ठाकुरगंज में लंपी का कहर, दो दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत

Edited by Shruti Kumari
Updated:
विज्ञापन

लंपी बीमारी से प्रभावित मवेशी

Lumpy Skin Disease: किशनगंज के ठाकुरगंज प्रखंड में लंपी स्किन डिजीज का प्रकोप बढ़ गया है. दो दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में पशु संक्रमित हैं. पशुपालकों में दहशत का माहौल है.

विज्ञापन

ठाकुरगंज (किशनगंज) से बच्छराज नखत की रिपोर्ट:

Lumpy Skin Disease: ठाकुरगंज प्रखंड क्षेत्र में इन दिनों लंपी स्किन डिजीज (एलएसडी) ने पशुपालकों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. गांव-गांव में मवेशी इस वायरल बीमारी की चपेट में आ रहे हैं. अब तक दो दर्जन से अधिक मवेशियों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में संक्रमित पशुओं का उपचार जारी है.

बीमारी के तेजी से फैलने से पशुपालकों में भय और चिंता का माहौल है. प्रभावित मवेशियों के शरीर पर गांठें, चकत्ते और घाव उभर रहे हैं. कई पशु इतने कमजोर हो गए हैं कि उनका उठना-बैठना और चलना-फिरना तक मुश्किल हो गया है. दूध देने वाले पशुओं के दुग्ध उत्पादन में भी भारी गिरावट दर्ज की जा रही है, जिससे पशुपालकों की आय प्रभावित हो रही है.

गांव-गांव फैल रहा संक्रमण

वेटनरी दवा विक्रेता रियाज अरशद ने बताया कि पूरे ठाकुरगंज प्रखंड में लंपी बीमारी तेजी से फैल रही है. संक्रमण एक पशु से दूसरे पशु तक पहुंच रहा है और प्रतिदिन नए मामले सामने आ रहे हैं. दवाओं की मांग बढ़ने से कई जरूरी दवाएं बाजार में आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं.

उन्होंने बताया कि समय पर उपचार नहीं मिलने पर बीमारी गंभीर रूप धारण कर रही है, जिससे पशुओं की मौत का खतरा भी बढ़ रहा है.

कम उम्र के मवेशी अधिक प्रभावित

पशुपालक संजीव सिंह, ललन साह, मो. सईद और मो. अकरम ने बताया कि दो वर्ष से कम उम्र के मवेशी इस बीमारी से अधिक प्रभावित हो रहे हैं. संक्रमित पशुओं के शरीर पर गांठें और घाव बनने के साथ तेज बुखार और कमजोरी के लक्षण भी दिखाई दे रहे हैं.

उन्होंने बताया कि कई पशुओं का 15 से 30 दिनों तक लगातार इलाज कराना पड़ रहा है. बीमारी ने पशुपालकों की आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित किया है, क्योंकि इलाज का खर्च बढ़ने के साथ दूध उत्पादन में कमी आई है.

पशु चिकित्सालय में बढ़ी भीड़

राजकीय पशु चिकित्सालय ठाकुरगंज के पशु चिकित्सक डॉ. राजीव ने बताया कि लंपी एक विषाणुजनित बीमारी है, जो मवेशियों में तेजी से फैलती है. प्रभावित क्षेत्रों से लगातार बीमार पशुओं को अस्पताल लाया जा रहा है, जहां लक्षणों के आधार पर उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है.

उन्होंने बताया कि विभाग की मोबाइल वेटनरी यूनिट भी निर्धारित कार्यक्रम के तहत गांवों का दौरा कर रही है और पशुपालकों को बीमारी से बचाव एवं उपचार संबंधी जानकारी दे रही है.

पशुपालकों को दी गई सलाह

डॉ. राजीव ने पशुपालकों से संक्रमित पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने, पशुशालाओं की नियमित सफाई करने तथा स्वच्छ पानी और पौष्टिक आहार उपलब्ध कराने की अपील की है.

उन्होंने कहा कि यदि किसी पशु में बीमारी के लक्षण दिखाई दें तो तत्काल नजदीकी राजकीय पशु चिकित्सालय से संपर्क कर उपचार शुरू कराया जाए, ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है असर

लंपी बीमारी के बढ़ते प्रकोप ने पशुपालकों की चिंता बढ़ा दी है. यदि समय रहते प्रभावी नियंत्रण नहीं किया गया तो इसका असर केवल पशुधन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि दुग्ध उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है.

पशुपालकों ने प्रशासन से विशेष टीकाकरण अभियान और अतिरिक्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि बीमारी पर जल्द नियंत्रण पाया जा सके.

और पढ़ें: आपातकाल के समय लोकतंत्र के लिए जेल गए, बेटी को 11 महीने बाद देखा… अब पेंशन के लिए इंतजार

विज्ञापन
Shruti Kumari

लेखक के बारे में

By Shruti Kumari

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन