35.76 किमी की रेल लाइन, लेकिन कहानी इससे कहीं बड़ी; चिकन नेक में क्या बदल रहा है?

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एआई जेनेरटेड सांकेतिक तस्वीर

चिकन नेक की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रेल मंत्रालय ने डुमदंगी-बागडोगरा रेल परियोजना को स्पेशल प्रोजेक्ट घोषित किया है। जानिए इसका रणनीतिक महत्व।

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किशनगंज (ठाकुरगंज) : एक तरफ देश की संवेदनशील सीमाएं, दूसरी तरफ पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला संकरा भू-भाग और इनके बीच तेजी से मजबूत होता रेल नेटवर्क. चिकन नेक अब सिर्फ नक्शे पर दिखने वाली संकरी पट्टी नहीं रह गया है, बल्कि रणनीतिक और परिवहन के लिहाज से रेलवे की प्राथमिकता वाला क्षेत्र बनता दिख रहा है.

इसी कड़ी में डुमदंगी (टिन माइल हाट)-रंगापानी-बागडोगरा के बीच प्रस्तावित 35.76 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को रेल मंत्रालय ने विशेष रेल परियोजना घोषित किया है. 3 जुलाई 2026 की अधिसूचना एस.ओ. 3742(ई) के बाद इस परियोजना का महत्व और बढ़ गया है.

ठाकुरगंज-चतरहाट के बाद अब एक और अहम रेल कड़ी

चिकन नेक को मजबूत करने की दिशा में ठाकुरगंज भी महत्वपूर्ण पड़ाव बन रहा है. ठाकुरगंज-चतरहाट नई बड़ी रेल लाइन की प्रक्रिया पहले से आगे बढ़ रही है. इसी नेटवर्क के आगे डुमदंगी से रंगापानी होते हुए बागडोगरा तक 35.76 किलोमीटर की रेल परियोजना को विशेष दर्जा मिलना पूरे क्षेत्र में रेल संपर्क को नया आयाम दे सकता है.

यानी एक ओर ठाकुरगंज-चतरहाट रेल कड़ी आगे बढ़ रही है, तो दूसरी ओर डुमदंगी-रंगापानी-बागडोगरा रेल संपर्क को मजबूत करने की तैयारी है. चिकन नेक के रेल नक्शे पर धीरे-धीरे कई नई कड़ियां जुड़ती दिखाई दे रही हैं.

डुमदंगी क्यों है महत्वपूर्ण?

डुमदंगी एनजेपी-किशनगंज रेलखंड का एक महत्वपूर्ण स्टेशन है. यह अलुआबाड़ी रोड से करीब 26 किलोमीटर और न्यू जलपाईगुड़ी से करीब 30 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. टिन माइल हाट के आगे और चतरहाट से पहले स्थित डुमदंगी की भौगोलिक स्थिति इस परियोजना को महत्वपूर्ण बनाती है.

यहीं से 35.76 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित रेल कड़ी आगे बढ़कर रंगापानी और फिर बागडोगरा तक पहुंचेगी.

बागडोगरा में रेलवे और सुरक्षा का महत्व एक साथ

बागडोगरा क्षेत्र की अहमियत केवल रेल या हवाई संपर्क तक सीमित नहीं है. यहां भारतीय वायुसेना की महत्वपूर्ण मौजूदगी है और यह इलाका भारत की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के करीब स्थित संवेदनशील क्षेत्र में आता है.

ऐसे क्षेत्र में मजबूत और अतिरिक्त परिवहन संपर्क का महत्व सामान्य रेल परियोजना से कहीं अधिक हो सकता है. सामान्य परिस्थितियों में यह रेल संपर्क यात्रियों और माल परिवहन को सुविधा देगा, जबकि आपात परिस्थितियों में मजबूत परिवहन ढांचा रसद और आवश्यक संसाधनों की आवाजाही में उपयोगी हो सकता है.

35.76 किलोमीटर की दूरी, लेकिन रणनीतिक मायने बड़े

रेल परियोजना की लंबाई भले ही 35.76 किलोमीटर है, लेकिन इसका महत्व केवल दूरी से नहीं आंका जा सकता. ठाकुरगंज-चतरहाट से लेकर डुमदंगी, रंगापानी और बागडोगरा तक रेल संपर्क मजबूत होने से इस संवेदनशील गलियारे में परिवहन का नेटवर्क और व्यापक हो सकता है.

चिकन नेक में अब कहानी सिर्फ नई रेल पटरी की नहीं है. कहानी उस मजबूत संपर्क व्यवस्था की है, जो सामान्य दिनों में यात्रियों और व्यापार को सुविधा देगी और जरूरत पड़ने पर देश के पूर्वोत्तर से जुड़ी रणनीतिक आवश्यकताओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है.


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बच्छराज

लेखक के बारे में

By बच्छराज

बच्छराज प्रिंट माध्यम में 25 वर्षों से और डिजिटल माध्यम में पिछले 3 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. ठाकुरगंज (किशनगंज) क्षेत्र में काम कर रहे हैं. सामाजिक कार्यों, शिक्षा, राजनीति व खेल में रुचि रखते हैं.

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