और लोडिंग का खर्च व्यापारियों द्वारा उठाया जाना हमारे लिए लॉटरी लगने जैसा है.”
- किसान संजय चौहान कहते हैं, “पिछले सालों में फसल बेचने के लिए आढ़तियों के आगे काफी मशक्कत करनी पड़ती थी. इस बार व्यापारी खुद एडवांस लेकर बागानों में खड़े हैं. इससे हमारा भटकने का समय बच गया है और ऑन-स्पॉट (तुरंत) पेमेंट मिलने से अगली फसल की तैयारी के लिए पूंजी की दिक्कत नहीं होगी.”
क्षेत्र की अर्थव्यवस्था की ‘रीढ़’ बन रही अनानास की खेती
ठाकुरगंज के सैकड़ों एकड़ में लहलहा रही अनानास की खेती ने पारंपरिक धान-गेहूं से हटकर कैश क्रॉप (नकद फसल) की ओर कदम बढ़ाने वाले सैकड़ों किसानों के जीवन में समृद्धि की नई राह खोल दी है. इस बार केवल भूमि मालिकों को ही नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र के सैकड़ों दैनिक मजदूरों को भी तुड़ाई और छंटाई के काम में बंपर रोजगार मिला है. इसके साथ ही परिवहन क्षेत्र से जुड़े ट्रक-पिकअप वाहन चालकों, क्रेट बनाने वालों और स्थानीय छोटे दुकानदारों की आय में भी जबरदस्त उछाल आया है.
व्यापारियों के अनुसार, ठाकुरगंज की मिट्टी और जलवायु के कारण यहाँ के अनानास का विशेष स्वाद, बड़ा आकार और लंबी शेल्फ-लाइफ (जल्दी खराब न होने का गुण) इसे बाजार की पहली पसंद बनाता है. यही वजह है कि यहाँ का फल बिहार के विभिन्न बड़े शहरों के अलावा पश्चिम बंगाल, दिल्ली, यूपी और पूर्वोत्तर (नॉर्थ-ईस्ट) के राज्यों तक ट्रकों के जरिए सीधे सप्लाई किया जा रहा है. खेतों में सजी यह प्राकृतिक मंडी और किसानों के चेहरों की मुस्कान साफ बयां कर रही है कि इस बार अनानास ने सीमांचल के किसानों की किस्मत बदल दी है.
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लेखक के बारे में
By Divyanshu Prashant
दिव्यांशु प्रशांत वर्तमान में Prabhat Khabar डिजिटल में बतौर कंटेंट राइटर कार्यरत हैं। उन्होंने महात्मा गाँधी अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय वर्धा से पत्रकारिता में परास्नातक तथा टी. एन. बी. कॉलेज भागलपुर से हिंदी साहित्य में स्नातक की शिक्षा प्राप्त की है। हिंदी साहित्य की पृष्ठभूमि होने के कारण उन्हें पढ़ने, लेखन और कविता-सृजन में विशेष रुचि है। मीडिया क्षेत्र में लगभग एक वर्ष के अनुभव के दौरान वे Dainik Jagran में न्यूज़ राइटर और रिपोर्टर के रूप में कार्य कर चुके हैं। करियर के शुरुआती दौर में लोकसभा और विधानसभा चुनावों से जुड़े पॉलिटिकल कंटेंट राइटिंग का विशेष अनुभव प्राप्त किया। सटीक, निष्पक्ष और प्रभावशाली लेखन के माध्यम से पाठकों तक विश्वसनीय जानकारी पहुँचाना उनकी पेशेवर पहचान है।
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